नई दिल्ली,3 सितंबर (युआईटीवी)- आईसीआईसीआई बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं। बैंक ने बुधवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस योजना के तहत जुटाई गई विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल विभिन्न वित्तीय गतिविधियों में किया गया है। बैंक के मुताबिक,एफसीएनआर (बी) जमा के बदले उसकी अंतर्राष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों की ओर से दिए गए ऋण की राशि करीब 9 अरब डॉलर रही।
बैंक ने बताया कि एफसीएनआर (बी) जमा से समर्थित ऋण के बदले अन्य ऋणदाताओं को जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट यानी एसबीएलसी की राशि करीब 3.63 अरब डॉलर रही। इस तरह आईसीआईसीआई बैंक ने आरबीआई की विशेष सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने और उसका उपयोग अपने अंतर्राष्ट्रीय परिचालन तथा ऋण गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया है।
आईसीआईसीआई बैंक की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है,जब आरबीआई की विशेष डॉलर जमा योजना को देश के वित्तीय बाजार से काफी मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार,इस योजना के माध्यम से 100 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा जुटाई गई है। आरबीआई ने रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच देश में डॉलर का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से 8 जून को इस विशेष सुविधा की घोषणा की थी।
केंद्रीय बैंक की ओर से उपलब्ध आँकडों के मुताबिक,21 अगस्त तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस योजना के तहत कुल 72.848 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया था। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा की हिस्सेदारी 65.397 अरब डॉलर थी। इसके अलावा इसी सुविधा के तहत बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी ईसीबी और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार यानी ओएफसीबी के माध्यम से 7.451 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह आया था।
आरबीआई की इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाकर रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना था। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में देश में अतिरिक्त डॉलर का प्रवाह विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटने से भारतीय वित्तीय प्रणाली को अतिरिक्त डॉलर उपलब्ध हुए हैं।
आईसीआईसीआई बैंक ने इसके अलावा जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल 3.55 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी डॉलर आधारित बॉन्ड भी जारी किए हैं। बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा में बॉन्ड जारी करना भी उसके अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बैंक को विदेशी मुद्रा में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूँजी जुटाने में सहायता मिल सकती है।
आरबीआई की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा को सरकार की ओर से भी महत्वपूर्ण पहल बताया गया है। अगस्त में सरकार ने कहा था कि इस योजना के कारण विदेशी मुद्रा के प्रवाह में तेज वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार,यह भारत की ओर से अब तक की गई सबसे बड़ी और सबसे तेज विदेशी मुद्रा जुटाने की कवायद बन गई है। इसने 2013 में शुरू की गई एफसीएनआर (बी) स्वैप योजना के स्तर को भी पार कर लिया है।
2013 की एफसीएनआर (बी) योजना के दौरान भी भारत ने विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए इसी तरह की विशेष व्यवस्था का सहारा लिया था। उस समय रुपये पर दबाव कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित की गई थी। मौजूदा योजना में उससे कहीं अधिक विदेशी मुद्रा जुटाए जाने को भारतीय वित्तीय प्रणाली में विदेशी निवेशकों और बैंकों की मजबूत भागीदारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आरबीआई ने शुरुआत में एफसीएनआर (बी) स्वैप सुविधा की अवधि 30 सितंबर 2026 तक निर्धारित की थी। हालाँकि,योजना को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया और पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाए जाने के बाद केंद्रीय बैंक ने एफसीएनआर (बी) विंडो को 31 अगस्त को ही बंद करने का फैसला किया। इसका मतलब है कि इस विशेष सुविधा के तहत नई एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने की अवधि निर्धारित समय से पहले समाप्त कर दी गई।
दूसरी ओर,ईसीबी और ओएफसीबी के लिए यह सुविधा अभी जारी है। इन दोनों माध्यमों के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी। इससे आने वाले महीनों में भी भारतीय वित्तीय व्यवस्था में विदेशी मुद्रा का अतिरिक्त प्रवाह आने की संभावना बनी हुई है। एफसीएनआर (बी) विंडो के बंद होने के बाद भी ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।
आईसीआईसीआई बैंक द्वारा 17.88 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) जमा जुटाना इस पूरी कवायद में बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। जमा के बदले अंतर्राष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों द्वारा करीब 9 अरब डॉलर का ऋण दिया जाना बताता है कि विदेशी मुद्रा संसाधनों का इस्तेमाल बैंक के अंतर्राष्ट्रीय कारोबार को समर्थन देने में भी हुआ है। वहीं,3.63 अरब डॉलर के स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए जाने से बैंक की विदेशी मुद्रा आधारित वित्तीय गतिविधियों का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है।
विदेशी मुद्रा का यह बढ़ा हुआ प्रवाह भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए भी सकारात्मक माना जा सकता है। पर्याप्त डॉलर उपलब्ध होने से देश की अंतर्राष्ट्रीय भुगतान क्षमता को मजबूती मिलती है और विदेशी मुद्रा बाजार में अचानक आने वाले दबाव से निपटने में सहायता मिलती है। इसके अलावा,यदि डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है तो रुपये की विनिमय दर पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर,आरबीआई की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा को मिली प्रतिक्रिया उम्मीद से काफी मजबूत रही है। आईसीआईसीआई बैंक ने अकेले एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए करीब 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं,जबकि पूरी योजना के तहत 100 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा आने की जानकारी सामने आई है। आरबीआई के आँकड़ों में 21 अगस्त तक 72.848 अरब डॉलर का प्रवाह दर्ज किया गया था और इसके बाद भी विदेशी मुद्रा जुटाने की प्रक्रिया तेज रही। एफसीएनआर (बी) विंडो अब 31 अगस्त को बंद हो चुकी है,जबकि ईसीबी और ओएफसीबी के लिए सुविधा दिसंबर तक जारी रहेगी। ऐसे में यह पहल रुपये को समर्थन देने,विदेशी मुद्रा उपलब्धता बढ़ाने और देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
