नई दिल्ली,8 सितंबर (युआईटीवी)- टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया अब बदलाव के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। एयरलाइन के आने वाले सीईओ और प्रबंध निदेशक टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने सोमवार को कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य एयर इंडिया को एक मजबूत और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाना है। उन्होंने अपने संबोधन में अमेरिकी राजनीतिक नारे ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की तर्ज पर कहा कि वह एयर इंडिया के लिए भी एक ऐसा ही संकल्प लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम एयर इंडिया को फिर से महान बनाएँगे। गेब्रेमारियम का यह बयान ऐसे समय आया है जब एयर इंडिया सुरक्षा, परिचालन क्षमता, ग्राहक अनुभव और वित्तीय अनुशासन के मोर्चे पर बड़े बदलावों से गुजर रही है।
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और पद छोड़ने जा रहे मौजूदा सीईओ एवं प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन की मौजूदगी में आयोजित टाउन हॉल बैठक में गेब्रेमारियम ने कर्मचारियों के सामने अपनी प्राथमिकताएँ रखीं। उन्होंने कहा कि वह अमेरिका से आ रहे हैं और इसी वजह से ‘एमएजीए’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करना चाहेंगे,लेकिन एयर इंडिया के संदर्भ में इसका अर्थ होगा कि एयरलाइन को दोबारा उसकी प्रतिष्ठा और मजबूती दिलाई जाए। उनका संदेश कर्मचारियों के लिए केवल उत्साह बढ़ाने वाला बयान नहीं था, बल्कि एयरलाइन के भविष्य को लेकर उनकी सोच का संकेत भी माना जा रहा है।
गेब्रेमारियम फिलहाल सरकार की ओर से सुरक्षा मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आवश्यक मंजूरियाँ प्राप्त होने के बाद वह औपचारिक रूप से एयर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक का पद सँभालेंगे। उनके सामने एक ऐसी एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी, जो पिछले कुछ वर्षों में स्वामित्व परिवर्तन, परिचालन विस्तार, बेड़े के आधुनिकीकरण और संगठनात्मक बदलावों के दौर से गुजर रही है। टाटा समूह के पास लौटने के बाद एयर इंडिया को एक वैश्विक स्तर की एयरलाइन के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है।
टाउन हॉल के दौरान गेब्रेमारियम ने एयर इंडिया की विरासत और ब्रांड की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया की विरासत शानदार है, उसका ब्रांड मजबूत है और उसमें अपार क्षमता मौजूद है। उनका मानना है कि यदि एयरलाइन सही समय पर सही फैसले लेती है और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करती है,तो उसके विकास की कोई सीमा नहीं होगी। उन्होंने कर्मचारियों को इस बदलाव की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया और संकेत दिया कि एयरलाइन की सफलता संगठन के हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन और सामूहिक जिम्मेदारी पर निर्भर करेगी।
वहीं,एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एयरलाइन के अगले चरण की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि सुरक्षा, यात्रियों का भरोसा, परिचालन उत्कृष्टता और लागत नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। उन्होंने एयर इंडिया को टाटा समूह में वापस लाने को अपने करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया। चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया केवल एक सामान्य कारोबारी संस्था नहीं है,बल्कि इसका संबंध करोड़ों-अरबों लोगों की भावनाओं और उम्मीदों से है। यही कारण है कि एयरलाइन की जिम्मेदारी भी सामान्य कंपनियों की तुलना में कहीं अधिक बड़ी है।
चंद्रशेखरन ने विशेष रूप से यात्रियों और आम जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने पर जोर दिया। उनके अनुसार,एयर इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य लोगों के मन में विश्वास पैदा करना होना चाहिए। यह भरोसा केवल विज्ञापन या दावों से नहीं,बल्कि यात्रियों को हर चरण पर सुरक्षित,भरोसेमंद और बेहतर सेवा देने से हासिल किया जा सकता है। एयरलाइन के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यात्रियों का अनुभव सुरक्षा,समय की पाबंदी,सेवा की गुणवत्ता और शिकायतों के समाधान जैसे कई पहलुओं से बनता है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि पिछले 18 महीने एयर इंडिया के लिए बेहद कठिन रहे हैं। इस दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव, विभिन्न क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र बंद होने की स्थिति, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एआई171 से जुड़ी दुखद दुर्घटना ने एयरलाइन के संचालन को प्रभावित किया। इन परिस्थितियों ने एयरलाइन के सामने सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी कीं। ऐसे समय में एयर इंडिया के नेतृत्व ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखने का संदेश दिया है।
चंद्रशेखरन ने साफ तौर पर कहा कि सुरक्षा केवल बैठकों में दिए जाने वाले बयानों या लिखित नीतियों का विषय नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि संगठन में हर व्यक्ति रोजमर्रा के काम में सुरक्षा मानकों को किस तरह लागू करता है। उन्होंने एयर इंडिया के पूरे संगठन में कड़े नियमों के पालन,विश्वस्तरीय प्रक्रियाओं और व्यक्तिगत जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पायलटों, इंजीनियरों या सुरक्षा विभाग तक सीमित नहीं हो सकती। संगठन के प्रत्येक कर्मचारी को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
एयर इंडिया के अगले चरण में ग्राहक सेवा और यात्री अनुभव को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। चंद्रशेखरन ने एयरलाइन में ग्राहक सेवा के स्तर पर अधिक एकरूपता लाने की जरूरत बताई। एयरलाइन के यात्रियों को टिकट बुक करने से लेकर हवाई अड्डे पर चेक-इन, बोर्डिंग, उड़ान के दौरान सेवा और गंतव्य तक पहुँचने के बाद सामान मिलने तक हर स्तर पर बेहतर अनुभव मिलना जरूरी है। नेतृत्व का मानना है कि सेवा में निरंतरता और गुणवत्ता बढ़ने से यात्रियों का भरोसा मजबूत होगा और एयर इंडिया की वैश्विक छवि को भी फायदा मिलेगा।
बदलते परिचालन माहौल को देखते हुए कर्मचारियों से अधिक चुस्त और अनुकूलनशील रहने की अपील भी की गई। विमानन उद्योग में मौसम, ईंधन की कीमतों,हवाई क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों, अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों का सीधा असर संचालन पर पड़ता है। ऐसे में एयरलाइन को तेजी से फैसले लेने और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलने में सक्षम होना होगा। टाउन हॉल में कर्मचारियों को इसी बदलाव के लिए तैयार रहने का संदेश दिया गया।
वित्तीय अनुशासन भी एयर इंडिया के नए चरण का एक प्रमुख आधार होगा। चंद्रशेखरन ने पूरी एयरलाइन में लागत के प्रति जागरूकता की मजबूत संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया। इसका अर्थ केवल खर्च कम करना नहीं,बल्कि उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना भी है। एयरलाइन के विस्तार, नए विमानों, परिचालन व्यवस्था और ग्राहक सेवा में बड़े निवेश के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। प्रबंधन चाहता है कि प्रत्येक स्तर पर कर्मचारी लागत और उत्पादकता के संबंध को समझें और कंपनी के संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें।
टेवोल्डे गेब्रेमारियम के नेतृत्व में एयर इंडिया के सामने अब कई बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं। एयरलाइन को एक ओर अपनी ऐतिहासिक पहचान और भारतीय यात्रियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना है,वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय विमानन बाजार में दुनिया की प्रमुख एयरलाइनों के साथ प्रतिस्पर्धा भी करनी है। इसके लिए आधुनिक बेड़ा, बेहतर परिचालन, उच्च सुरक्षा मानक, विश्वस्तरीय ग्राहक सेवा और मजबूत वित्तीय प्रबंधन जरूरी होगा।
गेब्रेमारियम के ‘एयर इंडिया को फिर महान बनाने’ वाले संदेश ने कर्मचारियों के सामने एक स्पष्ट लक्ष्य रखने की कोशिश की है। वहीं चंद्रशेखरन ने सुरक्षा और भरोसे को इस लक्ष्य की बुनियाद बताया है। आने वाले समय में एयर इंडिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नेतृत्व की ये प्राथमिकताएँ जमीन पर किस तरह लागू होती हैं। टाटा समूह के तहत एयर इंडिया जिस परिवर्तन के दौर से गुजर रही है,उसमें नए नेतृत्व से उम्मीद है कि वह एयरलाइन की क्षमता को बेहतर प्रदर्शन में बदलने में अहम भूमिका निभाएगा। अब चुनौती केवल एयर इंडिया को बड़ा बनाने की नहीं,बल्कि उसे सुरक्षित,भरोसेमंद,कुशल और यात्रियों की पहली पसंद बनने वाली एयरलाइन के रूप में स्थापित करने की है।
