ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर, खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ी वैश्विक चिंता (तस्वीर क्रेडिट@thetimesq8)

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा,अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दो लॉन्चरों को बनाया निशाना

वॉशिंगटन,31 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने रविवार को स्थानीय समय के अनुसार ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान पूरा करने का दावा किया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरानी बल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में नई समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे। इसी गतिविधि को देखते हुए अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर कार्रवाई की।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि अमेरिकी सेना ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जवानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते हुए देखा था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर मौजूद दो लॉन्चरों को निशाना बनाया। हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र पर करीबी नजर बनाए हुए है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।

लारक द्वीप ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप है। यह बंदर अब्बास के तट के पास स्थित है। भौगोलिक रूप से यह केश्म द्वीप के पूर्व और होर्मुज द्वीप के दक्षिण में स्थित है। इसकी स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक होने के कारण इसे सैन्य और समुद्री गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या समुद्री बारूदी सुरंगों की मौजूदगी से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि रविवार रात होर्मोजगान प्रांत के लारक द्वीप पर हुए अमेरिका-इजरायल हमले में कई सैन्यकर्मी और आम नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं। आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक समाचार मंच पर जारी बयान में कहा कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और हमलावर को इसकी सजा मिलेगी। हालाँकि,ईरान की ओर से बताए गए हताहतों के आँकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने अनौपचारिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि कथित अमेरिकी ड्रोन हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। दूसरी ओर,ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि रविवार रात लारक द्वीप पर एक जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी गई। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिका की कार्रवाई को लेकर एक अमेरिकी अधिकारी ने भी जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने ईरानी बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी करते हुए देखा था। अधिकारी के मुताबिक,इसी गतिविधि के जवाब में ईरान के दो लॉन्चरों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इससे पहले पिछले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों से समुद्री सुरंगों को हटाने का अभियान पूरा किया था। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा को रोकना है।

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरानी ठिकानों पर अमेरिका की यह एक महीने से अधिक समय बाद पहली सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है। इससे पहले दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ चुका है। ऐसे में अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी क्षेत्र में दो लॉन्चरों को निशाना बनाया जाना आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता,बल्कि वैश्विक बाजारों और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में नई बारूदी सुरंगें बिछाने को लेकर कड़ी चेतावनी दे चुके हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा था कि जो भी जहाज या नाव नई बारूदी सुरंगें बिछाने में शामिल होगी, उसे तुरंत और व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के खिलाफ अमेरिका की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पूरी तरह लागू है।

अमेरिका की इस चेतावनी और लारक द्वीप पर हुई सैन्य कार्रवाई से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की किसी भी ऐसी गतिविधि को गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है,जिससे अंतर्राष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने हमले का जवाब देने की बात कही है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर है। इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि,बारूदी सुरंगों की तैनाती या जहाजों पर हमले से वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा,क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव पड़ने की संभावना है। अमेरिका जहाँ समुद्री मार्गों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को अपनी प्राथमिकता बता रहा है,वहीं ईरान अमेरिकी कार्रवाई को हमले के रूप में देख रहा है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच लारक द्वीप की घटना ने पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला दिया है।