मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से किया पूरी तरह मुक्त (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से किया पूरी तरह मुक्त,अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद लिया बड़ा फैसला

लखनऊ,10 सितंबर (युआईटीवी)- बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया है। पूर्व राज्यसभा सांसद और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले के बाद मायावती ने गुरुवार को यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई पोस्ट के जरिए आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त किए जाने की जानकारी दी। मायावती ने अपने फैसले के पीछे आकाश आनंद की पार्टी और बहुजन आंदोलन के प्रति प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को पार्टी और आंदोलन के वास्तविक हित तथा उससे जुड़े अपने राजनीतिक करियर की चिंता कम है,जबकि रिश्ते-नातों और पारिवारिक लगाव को लेकर उनका झुकाव अधिक दिखाई देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आकाश आनंद की प्राथमिकताएँ इस तरह बँटी हुई हैं,तो वह पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में पूरी तरह समर्पित होकर काम कैसे कर सकते हैं।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि जिस तरह 3 सितंबर को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के महत्वपूर्ण पद की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था,उसी तरह अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया जाए। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो अब वह स्वतंत्र हैं और उन्हें पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।

मायावती के इस फैसले को बसपा के भीतर चल रहे पारिवारिक और राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आकाश आनंद को लंबे समय तक मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता रहा है। हालाँकि,पिछले कुछ समय में पार्टी नेतृत्व और आकाश आनंद के बीच मतभेदों की स्थिति सामने आती रही है। अब मायावती के ताजा फैसले के बाद आकाश आनंद का पार्टी से औपचारिक रूप से संबंध समाप्त हो गया है।

मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद के अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति लगाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद ने अपने राजनीतिक करियर से अधिक अशोक सिद्धार्थ के प्रति जुड़ाव को प्राथमिकता दी। मायावती के अनुसार,उन्होंने अपने सोशल मीडिया खाते पर अशोक सिद्धार्थ से संबंधित एक पोस्ट साझा की थी, लेकिन आकाश आनंद ने उसे दोबारा साझा करना भी उचित नहीं समझा। मायावती ने कहा कि वह पोस्ट आकाश आनंद के ही सकारात्मक हित और भलाई के लिए थी।

बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि आकाश आनंद पहले उनके सोशल मीडिया पोस्ट को दोबारा साझा करके अपनी वफादारी साबित करने का प्रयास करते रहे हैं,लेकिन उनके मुताबिक,हाल की परिस्थितियों से यह संकेत मिलता है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद दोनों ही पार्टी तथा आंदोलन की सफलता की तुलना में निजी और पारिवारिक हितों को अधिक महत्व देते हैं।

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को हालाँकि सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला काफी पहले ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज, बहुजन आंदोलन और खुद आकाश आनंद को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। मायावती ने कहा कि उन्हें भी विधानसभा चुनाव और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पाँचवीं बार सरकार बनाने की तैयारियों के बीच पार्टी और आंदोलन के व्यापक हित में कई बार कड़े फैसले लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

बसपा सुप्रीमो ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को ‘देर आए, दुरुस्त आए’ वाली स्थिति बताया। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ बसपा और उसके अंबेडकरवादी बहुजन आंदोलन के व्यापक हित की वास्तविक चिंता होती,तो उन्हें काफी पहले ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देनी चाहिए थी।

मायावती ने अपने बयान में दावा किया कि अगर ऐसा पहले होता तो आकाश आनंद की पार्टी और आंदोलन के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी,लेकिन उनके अनुसार,ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह प्रतीत होता है कि अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और निजी हितों से जुड़ा झुकाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

मायावती के मुताबिक,आकाश आनंद के पार्टी से अलग होने के फैसले का एक कारण उनके राजनीतिक दायित्वों और पारिवारिक रिश्तों के बीच दिखाई देने वाला टकराव भी है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के व्यापक हित में संगठन से जुड़े नेताओं को निजी संबंधों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उनके अनुसार,बसपा और बहुजन आंदोलन की राजनीतिक दिशा को बनाए रखने के लिए संगठन के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता जरूरी है।

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बसपा के सभी लोगों को विरोधियों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे तमाम हथकंडों का मजबूती से सामना करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से खास तौर पर उत्तर प्रदेश में पार्टी को फिर से मजबूत करने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ जुटने का आह्वान किया।

बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक रणनीति को भी इस संदेश के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित ऐसी सरकार के लिए संघर्ष करना है,जिसमें मजबूत कानून-व्यवस्था और बेहतर विकास को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस लक्ष्य को सर्वोपरि मानते हुए पूरे तन, मन और धन से काम करने की अपील की।

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है,जब बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के सामने आने वाले चुनावों में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में नेतृत्व स्तर पर लिए जा रहे फैसलों का असर संगठन की दिशा और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है।

आकाश आनंद को लेकर मायावती का मौजूदा फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्हें कभी बसपा की अगली पीढ़ी के प्रमुख चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया गया था। पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ मिलने के बाद उन्होंने कई चुनावी अभियानों में भूमिका निभाई थी। लेकिन अब पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के बाद उनका राजनीतिक भविष्य एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

वहीं, अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास और उसके बाद आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने के घटनाक्रम ने बसपा में पारिवारिक प्रभाव और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बहस को भी तेज कर दिया है। मायावती ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उनके लिए पार्टी और बहुजन आंदोलन का व्यापक हित निजी और पारिवारिक संबंधों से ऊपर है।

मायावती ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि उन्हें आंतरिक मतभेदों और विरोधियों की रणनीतियों से प्रभावित हुए बिना पार्टी के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका जोर संगठन को मजबूत करने,जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी की तैयारी पर है।

कुल मिलाकर,आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह मुक्त करने का मायावती का फैसला पार्टी की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के तुरंत बाद सामने आए इस फैसले में मायावती ने पारिवारिक रिश्तों,राजनीतिक प्रतिबद्धता और संगठन के हितों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब आकाश आनंद पार्टी से बाहर रहकर अपनी आगे की राजनीतिक राह कैसे तय करते हैं और बसपा इस बदलाव के बाद उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को किस तरह आगे बढ़ाती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।