वॉशिंगटन,3 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना ईरान पर नए हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर किसी भी समय सैन्य कार्रवाई दोहराई जा सकती है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने मंगलवार रात ईरान पर किए गए हमले को बेहद बड़ा बताया और कहा कि अमेरिका भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई करने में सक्षम है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान की ओर से हाल ही में लगाए गए या दोबारा तैयार किए गए सभी नए सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान जिन उपकरणों को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहा था, उन्हें भी अमेरिकी सेना ने खत्म कर दिया। ट्रंप के इस दावे से संकेत मिलता है कि अमेरिका की ओर से ईरान की सैन्य क्षमताओं और खास तौर पर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के आसपास उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी सेना जब चाहे तब ईरान के खिलाफ दोबारा हमला कर सकती है। उनके मुताबिक,मंगलवार रात की कार्रवाई के बाद भी अमेरिका की सैन्य क्षमता बरकरार है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ और हमले किए जा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को तेहरान के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
इसी दौरान ट्रंप से होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर उनके नाम पर रखने को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा करने का कोई वास्तविक फैसला नहीं लिया गया है और यह सिर्फ एक सुझाव के तौर पर कहा गया था। दरअसल,इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर मजाकिया अंदाज में सवाल किया था कि अब जबकि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका के नियंत्रण में है,तो क्या उसका नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ कर देना चाहिए।
ट्रंप की इस टिप्पणी ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद ज्यादा है। फारस की खाड़ी से बाहर जाने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के लिए यह समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर असर डाल सकता है।
ट्रंप इससे पहले भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर आक्रामक बयान दे चुके हैं। पिछले महीने लॉन्ग आइलैंड में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका ईरान को पूरी तरह पराजित करता है,तो वह होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर सकते हैं। उस समय भी उनके बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा पैदा की थी।
हालाँकि,अब व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने अपने हालिया ‘ट्रंप स्ट्रेट’ वाले बयान को गंभीर नीति के बजाय महज सुझाव बताया। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश नजर आई कि फिलहाल समुद्री मार्ग का नाम बदलने को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया या निर्णय नहीं हुआ है।
इस बीच ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी हमले को लेकर एक गंभीर दावा किया है। ईरान का कहना है कि मंगलवार रात अमेरिकी हमले में दक्षिणी ईरान में चल रहे एक शादी समारोह को निशाना बनाया गया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार,इस घटना में कम-से-कम चार लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
ईरान की ओर से लगाए गए इस आरोप ने सैन्य कार्रवाई को लेकर मानवीय चिंता बढ़ा दी है। यदि किसी सैन्य हमले में वास्तव में नागरिकों की जान गई है,तो यह अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और युद्ध के दौरान नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
हालाँकि,अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी सैन्य कमान ने कहा है कि वह इन रिपोर्टों की जाँच कर रही है। सेंटकॉम ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना जानबूझकर नागरिकों को निशाना नहीं बनाती।
अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच नागरिकों के हताहत होने की खबर ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक क्षेत्रों और गैर-सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचने की किसी भी रिपोर्ट पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े नए सैन्य तनाव से बेहद चिंतित हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने खास तौर पर उन रिपोर्टों पर चिंता जताई है,जिनमें दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह पर हमले और नागरिकों के हताहत होने की बात सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
स्टीफन दुजारिक के मुताबिक,एंटोनियो गुटेरेस नागरिकों को निशाना बनाने वाले सभी हमलों की निंदा करते हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान समेत सभी पक्षों को याद दिलाया कि सैन्य कार्रवाई के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना जरूरी है। इसमें नागरिकों की सुरक्षा, सैन्य कार्रवाई में संतुलन और अधिकतम सावधानी बरतने जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मौजूदा स्थिति को और बिगड़ने से रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि लगातार सैन्य हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में क्षेत्र के अन्य देश भी प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास किसी भी सैन्य गतिविधि का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
ट्रंप की ओर से दोबारा हमले की तैयारी का दावा और ईरान की ओर से अमेरिकी कार्रवाई को लेकर लगातार सामने आ रहे आरोप इस बात का संकेत हैं कि तनाव फिलहाल कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसी भी नए सैन्य कदम से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ईरान की ओर से नागरिकों के मारे जाने का दावा और अमेरिका की ओर से इसकी जाँच की बात ने भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने जिस तरह तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और संयम बरतने की अपील की है,उससे स्पष्ट है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस टकराव के व्यापक रूप लेने को लेकर चिंतित है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव आगे किस दिशा में जाएगा। ट्रंप ने जहाँ नए हमले की तैयारी की बात कही है,वहीं संयुक्त राष्ट्र लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। ईरान में नागरिकों के हताहत होने की रिपोर्टों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी,क्योंकि इससे सैन्य कार्रवाई के मानवीय प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप की टिप्पणियों ने इस पूरे घटनाक्रम को और रणनीतिक महत्व दे दिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण होने के कारण यहाँ किसी भी प्रकार का लंबे समय तक चलने वाला सैन्य तनाव अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर है। यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है,तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, नागरिकों की स्थिति,ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं,यदि दोनों पक्ष अंतर्राष्ट्रीय अपील को स्वीकार करते हुए सैन्य कार्रवाई रोकते हैं,तो तनाव कम करने और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति की आक्रामक चेतावनी और ईरान से सामने आ रही गंभीर रिपोर्टों के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
