वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर (तस्वीर क्रेडिट@sportscanvas_18)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में जीता रजत पदक,भारत की पदक संख्या में हुआ इजाफा

ग्लासगो, 29 जुलाई (युआईटीवी)- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। मंगलवार देर रात आयोजित महिलाओं की 69 किलोग्राम भारवर्ग प्रतियोगिता में भारत की अनुभवी वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने दमदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। हरजिंदर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया और भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया। इस उपलब्धि के साथ वेटलिफ्टिंग में भारत के कुल पदकों की संख्या बारह हो गई है,जिसमें दो स्वर्ण,सात रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। हरजिंदर का यह प्रदर्शन न केवल उनके अनुभव और आत्मविश्वास का परिचायक रहा,बल्कि उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों से निकलकर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

महिलाओं की 69 किलोग्राम स्पर्धा में शुरुआत से ही मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 108 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 132 किलोग्राम वजन उठाया। वहीं ऑस्ट्रेलिया की न्या फीबे हेमैन ने कुल 218 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया। हरजिंदर कौर ने दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच शानदार संतुलन बनाए रखते हुए पूरे मुकाबले में पदक की दौड़ में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

हरजिंदर कौर ने स्नैच स्पर्धा की शुरुआत 101 किलोग्राम वजन उठाकर की। उन्होंने अपने शुरुआती प्रयास में आत्मविश्वास दिखाया और सफल लिफ्ट के साथ प्रतियोगिता में अच्छी शुरुआत की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 126 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका यह अंतिम प्रयास बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ,क्योंकि इसी के दम पर उन्होंने कुल 227 किलोग्राम का स्कोर बनाया और रजत पदक अपने नाम कर लिया। अंतिम प्रयास तक मुकाबला रोमांचक बना रहा,लेकिन हरजिंदर ने दबाव में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान सुरक्षित रखा।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई चानू ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर अभियान की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद ऋषिकांता सिंह चनंबम,राजा मुथुपंडी, वल्लुरी अजय बाबू, ज्ञानेश्वरी यादव और अब हरजिंदर कौर ने रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। वहीं बिंद्यारानी देवी सोरोखाइबम ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। इन उपलब्धियों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

हरजिंदर कौर की सफलता के पीछे संघर्ष,मेहनत और आत्मविश्वास की लंबी कहानी छिपी हुई है। 14 अक्टूबर 1996 को पंजाब के नाभा के पास स्थित मेहास गाँव में एक किसान परिवार में जन्मीं हरजिंदर का बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। उनका परिवार बेहद साधारण परिस्थितियों में रहता था और एक छोटे से कमरे के घर में उनका पूरा परिवार जीवनयापन करता था। सीमित संसाधनों के कारण उनके पिता के लिए खेल प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाना आसान नहीं था। कई बार आर्थिक तंगी के कारण उनके खेल करियर पर संकट भी आया,लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी और हरजिंदर ने भी अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं हरजिंदर का बचपन कठिन शारीरिक मेहनत के बीच गुजरा। वह रोजाना घर के कामों में परिवार का हाथ बँटाती थीं। मवेशियों के लिए चारा तैयार करने हेतु उन्हें हाथ से चलने वाली भारी चारा काटने की मशीन घंटों तक चलानी पड़ती थी। उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही मेहनत उनके शरीर के ऊपरी हिस्से को असाधारण ताकत प्रदान कर रही है। लगातार शारीरिक श्रम के कारण उनके हाथों और कंधों की शक्ति विकसित हुई,जिसने आगे चलकर वेटलिफ्टिंग के मंच पर उन्हें बड़ी सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जब हरजिंदर ने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया,तब उनके सामने संसाधनों की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बेहतर उपकरण,पौष्टिक आहार और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अपनी राह बनाई। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली और फिर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी क्षमता का परिचय देना शुरू किया।

हरजिंदर कौर पहले भी बड़े मंचों पर भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं और उनकी पहचान एक भरोसेमंद वेटलिफ्टर के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह दबाव की परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की इस प्रतियोगिता में भी उन्होंने अंतिम प्रयास तक धैर्य बनाए रखा और निर्णायक लिफ्ट के जरिए रजत पदक सुनिश्चित किया। यह प्रदर्शन उनके अनुभव और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में हरजिंदर कौर का यह रजत पदक भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है,जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। एक छोटे से गाँव से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा,मेहनत और मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी बड़ी बाधा नहीं बन सकता। हरजिंदर कौर ने अपने संघर्ष और उपलब्धियों से यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने का जुनून हो,तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है। उनका यह रजत पदक भारतीय वेटलिफ्टिंग की बढ़ती ताकत का प्रतीक है और आने वाले वर्षों में उनसे देश को और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद रहेगी।