मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@AVinthehousee)

तमिलनाडु में निवेश बढ़ाने की कवायद तेज, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय आज लंदन के लिए होंगे रवाना

चेन्नई,10 सितंबर (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार ने राज्य में नए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक कंपनियों के साथ अपने कारोबारी संबंध मजबूत करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय गुरुवार रात लंदन के लिए रवाना होंगे। टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा होगी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों से संपर्क बढ़ाना और तमिलनाडु को विनिर्माण, प्रौद्योगिकी तथा तेजी से उभरते उद्योगों के लिए प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में पेश करना है।

मुख्यमंत्री विजय गुरुवार रात करीब 10 बजे चेन्नई से रवाना होंगे। वह दुबई के रास्ते लंदन पहुँचेंगे और 16 सितंबर तक यूनाइटेड किंगडम में रहेंगे। इसके बाद 17 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे दुबई होते हुए चेन्नई लौटेंगे। मुख्यमंत्री के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी विदेश यात्रा पर जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान कई कंपनियों और संभावित निवेशकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित की जाएँगी।

लंदन यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री एक महत्वपूर्ण निवेशक सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के जरिए तमिलनाडु की औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय कारोबार जगत के सामने रखा जाएगा। सरकार की कोशिश है कि राज्य में उपलब्ध मजबूत बुनियादी ढाँचे,कुशल मानव संसाधन और विकसित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को निवेशकों तक प्रभावी तरीके से पहुँचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं और सरकार की ओर से उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी साझा की जाएगी।

तमिलनाडु सरकार की नजर खास तौर पर विनिर्माण और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर है। राज्य पहले से ही कई औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है और सरकार अब इस आधार को और मजबूत करना चाहती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी और अन्य उभरते क्षेत्रों में नए निवेश लाने की कोशिश की जा रही है। लंदन दौरे में मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल का प्रयास संभावित निवेशकों को राज्य की क्षमताओं से अवगत कराने के साथ-साथ निवेश प्रस्तावों को ठोस कारोबारी समझौतों में बदलना होगा।

मुख्यमंत्री की यात्रा की तैयारियाँ पहले से शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए लंदन पहुँच चुके हैं। लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन भी ब्रिटिश राजधानी पहुँच गए हैं। वहीं,उद्योग मंत्री कीर्तना के भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य विधानसभा के बजट सत्र के समापन के तुरंत बाद हो रहा है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री के यात्रा कार्यक्रम और चेन्नई हवाई अड्डे से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का काम किया जा रहा है।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2036 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू और विदेशी निवेश को आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सरकार का मानना है कि बड़े औद्योगिक निवेश से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और राज्य की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

सत्ता में आने के बाद से ही सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई स्तरों पर पहल की है। इसी सिलसिले में उद्योग मंत्री कीर्तना ने हाल ही में दक्षिण कोरिया का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने कई कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इनमें एक प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी भी शामिल थी। सरकार के अनुसार,इस दौरे के दौरान निवेश से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दक्षिण कोरिया के साथ संपर्क बढ़ाने की पहल को तमिलनाडु के औद्योगिक क्षेत्र में विदेशी पूँजी और नई परियोजनाएँ लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

इसके बाद 13 अगस्त को चेन्नई में वैश्विक निवेशकों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न कंपनियों और निवेशकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सरकार के मुताबिक,कार्यक्रम के दौरान कई कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों के जरिए राज्य सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि तमिलनाडु बड़े निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने को तैयार है।

सरकार ने दावा किया है कि सत्ता में आने के शुरुआती 110 दिनों के भीतर ही 104 कंपनियों के साथ निवेश संबंधी समझौते किए गए हैं। इन समझौतों के तहत कुल 1,02,514 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और करीब 1,21,788 संभावित रोजगार के अवसरों का अनुमान लगाया गया है। सरकार के लिए यह आँकड़ा महत्वपूर्ण है,क्योंकि निवेश के साथ रोजगार सृजन को भी उसकी आर्थिक नीति का प्रमुख आधार माना जा रहा है। हालाँकि,इन प्रस्तावित निवेशों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना आगे की बड़ी चुनौती होगी।

तमिलनाडु में निवेश आकर्षित करने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है,जब देश के कई राज्य बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य घरेलू और विदेशी कंपनियों को अपने यहाँ निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में तमिलनाडु सरकार अंतरराष्ट्रीय कारोबार जगत के साथ सीधे संपर्क को मजबूत करना चाहती है। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं,बल्कि बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाना भी है।

मुख्यमंत्री विजय का लंदन दौरा इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। निवेशकों के साथ होने वाली बैठकों में सरकार राज्य की औद्योगिक क्षमता,बुनियादी ढाँचे और कुशल कार्यबल को प्रमुखता से सामने रख सकती है। इसके साथ ही निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और कारोबारी माहौल को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ तमिलनाडु को दीर्घकालिक निवेश के लिए भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में देखें।

मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों की शुरुआती रुचि को वास्तविक प्रतिबद्धताओं में बदलने की होगी। विदेशों में आयोजित निवेशक बैठकों और सम्मेलनों से मिलने वाले प्रस्ताव तभी राज्य की अर्थव्यवस्था को वास्तविक लाभ पहुँचा पाएँगे,जब वे जमीन पर औद्योगिक परियोजनाओं में बदलें। ऐसे में लंदन यात्रा के दौरान होने वाली चर्चाओं और संभावित समझौतों पर तमिलनाडु सरकार की विशेष नजर रहेगी।

कुल मिलाकर,मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा को तमिलनाडु की निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य सरकार विदेशी निवेश,औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन पर जोर दे रही है। लंदन में होने वाली बैठकों के जरिए सरकार की कोशिश वैश्विक कंपनियों को तमिलनाडु की ओर आकर्षित करने और राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी केंद्रों में और मजबूत करने की होगी।