वाशिंगटन,3 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूस के भीतर यूक्रेन की ओर से किए जा रहे लगातार हमले और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध मिलकर रूसी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय कई ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं,जिनमें युद्ध से जुड़ी परिस्थितियों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक दबाव भी शामिल हैं। हालाँकि, रुबियो ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूसी अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ है और उन्होंने किसी विशेष यूक्रेनी हमले का उदाहरण भी नहीं दिया।
रुबियो ने रूस, ईरान और यूक्रेन युद्ध से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के दौरान कहा कि यूक्रेन द्वारा रूस के अंदर किए जा रहे हमले और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध मॉस्को के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। हाल के महीनों में यूक्रेन ने लंबी दूरी तक हमला करने वाले ड्रोन और अन्य हथियारों का इस्तेमाल करते हुए रूस के सैन्य ठिकानों के अलावा ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। इन हमलों का उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ाना माना जाता है।
दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस पर आर्थिक और वित्तीय दबाव बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना और युद्ध के लिए आवश्यक संसाधनों तक उसकी पहुँच को सीमित करना है। रुबियो के अनुसार, यूक्रेन के हमलों और पश्चिमी प्रतिबंधों का संयुक्त प्रभाव रूस के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन रहा है।
रुबियो ने इस दौरान यूक्रेन की वायु रक्षा जरूरतों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन लगातार पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली और इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग कर रहा है। हालाँकि,अमेरिका के सामने खुद अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है। उनके मुताबिक,मौजूदा समय में दुनिया के कई देश अधिक संख्या में वायु रक्षा मिसाइलें हासिल करना चाहते हैं और यह केवल यूक्रेन की जरूरत नहीं रह गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में वायु रक्षा प्रणालियों और इंटरसेप्टर मिसाइलों की माँग काफी बढ़ गई है। ऐसे में अमेरिका को दूसरे देशों को हथियार उपलब्ध कराने से पहले अपनी न्यूनतम रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सुरक्षा जरूरतें प्राथमिकता में रहेंगी और उसके बाद ही उपलब्ध क्षमता के आधार पर दूसरे देशों की सहायता की जा सकती है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपनी उपलब्ध क्षमता और संसाधनों के अनुसार यूक्रेन की मदद जारी रखेगा। हालाँकि,उन्होंने इस बात का संकेत भी दिया कि हथियारों की आपूर्ति की अपनी सीमाएँ हैं। वायु रक्षा प्रणालियों और इंटरसेप्टर मिसाइलों की माँग बढ़ने के कारण अमेरिका के सामने उत्पादन और उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
यूक्रेन को भविष्य में खुद उन्नत मिसाइल रोधी रक्षा प्रणालियाँ बनाने की अनुमति देने के सवाल पर भी रुबियो ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उनसे पूछा गया था कि क्या अमेरिका यूक्रेन को मिसाइल रक्षा प्रणालियों के उत्पादन के लिए लाइसेंस देने के खिलाफ है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका और यूक्रेन के बीच बातचीत चल रही है।
रुबियो ने हालाँकि,यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोनों देशों के बीच इस दिशा में कोई समझौता होता है, तब भी इससे यूक्रेन की तत्काल जरूरतों का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली के उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करने, तकनीकी ढांचा तैयार करने और उत्पादन क्षमता विकसित करने में लंबा समय लगता है। ऐसे में यह व्यवस्था भविष्य में यूक्रेन के लिए उपयोगी साबित हो सकती है,लेकिन मौजूदा युद्ध परिस्थितियों में इससे तुरंत मिसाइल रक्षा प्रणालियों की कमी दूर नहीं होगी।
उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका यूक्रेन को केवल तत्काल हथियार सहायता देने के बजाय उसकी दीर्घकालिक रक्षा क्षमता मजबूत करने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। यदि दोनों देशों के बीच इस संबंध में कोई समझौता होता है,तो यूक्रेन भविष्य में अपनी जरूरत के अनुसार कुछ उन्नत रक्षा प्रणालियों और इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
रुबियो ने ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में भी अमेरिका और यूक्रेन के बीच संभावित सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच ड्रोन तकनीक से संबंधित सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत चल रही है। यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन के इस्तेमाल में काफी सक्रिय रहा है और लंबी दूरी के ड्रोन के जरिए रूस के भीतर स्थित सैन्य तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाता रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि यदि ऐसा कोई समझौता तैयार होता है,जो अमेरिका के हितों के लिए भी उपयोगी हो,तो अमेरिका उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार रहेगा। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी नए समझौते की घोषणा नहीं की गई है और बातचीत अभी जारी है।
इस बीच,रुबियो ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी के निदेशक जॉन रैटक्लिफ की हालिया रूस यात्रा को लेकर लगाई जा रही अटकलों को भी खारिज किया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि रैटक्लिफ की रूस यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच संभावित त्रिपक्षीय बैठक से जुड़ी हो सकती है। रुबियो ने इन दावों को गलत बताया और कहा कि यात्रा को इस तरह की संभावित बैठक से जोड़ना सही नहीं है।
रुबियो के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं,जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर गतिविधियाँ जारी हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर लंबी दूरी के हमलों के जरिए दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है,वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देश आर्थिक प्रतिबंधों के माध्यम से मॉस्को पर दबाव बनाए हुए हैं। दूसरी ओर,यूक्रेन को अपनी वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए लगातार अधिक इंटरसेप्टर मिसाइलों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों की जरूरत है।
ऐसे में अमेरिका के सामने दोहरी चुनौती है। उसे अपनी रक्षा जरूरतों और हथियार भंडार को ध्यान में रखते हुए यूक्रेन की तत्काल सैन्य जरूरतों को पूरा करना है,साथ ही भविष्य में यूक्रेन को अपनी रक्षा क्षमता विकसित करने में सक्षम बनाने के विकल्पों पर भी विचार करना है। रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि वाशिंगटन इस दिशा में बातचीत जारी रखे हुए है, लेकिन किसी भी बड़े उत्पादन समझौते का असर तत्काल नहीं बल्कि लंबे समय में दिखाई देगा।
