मियामी,17 जुलाई (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है और अब सभी की नजरें तीसरे स्थान के मुकाबले पर टिकी हैं,जहाँ यूरोप की दो दिग्गज फुटबॉल टीमें फ्रांस और इंग्लैंड आमने-सामने होंगी। मियामी स्टेडियम में खेले जाने वाला यह मुकाबला केवल कांस्य पदक जीतने तक सीमित नहीं रहेगा, =बल्कि दोनों टीमों के लिए निराशाजनक सेमीफाइनल हार के बाद सम्मान के साथ टूर्नामेंट का समापन करने का भी सुनहरा अवसर होगा। विश्व कप के फाइनल में पहुँचने का सपना टूटने के बाद अब दोनों टीमें जीत के साथ अपने अभियान का अंत करना चाहेंगी। ऐसे में यह मुकाबला रोमांच,प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस और इंग्लैंड दोनों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया,लेकिन सेमीफाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फ्रांस को स्पेन के खिलाफ 2-0 से शिकस्त मिली,जबकि इंग्लैंड को अर्जेंटीना ने बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में 2-1 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। इन हारों ने दोनों टीमों के खिताबी सपनों को तोड़ दिया,लेकिन तीसरे स्थान का मुकाबला उन्हें अपनी क्षमता साबित करने और विश्व कप अभियान को सकारात्मक अंदाज में समाप्त करने का अवसर दे रहा है।
यह मुकाबला व्यक्तिगत उपलब्धियों के कारण भी काफी चर्चा में है। फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे इस समय टूर्नामेंट में आठ गोल कर चुके हैं और उनके पास गोल्डन बूट जीतने का अंतिम मौका है। यदि वह इस मुकाबले में गोल करने में सफल रहते हैं,तो वह गोल्डन बूट की दौड़ में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं और लियोनेल मेसी को पीछे छोड़ सकते हैं। एम्बाप्पे पूरे टूर्नामेंट में फ्रांस के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी रहे हैं और उनकी गति,तकनीक तथा गोल करने की क्षमता ने विरोधी टीमों के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी की हैं। ऐसे में एक बार फिर फ्रांस की उम्मीदें उनके प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।
दूसरी ओर इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन और स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगम भी गोल्डन बूट की दौड़ में बने हुए हैं। दोनों खिलाड़ियों ने अब तक छह-छह गोल किए हैं और यदि वे इस मुकाबले में एक से अधिक गोल करने में सफल रहते हैं,तो व्यक्तिगत पुरस्कार की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इंग्लैंड की आक्रामक रणनीति में इन दोनों खिलाड़ियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है और कांस्य पदक के मुकाबले में भी टीम उनसे निर्णायक प्रदर्शन की उम्मीद करेगी।
फ्रांस ने इस विश्व कप की शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की थी। टीम ने अपने पहले मुकाबले में सेनेगल को 3-1 से हराकर शानदार आगाज किया। इसके बाद इराक के खिलाफ 3-0 की एकतरफा जीत दर्ज की और फिर नॉर्वे को 4-1 से हराकर ग्रुप चरण का समापन शीर्ष स्थान के साथ किया। फ्रांसीसी टीम ने ग्रुप चरण में अपने आक्रामक खेल और मजबूत रक्षा पंक्ति से यह स्पष्ट कर दिया था कि वह खिताब की प्रबल दावेदार है।
नॉकआउट चरण में भी फ्रांस ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखा। उसने स्वीडन को 3-0 से हराया और उसके बाद पैराग्वे तथा मोरक्को जैसी मजबूत टीमों को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। पूरे टूर्नामेंट में फ्रांस ने संतुलित प्रदर्शन किया,लेकिन सेमीफाइनल में स्पेन के खिलाफ वह अपनी लय कायम नहीं रख सका। स्पेन ने प्रभावी खेल दिखाते हुए फ्रांस को 2-0 से हराया और उसके विश्व कप जीतने के सपने पर विराम लगा दिया।
इंग्लैंड का सफर फ्रांस की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरा रहा। टीम ने अपने पहले मुकाबले में क्रोएशिया को 4-2 से हराकर शानदार शुरुआत की थी। हालाँकि,दूसरे मैच में उसे घाना के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। इसके बाद पनामा के खिलाफ जीत हासिल कर इंग्लैंड ने ग्रुप में पहला स्थान सुनिश्चित किया और आत्मविश्वास के साथ नॉकआउट चरण में प्रवेश किया।
नॉकआउट मुकाबलों में इंग्लैंड ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया। उसने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य,सह-मेजबान मैक्सिको और नॉर्वे जैसी टीमों को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। सेमीफाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ इंग्लैंड ने शुरुआत में आक्रामक खेल दिखाया और मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा,लेकिन अंततः अर्जेंटीना ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 2-1 से जीत दर्ज की। इस हार ने इंग्लैंड के फाइनल खेलने की उम्मीदों को समाप्त कर दिया।
अब दोनों टीमों के सामने चुनौती केवल कांस्य पदक जीतने की नहीं,बल्कि अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने की भी है। विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में तीसरा स्थान भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इसलिए फ्रांस और इंग्लैंड दोनों अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे और किसी भी कीमत पर जीत दर्ज करने की कोशिश करेंगे।
इतिहास भी इस मुकाबले को खास बनाता है। फ्रांस चौथी बार विश्व कप में तीसरे स्थान के लिए मुकाबला खेलेगा। उसने 1958 में पश्चिम जर्मनी को हराकर पहली बार कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 1986 में बेल्जियम को हराकर भी तीसरा स्थान हासिल किया। हालाँकि,1982 में पोलैंड के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा था। अब फ्रांस एक बार फिर तीसरी बार कांस्य पदक जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगा।
इंग्लैंड के लिए यह तीसरे स्थान का तीसरा मुकाबला होगा। इससे पहले उसे 1990 में इटली और 2018 में बेल्जियम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इंग्लिश टीम पहली बार विश्व कप का कांस्य पदक जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। यह मुकाबला इंग्लैंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने का भी अवसर होगा।
दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 32 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जा चुके हैं। इन मैचों में इंग्लैंड का पलड़ा थोड़ा भारी रहा है। इंग्लैंड ने 17 मुकाबलों में जीत दर्ज की है,जबकि फ्रांस ने 10 मैच अपने नाम किए हैं। दोनों टीमों के बीच पाँच मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। विश्व कप में भी दोनों टीमें तीन बार आमने-सामने आ चुकी हैं,जिससे यह प्रतिद्वंद्विता और भी रोचक बन जाती है।
फ्रांस की ताकत उसकी तेज आक्रमण पंक्ति और अनुभवी खिलाड़ियों में है,जबकि इंग्लैंड अपनी संतुलित टीम,मजबूत मिडफील्ड और प्रभावी आक्रमण के दम पर मुकाबले में उतरने वाला है। दोनों टीमों के पास ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं,जो अकेले दम पर मैच का रुख बदल सकते हैं। इसलिए यह मुकाबला रणनीति,कौशल और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा भी होगा।
भारतीय समयानुसार यह मुकाबला रविवार सुबह 2:30 बजे खेला जाएगा। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें इस मैच पर टिकी रहेंगी,क्योंकि इसमें केवल कांस्य पदक की लड़ाई नहीं होगी,बल्कि विश्व कप अभियान को सम्मानजनक अंत देने की जंग भी देखने को मिलेगी। साथ ही गोल्डन बूट की दौड़ भी इस मुकाबले को और अधिक रोमांचक बनाएगी। ऐसे में मियामी स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला विश्व कप 2026 के सबसे यादगार मैचों में से एक साबित हो सकता है।
