मुंबई,26 अगस्त (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपने एक रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा में हैं। विज्ञापन में उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी। कुछ लोगों ने उनके आउटफिट को रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के अनुरूप नहीं बताया। विवाद बढ़ने के बाद कृति सेनन ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा था कि किसी भी त्योहार की असली खूबसूरती केवल कपड़ों में नहीं,बल्कि उससे जुड़े रिश्तों, भावनाओं और परंपराओं के महत्व में होती है। अब इस विवाद के एक दिन बाद ज्वेलरी ब्रांड ने अपना विज्ञापन सभी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया है। ब्रांड ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर कहा कि अगर विज्ञापन से समाज के किसी वर्ग की भावनाएँ आहत हुई हैं,तो उसे इसका खेद है।
ज्वेलरी ब्रांड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वह भारतीय संस्कृति,परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करता है। ब्रांड ने कहा कि उसका हमेशा से यह मानना रहा है कि त्योहारों और खुशियों के पलों को पूरे परिवार के साथ मनाया जाना चाहिए। इस बार विज्ञापन के जरिए पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा मानते हुए उन्हें इस खुशी और जश्न में शामिल करने की कोशिश की गई थी। हालाँकि,अगर विज्ञापन की वजह से समाज के किसी वर्ग की भावनाएँ आहत हुई हैं,तो ब्रांड ने इसके लिए खेद जताया है। इसी के साथ विज्ञापन को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया गया।
यह पूरा विवाद एक रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुआ था,जिसमें कृति सेनन नजर आई थीं। विज्ञापन में अभिनेत्री ने ऑफ-व्हाइट रंग का इंडो-वेस्टर्न पहनावा पहना था। इसमें ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज,ड्रेप्ड स्कर्ट और केप शामिल था। विज्ञापन में कृति के साथ उनके पालतू कुत्तों को भी दिखाया गया था। विज्ञापन का उद्देश्य रक्षाबंधन के अवसर पर परिवार, प्यार और रिश्तों के साथ पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा बताना था,लेकिन विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने कृति के पहनावे को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक भारतीय त्योहार के विज्ञापन में अभिनेत्री का पहनावा अधिक पारंपरिक होना चाहिए था। देखते ही देखते विज्ञापन को लेकर बहस तेज हो गई। लोगों की प्रतिक्रियाओं के बीच कृति सेनन ने 25 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर अपनी बात रखी। अभिनेत्री ने कहा कि त्योहारों का मतलब केवल इस बात से नहीं होता कि कोई व्यक्ति क्या पहन रहा है,बल्कि त्योहार उन परंपराओं से जुड़े होते हैं,जिनके पीछे भावनाएँ और रिश्ते होते हैं।
कृति ने रक्षाबंधन के महत्व को बताते हुए कहा कि यह त्योहार सुरक्षा और प्यार के रिश्ते का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बाँधती हैं और एक-दूसरे की सुरक्षा,अच्छी सेहत,खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। अभिनेत्री ने कहा कि उनके लिए प्यार,प्रार्थना और एक-दूसरे की देखभाल का यह रिश्ता उनके पालतू कुत्तों तक भी पहुँचता है,क्योंकि वे भी उनके परिवार का हिस्सा हैं।
कृति ने अपनी पोस्ट में महिलाओं के कपड़ों और संस्कृति को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि समय के साथ एथनिक फैशन में भी काफी बदलाव आया है,लेकिन आज भी किसी महिला के अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों के आधार पर मापा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला के दिल में होती हैं,उसकी नेकलाइन में नहीं।
कृति का यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। जहाँ कुछ लोगों ने अभिनेत्री के विचारों का समर्थन किया,वहीं कुछ यूजर्स ने विज्ञापन को लेकर अपनी आलोचना जारी रखी। इसी बीच यह विवाद तब और ज्यादा सुर्खियों में आ गया,जब अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा किया। कंगना ने अपने पोस्ट में कृति सेनन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया,लेकिन उनकी टिप्पणी को इसी विज्ञापन से जोड़कर देखा गया।
कंगना ने अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद फैशन के विभिन्न विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं के पास कपड़ों के कई विकल्प हैं और आधुनिक महिला वैश्विक स्तर पर फैशन को अपनाती है। उन्होंने कॉकटेल ड्रेस से लेकर लहँगा -चोली,जींस से साड़ी और बिकिनी से सलवार-कमीज तक का उदाहरण दिया। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी त्योहार पर भाई को राखी बाँधनी है,तो उसके लिए इतने विकल्पों के बावजूद बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे कपड़ों का चुनाव क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन को जानबूझकर अजीब तरीके से बनाया गया विज्ञापन भी बताया।
कंगना की टिप्पणी के बाद विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। हालाँकि,कृति सेनन ने अपने जवाब में कंगना का नाम नहीं लिया और न ही उनकी पोस्ट पर सीधे प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी बात को महिलाओं की पसंद और त्योहारों की भावनाओं से जोड़ते हुए रखा। कृति का कहना था कि किसी महिला की संस्कृति के प्रति सम्मान को केवल उसके पहनावे से तय करना सही नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच ज्वेलरी ब्रांड का विज्ञापन हटाने का फैसला अब चर्चा का नया विषय बन गया है। ब्रांड ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य भारतीय त्योहारों और परिवार की भावना को सम्मान देना था। साथ ही पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा बताने की कोशिश की गई थी,लेकिन लोगों की आपत्तियों के बाद ब्रांड ने विज्ञापन हटाने का निर्णय लिया। हालाँकि,ब्रांड ने यह स्पष्ट नहीं किया कि विज्ञापन को दोबारा किसी बदलाव के साथ जारी किया जाएगा या नहीं।
रक्षाबंधन भारत के प्रमुख पारिवारिक त्योहारों में से एक है। इस दिन भाई-बहन के बीच प्रेम,विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते को महत्व दिया जाता है। बदलते समय के साथ त्योहारों के उत्सव और उन्हें प्रस्तुत करने के तरीकों में भी बदलाव आया है। विज्ञापन और फैशन की दुनिया में पारंपरिक परिधानों के साथ आधुनिक पहनावे को भी जगह मिलती रही है। ऐसे में कृति सेनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता नजर आया कि त्योहारों की प्रस्तुति में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।
विज्ञापन में पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा दिखाने की कोशिश भी इसकी एक खास विशेषता थी। आज बड़ी संख्या में परिवार अपने पालतू जानवरों को परिवार के सदस्य के तौर पर देखते हैं। कृति ने भी अपने बयान में इसी भावना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि जिस तरह वह और उनकी बहन एक-दूसरे की सुरक्षा और खुशी की कामना करती हैं,उसी तरह उनके पालतू कुत्ते भी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके प्रति प्यार तथा देखभाल उसी पारिवारिक भावना का हिस्सा है।
दूसरी ओर,विज्ञापन के विरोध में सामने आई प्रतिक्रियाओं ने यह बहस भी छेड़ दी कि क्या किसी त्योहार के विज्ञापन में कलाकारों के पहनावे को लेकर एक तय मानक होना चाहिए। एक वर्ग का मानना रहा कि पारंपरिक त्योहारों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विज्ञापन में परिधान का चयन किया जाना चाहिए,जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि किसी महिला के कपड़ों के आधार पर उसकी संस्कृति या परंपराओं के प्रति सम्मान तय नहीं किया जाना चाहिए।
कृति सेनन ने इसी दूसरे पक्ष को मजबूती से सामने रखा। उन्होंने अपने बयान के जरिए यह सवाल उठाया कि महिलाओं के पहनावे को बार-बार उनकी संस्कृति और चरित्र से क्यों जोड़ा जाता है। उनका कहना था कि कपड़े समय के साथ बदलते हैं,लेकिन किसी व्यक्ति के रिश्तों,भावनाओं और परंपराओं के प्रति सम्मान को केवल उसके कपड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए।
फिलहाल ज्वेलरी ब्रांड ने विवाद के बीच विज्ञापन को सभी प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। इसके साथ ही रक्षाबंधन के इस विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस भी अब एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का रूप ले चुकी है। एक तरफ विज्ञापन में आधुनिक फैशन और पारिवारिक रिश्तों को साथ दिखाने की कोशिश थी,वहीं दूसरी तरफ पहनावे को लेकर उठी आपत्तियों ने परंपरा और आधुनिकता के बीच बहस को जन्म दे दिया। कृति सेनन की प्रतिक्रिया ने महिलाओं की पसंद और उनके पहनावे को लेकर समाज में मौजूद अपेक्षाओं पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं,ब्रांड का विज्ञापन हटाना यह दिखाता है कि त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों को लेकर दर्शकों की भावनाएँ और प्रतिक्रियाएँ ब्रांड के फैसलों पर कितना असर डाल सकती हैं।
