ओस्लो,21 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर नॉर्वे और वॉशिंगटन के बीच मतभेद सामने आए हैं। नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका के एक वरिष्ठ व्यापार अधिकारी के साथ हुई बैठक में नॉर्वे ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में टैरिफ के अलावा वैश्विक औद्योगिक उत्पादन क्षमता यानी ओवरकैपेसिटी को लेकर अमेरिका की ओर से की जा रही जाँच का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। नॉर्वे ने अमेरिका की एकतरफा टैरिफ नीति और उसके पीछे दिए जा रहे तर्कों पर असहमति जताते हुए अपने हितों की रक्षा के लिए बातचीत जारी रखने का संकेत दिया है।
नॉर्वे के विदेश मंत्रालय के मुताबिक,राज्य सचिव एंड्रियास मोट्जफेल्ट क्राविक ने बुधवार को वॉशिंगटन में अमेरिका के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेफ गोटमैन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच नॉर्वे और अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों को लेकर चर्चा हुई। बातचीत में अमेरिकी टैरिफ नीति और वैश्विक औद्योगिक उत्पादन क्षमता को लेकर वॉशिंगटन की जाँच पर नॉर्वे ने अपना पक्ष रखा।
अमेरिका ने 24 जुलाई को नॉर्वे और यूरोपीय संघ समेत करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। वॉशिंगटन की ओर से इन कदमों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें संबंधित देशों से आने वाले ऐसे उत्पादों पर पर्याप्त प्रतिबंध नहीं होना भी शामिल है, जिन्हें जबरन मजदूरी के जरिए तैयार किया गया माना जाता है। अमेरिका का तर्क है कि ऐसी व्यापारिक परिस्थितियों से घरेलू उद्योग और अमेरिकी श्रमिकों पर असर पड़ सकता है।
हालाँकि,नॉर्वे ने अमेरिका के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया है। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा कि उनका देश अमेरिका की ओर से एकतरफा तरीके से लगाए जा रहे टैरिफ और उसके पीछे दी गई दलीलों से पूरी तरह असहमत है। उन्होंने कहा कि नॉर्वे और यूरोपीय संघ के साथ अलग-अलग व्यवहार करने का कोई उचित आधार नहीं है। नॉर्वे की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि वह अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना चाहता है,लेकिन इसके लिए उसे अपने आर्थिक हितों की कीमत नहीं चुकानी होगी।
बैठक में नॉर्वे के अधिकारी ने अमेरिका की ओवरकैपेसिटी जाँच पर भी सवाल उठाए। अमेरिका ने नॉर्वे,यूरोपीय संघ और 14 अन्य देशों को इस जाँच के दायरे में शामिल किया है। वॉशिंगटन यह जाँच वैश्विक औद्योगिक उत्पादन क्षमता और उससे जुड़े व्यापारिक प्रभावों के संदर्भ में कर रहा है। नॉर्वे का मानना है कि इस जाँच के आधार और इसके संभावित परिणामों को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं।
नॉर्वे के विदेश मंत्री ने कहा कि राज्य सचिव क्राविक ने बैठक में अमेरिकी ओवरकैपेसिटी जांच को लेकर अपने देश की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। नॉर्वे की आपत्ति सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है,बल्कि वह अमेरिका की ओर से व्यापार नीति के तहत की जा रही विभिन्न जांचों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है।
इस बैठक में नॉर्वे और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की संभावना पर भी चर्चा हुई। नॉर्वे ने संकेत दिया है कि यदि दोनों देशों के बीच किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जाता है,तो वह उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होना चाहिए। विदेश मंत्री ईडे ने साफ शब्दों में कहा कि नॉर्वे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उनका कहना है कि संभावित व्यापार समझौते की शर्तें नॉर्वे के आर्थिक हितों और व्यापारिक प्राथमिकताओं के अनुकूल होनी चाहिए।
नॉर्वे की इस स्थिति से स्पष्ट है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहता। इसके बजाय वह वार्ता के जरिए टैरिफ और व्यापार से जुड़े विवादों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है,लेकिन साथ ही उसने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव में ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा,जिससे उसके आर्थिक हित प्रभावित हों।
बैठक के बाद नॉर्वे के राज्य सचिव एंड्रियास मोट्जफेल्ट क्राविक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी बातचीत को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेफ गोटमैन के साथ उनकी रचनात्मक बैठक हुई। उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों पर चर्चा होने की बात कही। साथ ही उन्होंने नॉर्वे के खिलाफ सेक्शन 301 जांचों को लेकर अपने देश का कड़ा विरोध दोहराया।
क्राविक ने संकेत दिया कि नॉर्वे इस मुद्दे को आगे भी अमेरिका के सामने उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर आगे बातचीत जारी रखने की उम्मीद करते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर और बैठकें हो सकती हैं।
नॉर्वे के विदेश मंत्री ने अमेरिकी टैरिफ नीति के व्यापक प्रभाव को लेकर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि वॉशिंगटन की मौजूदा टैरिफ नीति केवल उन देशों के लिए अनिश्चितता पैदा नहीं कर रही है,जिनके खिलाफ नए शुल्क लगाए जा रहे हैं,बल्कि उन देशों के लिए भी परेशानी बढ़ा रही है,जिन्होंने पहले ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते कर रखे हैं। इससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है।
व्यापार विशेषज्ञों के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसकी टैरिफ नीति का प्रभाव केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका की ओर से अलग-अलग देशों के उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने या व्यापारिक जाँच शुरू करने से कंपनियों की लागत,आपूर्ति श्रृंखला और निवेश योजनाओं पर असर पड़ सकता है। नॉर्वे का कहना है कि ऐसी परिस्थितियाँ वैश्विक व्यापार के लिए अनिश्चितता पैदा करती हैं।
नॉर्वे और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, समुद्री उद्योग,प्रौद्योगिकी,औद्योगिक उत्पादों और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में टैरिफ को लेकर बढ़ता विवाद दोनों देशों के कारोबारी समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। नॉर्वे चाहता है कि मौजूदा मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाए,ताकि व्यापारिक संबंधों पर इसका नकारात्मक असर कम किया जा सके।
नॉर्वे की ओर से यूरोपीय संघ के साथ समान व्यवहार की मांग भी इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू है। नॉर्वे यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है,लेकिन उसका यूरोपीय बाजार और यूरोपीय अर्थव्यवस्था के साथ गहरा आर्थिक जुड़ाव है। ऐसे में नॉर्वे का तर्क है कि उसके साथ यूरोपीय संघ से अलग व्यवहार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसी मुद्दे को बैठक के दौरान नॉर्वे के अधिकारी ने अमेरिकी पक्ष के सामने रखा।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। नॉर्वे ने अमेरिकी टैरिफ और सेक्शन 301 जांचों पर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है,जबकि संभावित व्यापार समझौते को लेकर भी चर्चा जारी है। हालाँकि,नॉर्वे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी समझौता उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही होना चाहिए।
कुल मिलाकर,अमेरिका की नई टैरिफ नीति ने नॉर्वे के साथ उसके व्यापारिक संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। नॉर्वे ने एकतरफा शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले पर असहमति जताते हुए ओवरकैपेसिटी जाँच और सेक्शन 301 कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही उसने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है। अब आगे की वार्ताओं में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश टैरिफ विवाद को किस तरह सुलझाते हैं और क्या नॉर्वे तथा अमेरिका के बीच ऐसा व्यापार समझौता संभव हो पाता है,जो दोनों पक्षों के हितों को संतुलित कर सके।
