सोल,26 अगस्त (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में मंगलवार को कई रूसी सैन्य विमानों के उसके एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में प्रवेश करने का मामला सामने आया है। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बुधवार को दावा किया कि रूसी सैन्य विमान देश के पूर्वी समुद्री क्षेत्र के ऊपर स्थित कोरियन एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन यानी केएडीआईजेड में दाखिल हुए थे। हालाँकि,दक्षिण कोरियाई रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये विमान थोड़े समय बाद ही क्षेत्र से वापस लौट गए। इस घटना के बाद दक्षिण कोरियाई सेना ने सतर्कता बढ़ाते हुए अपनी वायुसेना के लड़ाकू विमानों को संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैनात किया।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ की ओर से जारी बयान के मुताबिक,रूसी सैन्य विमानों की गतिविधि पर दक्षिण कोरियाई सेना की पहले से नजर थी। विमानों ने दक्षिण कोरिया के सबसे पूर्वी द्वीप डोकडो और उसके नजदीक स्थित उल्लुंगदो द्वीप के आसपास केएडीआईजेड में प्रवेश किया। सैन्य अधिकारियों ने विमानों की गतिविधियों का पता लगते ही अपनी वायुसेना को सक्रिय किया और लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित आकस्मिक स्थिति से निपटना और देश की हवाई सुरक्षा को सुनिश्चित करना था।
हालाँकि,दक्षिण कोरिया ने इस घटना को अपने संप्रभु हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं बताया है। सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रूसी विमानों ने दक्षिण कोरिया के वास्तविक हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया। यानी यह मामला किसी देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हवाई सीमा में घुसपैठ का नहीं है। रूसी विमानों का प्रवेश केवल केएडीआईजेड तक सीमित रहा और वे कुछ समय बाद वहां से बाहर निकल गए।
केएडीआईजेड को समझना इस घटना के महत्व को जानने के लिए जरूरी है। एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन किसी देश के संप्रभु हवाई क्षेत्र का हिस्सा नहीं होता। यह एक निर्धारित क्षेत्र होता है,जिसमें प्रवेश करने वाले विदेशी विमानों से आम तौर पर अपनी पहचान और उड़ान संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी संभावित हवाई टकराव या गलतफहमी को रोकना और संबंधित देश को अपनी वायु सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय देना होता है। इसलिए किसी विदेशी सैन्य विमान का केएडीआईजेड में प्रवेश अपने आप में हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के बराबर नहीं माना जाता।
रूसी विमानों की यह गतिविधि ऐसे समय सामने आई है,जब पूर्वी एशिया में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। तीनों देश उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आपसी समन्वय बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिका ने हाल ही में दक्षिण कोरिया और जापान के साथ ‘फ्रीडम एज’ नामक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास की तैयारी की पुष्टि की है।
दक्षिण कोरिया के लिए रूस और चीन के सैन्य विमानों की केएडीआईजेड में गतिविधियाँ कोई नई बात नहीं हैं। इससे पहले जून में भी करीब 10 चीनी और रूसी सैन्य विमान दक्षिण कोरिया के केएडीआईजेड में दाखिल हुए थे। ये विमान कुछ समय बाद क्षेत्र से बाहर निकल गए थे। उस घटना के बाद सोल ने चीन और रूस के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था। दक्षिण कोरिया लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे सैन्य विमानों की गतिविधियों पर उसकी नजर रहती है और किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से निपटने के लिए उसकी सेना तैयार रहती है।
जून की घटना से पहले पिछले साल दिसंबर में भी चीन और रूस के नौ सैन्य विमानों के केएडीआईजेड में प्रवेश करने की जानकारी सामने आई थी। उस समय भी विमानों ने दक्षिण कोरिया के वास्तविक हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया था,लेकिन उनकी मौजूदगी को लेकर सोल ने चिंता जताई थी। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2019 से चीन और रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के साल में एक या दो बार अपने सैन्य विमानों को केएडीआईजेड में भेजते रहे हैं।
विशेषज्ञों के लिए इस तरह की गतिविधियाँ इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पूर्वी एशिया में कई देशों की सुरक्षा चिंताएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। दक्षिण कोरिया अमेरिका का प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है,जबकि जापान के साथ भी उसके सैन्य और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दूसरी तरफ रूस और चीन क्षेत्र में अपने सैन्य सहयोग और गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में किसी भी देश के सैन्य विमानों की गतिविधि पर क्षेत्रीय देशों की नजर बनी रहती है।
मंगलवार की घटना में फिलहाल किसी टकराव या नुकसान की सूचना नहीं है। रूसी सैन्य विमान केएडीआईजेड में प्रवेश करने के बाद कुछ समय में वापस लौट गए और दक्षिण कोरियाई सेना ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी। हालाँकि,लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण सियोल के लिए यह एक संवेदनशील सुरक्षा मुद्दा बना हुआ है। दक्षिण कोरिया की सेना आने वाले समय में भी क्षेत्र में विदेशी सैन्य विमानों की गतिविधियों पर निगरानी जारी रखेगी,ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
