नई दिल्ली,17 जुलाई (युआईटीवी)- आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन में शामिल होकर उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। उनके अनुसार,बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे को गहरा आघात पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई का दिखावा करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा,छात्र और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले लोग शामिल हुए। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा सुधार की मांग को लेकर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं,बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
अपने संबोधन में केजरीवाल ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाला छात्र केवल एक परीक्षा देने नहीं जाता,बल्कि अपने जीवन के सपनों और वर्षों की मेहनत को साकार करने की उम्मीद लेकर परीक्षा केंद्र पहुँचता है। छात्र यह विश्वास करता है कि उसकी सफलता उसकी मेहनत,योग्यता और प्रतिभा पर निर्भर करेगी,लेकिन जब परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सामने आती हैं,तो उसका यह विश्वास टूट जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करतीं,बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देती हैं।
अरविंद केजरीवाल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और उनके बच्चों ने भी प्रतियोगी परीक्षाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि पहले के समय में इस प्रकार के पेपर लीक के मामले आम नहीं थे और छात्रों को यह भरोसा रहता था कि परीक्षा निष्पक्ष तरीके से होगी,लेकिन आज हालात बदल गए हैं और लगातार सामने आ रही घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। उनके अनुसार,यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है,तो इसका असर देश की प्रतिभा और युवाओं के आत्मविश्वास पर पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ सामने आई हैं। हर बार संबंधित एजेंसियाँ जाँच की घोषणा करती हैं,प्राथमिकी दर्ज होती है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी होती है,लेकिन कुछ समय बाद आरोपी जमानत पर बाहर आ जाते हैं। इसके बाद अगले वर्ष फिर किसी न किसी परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आ जाता है। केजरीवाल ने कहा कि यह सिलसिला बताता है कि सरकार समस्या की जड़ तक पहुँचने और उसे खत्म करने में सफल नहीं हुई है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस विवाद के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया,लेकिन इसके बावजूद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि युवाओं की भावनाओं और उनके भविष्य से जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच की आवश्यकता है।
केजरीवाल ने कहा कि देश का युवा आज केवल नौकरी नहीं चाहता,बल्कि उसे एक निष्पक्ष अवसर चाहिए। यदि परीक्षा प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं होगी,तो प्रतिभाशाली छात्रों का मनोबल टूटेगा और व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कम होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी और किसी भी परीक्षा का परिणाम केवल उनकी योग्यता के आधार पर तय होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार,शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल नए कानून बनाने से नहीं होगा,बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करनी होगी,तकनीकी सुरक्षा को मजबूत बनाना होगा और दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करनी होगी जो भविष्य में किसी के लिए भी नजीर बन सके। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आएगी,तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
अपने भाषण में अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी जनता की आवाज को नजरअंदाज किया गया था और बाद में उसके राजनीतिक परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार द्वारा युवाओं की समस्याओं और जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की जाती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अंततः अपना फैसला सुनाती है। उनके अनुसार,शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे सीधे देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं,इसलिए इन पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।
केजरीवाल ने अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी माँग की। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में लगातार गंभीर खामियाँ सामने आ रही हैं तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनके अनुसार,केवल बयान देने या जाँच कराने से स्थिति नहीं बदलेगी,बल्कि शिक्षा प्रणाली को नए दृष्टिकोण के साथ सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी नेतृत्व क्षमता चाहिए,जो शिक्षा को केवल प्रशासनिक विषय न मानकर राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार समझे।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए ऐसे व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जिन्होंने शिक्षा,नवाचार और युवाओं के विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। इसी संदर्भ में उन्होंने सोनम वांगचुक का नाम लेते हुए कहा कि उनके जैसे लोगों के अनुभव और दृष्टिकोण का लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलना चाहिए। उनके अनुसार,शिक्षा सुधार के लिए पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नए विचारों और व्यावहारिक समाधानों को अपनाना समय की मांग है।
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर उठते विवाद और पेपर लीक की घटनाएँ लगातार सार्वजनिक बहस का विषय बनी हुई हैं। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत कर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और ऐसे मामलों से उनके भविष्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता,परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग लगातार उठती रही है।
जंतर-मंतर से अरविंद केजरीवाल का यह संबोधन भी इसी बहस का हिस्सा बन गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि युवाओं के विश्वास को बहाल करना किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है,क्योंकि शिक्षा,रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता देश के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है।
