मोहसिन रेजाई (तस्वीर क्रेडिट@mojtaba_679)

ईरान की नई मिसाइल क्षमता का दावा,अमेरिका को चेतावनी; फारस की खाड़ी में ‘समुद्री निषेध क्षेत्र’ बनाने की तैयारी

नई द‍िल्‍ली,8 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य और रणनीतिक नीति में बड़े बदलाव का दावा करते हुए वॉशिंगटन को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों के प्रति ईरान की कार्रवाई की रणनीति में बुनियादी बदलाव किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नई मिसाइल क्षमता अमेरिका देख चुका है और हाल के हमलों के जरिए वॉशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया गया है। रेजाई के मुताबिक, यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव या ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखता है,तो इसका जवाब फारस की खाड़ी में समुद्री गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाकर दिया जाएगा।

मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि हाल के दिनों में ईरान की नई मिसाइलों ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव जारी रहा तो फारस की खाड़ी में एक ‘समुद्री निषेध क्षेत्र’ बनाया जाएगा और समुद्री नाकाबंदी का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है। रेजाई का बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा तथा वहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

रेजाई ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ ईरान के सैन्य रुख में अब पहले जैसी रणनीति नहीं रहेगी। उनके अनुसार,ईरान ने अपनी कार्रवाई के तरीके में बुनियादी स्तर पर बदलाव किया है। उन्होंने दावा किया कि हाल के हमलों के दौरान ईरान ने पहली बार स्वदेश में विकसित एक विशेष एंटी-डिस्ट्रॉयर मिसाइल का परीक्षण अमेरिकी विमानवाहक पोत के ऊपर किया। रेजाई ने इसे ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस कार्रवाई ने अमेरिकी पक्ष के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर दी और अमेरिकी नौसैनिक बल पीछे हट गए।

हालाँकि,रेजाई के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उनका बयान मुख्य रूप से ईरान की ओर से किए गए दावों और चेतावनियों पर आधारित है। फिर भी,उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि तेहरान अब अमेरिका के साथ जारी टकराव में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ समुद्री और आर्थिक दबाव को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की तैयारी कर रहा है।

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव ने एक दिन पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर महत्वपूर्ण चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर सकता है। रेजाई के मुताबिक,इस क्षेत्र से गुजरने का प्रयास करने वाले किसी भी जहाज को ईरान की प्रतिबंध सूची में शामिल किया जा सकता है। इस घोषणा से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ सकती है,क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।

रेजाई ने प्रतिबंधित क्षेत्र की संभावित सीमा को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उस स्थान से शुरू होगा जहाँ से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होती है और इसका विस्तार होर्मुज जलडमरूमध्य तक किया जाएगा। इसके अलावा यह क्षेत्र जलडमरूमध्य के दूसरे छोर की ओर फारस की खाड़ी के अंदर तक भी फैलाया जा सकता है। इस तरह ईरान का प्रस्तावित कदम केवल किसी सीमित समुद्री क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहेगा,बल्कि फारस की खाड़ी में समुद्री आवाजाही के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि जो जहाज ईरान के साथ समन्वय किए बिना इस प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करेंगे,उनके खिलाफ कई तरह की कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे जहाजों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं,जिनका असर उनके बीमा कवरेज पर पड़ सकता है। इसके अलावा भविष्य में इस जलमार्ग से गुजरने की उनकी अनुमति भी प्रभावित हो सकती है। यदि ऐसी नीति लागू होती है तो इसका सीधा असर समुद्री कंपनियों,जहाज संचालकों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने की आशंका है।

ईरान की इस रणनीति में आर्थिक और समुद्री दबाव को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है। रेजाई के अनुसार,अमेरिका यदि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता है तो तेहरान भी ऐसी कार्रवाई करेगा,जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक प्रभाव पड़े। समुद्री मार्गों पर प्रतिबंध इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। ईरान लंबे समय से यह संकेत देता रहा है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर सकता है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधनों का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक परिवहन होता है। ऐसे में अगर यहाँ जहाजों की आवाजाही बाधित होती है या समुद्री कंपनियों को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ता है,तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति,बीमा लागत और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।

मोहसिन रेजाई ने अपने बयान में ईरान की मिसाइल क्षमता को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि हालिया मिसाइल कार्रवाइयों ने अमेरिका को ईरान की नई सैन्य क्षमताओं का अहसास करा दिया है। उनका कहना है कि ईरान की स्वदेशी मिसाइल तकनीक अब ऐसी स्थिति में पहुँच गई है,जहाँ वह अमेरिकी नौसैनिक शक्ति को चुनौती देने की क्षमता रखती है। विशेष रूप से अमेरिकी विमानवाहक पोत को निशाना बनाने से जुड़े दावे को उन्होंने ईरान की सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत बताया।

रेजाई के मुताबिक,ईरान अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को पहले से अधिक व्यापक तरीके से अंजाम देने की तैयारी कर रहा है। इसमें मिसाइल क्षमता के साथ समुद्री क्षेत्र को नियंत्रित करने और जहाजों पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति शामिल हो सकती है। उनका कहना है कि ईरान की कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिका पर दबाव बढ़ाना है,ताकि वॉशिंगटन अपनी आर्थिक और सैन्य नीति पर पुनर्विचार करे।

उन्होंने इसे ईरान की युद्ध और कूटनीति से जुड़ी व्यापक रणनीति में बदलाव का हिस्सा बताया। रेजाई के अनुसार,तेहरान अब केवल सैन्य जवाब देने की नीति तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि आर्थिक और समुद्री मोर्चों पर भी दबाव बनाने की कोशिश करेगा। इसका उद्देश्य अमेरिका को यह संदेश देना है कि ईरान पर लगातार दबाव डालने की कीमत वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों को भी चुकानी पड़ सकती है।

ईरान की ओर से आई इन चेतावनियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रस्तावित समुद्री निषेध क्षेत्र लागू किया जाता है,तो अंतर्राष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही किस तरह प्रभावित होगी। खास तौर पर उन जहाजों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। जहाजों के बीमा और सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ने से समुद्री परिवहन की लागत में भी वृद्धि हो सकती है।

कुल मिलाकर,मोहसिन रेजाई के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिका के साथ मौजूदा टकराव में अपनी रणनीति को एक नए चरण में ले जाने की तैयारी कर रहा है। नई मिसाइल क्षमता के दावे,अमेरिकी युद्धपोतों के खिलाफ बदली सैन्य रणनीति और फारस की खाड़ी में समुद्री निषेध क्षेत्र बनाने की चेतावनी इस नीति के प्रमुख हिस्से हैं। अगर ईरान वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री प्रतिबंध लागू करता है,तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित रहने के बजाय क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार तक पहुँच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में तेहरान और वॉशिंगटन की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।