न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@chrisluxonmp)

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, 93-29 मतों से पास हुआ समझौता

नई दिल्ली,16 सितंबर (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुए मतदान में समझौते के पक्ष में 93 वोट पड़े, जबकि 29 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि संसद का यह समर्थन भारत के साथ हुए व्यापार समझौते और उससे मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभों को लेकर मजबूत सहमति को दर्शाता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने की दिशा में इस मंजूरी को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

टॉड मैक्ले के मुताबिक,मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में पहले की तुलना में अधिक पहुँच मिलेगी। भारत दुनिया की बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहाँ बढ़ते मध्यम वर्ग के कारण विभिन्न क्षेत्रों में माँग लगातार बढ़ रही है। न्यूजीलैंड सरकार का मानना है कि एफटीए के जरिए उसके निर्यातकों को खाद्य उत्पादों, तकनीक, शिक्षा, पर्यटन, पेशेवर सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में भारतीय बाजार के अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने बताया कि समझौता लागू होने के बाद भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा, जब समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा, तब न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त हो जाएगा या उसमें बड़ी कटौती हो जाएगी। न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शुल्क में कमी से भारतीय बाजार में उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हो सकती है।

न्यूजीलैंड की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह समझौता विशेष महत्व रखता है। देश के प्रमुख निर्यात उत्पादों में कीवीफ्रूट भी शामिल है। टॉड मैक्ले ने कहा कि अकेले कीवीफ्रूट उद्योग को इस समझौते से पाँच वर्षों में लगभग 12.5 करोड़ न्यूजीलैंड डॉलर की शुल्क बचत होने की उम्मीद है। इससे न्यूजीलैंड के फल उत्पादकों और निर्यातकों को भारतीय बाजार में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

एफटीए के तहत केवल शुल्क में कमी ही नहीं,बल्कि सीमा पर माल की निकासी यानी क्लीयरेंस प्रक्रिया को भी तेज करने पर जोर दिया गया है। न्यूजीलैंड सरकार के मुताबिक, व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने से दोनों देशों के बीच वस्तुओं की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है। इससे निर्यातकों को समय और लागत दोनों में बचत होने की संभावना है। भारत में उपभोक्ताओं की बढ़ती माँग को देखते हुए न्यूजीलैंड के कारोबारी इस समझौते को नए अवसरों के रूप में देख रहे हैं।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर औपचारिक बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाई। अब न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने के बाद समझौते के लागू होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालाँकि,एफटीए तभी प्रभावी होगा जब दोनों देश अपनी-अपनी घरेलू मंजूरी की प्रक्रियाएँ पूरी कर लेंगे।

न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता इस साल के अंत तक लागू हो सकता है। टॉड मैक्ले ने कहा कि एफटीए से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत के साथ अपने व्यावसायिक संबंधों को विस्तार देने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के नेतृत्व की ओर से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा गया है और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री के अनुसार,यह समझौता उस लक्ष्य को हासिल करने में मददगार हो सकता है।

भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार न्यूजीलैंड के लिए इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। भारत में आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता माँग के बढ़ने के साथ खाद्य पदार्थों, शिक्षा, पर्यटन, तकनीक और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं। न्यूजीलैंड की कंपनियाँ इन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं। वहीं, भारतीय कारोबारियों और उपभोक्ताओं के लिए भी समझौते से कुछ न्यूजीलैंड उत्पादों और सेवाओं तक पहुँच आसान होने की संभावना है।

अगस्त में जारी एक रिपोर्ट में भी भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और बड़े बाजार को न्यूजीलैंड के लिए महत्वपूर्ण बताया गया था। ऑस्ट्रेलिया के वेस्टपैक इंस्टीट्यूशनल बैंक की रिपोर्ट के अनुसार,भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता अगले दशक में न्यूजीलैंड की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में करीब 0.1 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट में भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए उसके करीब 1.4 अरब लोगों के बाजार तक पहुँच को न्यूजीलैंड के लिए बड़ा अवसर बताया गया।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, पर्यटन, सेवाओं और तकनीक जैसे क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। एफटीए के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ कारोबार के नए क्षेत्रों को विकसित करने की कोशिश की जा सकती है। न्यूजीलैंड के लिए भारत का बड़ा बाजार जहाँ निर्यात विस्तार का अवसर प्रदान करता है,वहीं भारत के लिए न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का हिस्सा हो सकता है।

संसद में 93-29 के बहुमत से मिली मंजूरी के बाद अब दोनों देशों की निगाहें समझौते को लागू करने की बाकी प्रक्रियाओं पर हैं। यदि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होती है,तो इस साल के अंत तक भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता प्रभावी हो सकता है। इसके बाद शुल्क में कमी, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में सुगमता और बाजार तक बेहतर पहुँच जैसे प्रावधान दोनों देशों के कारोबार को प्रभावित करेंगे। साथ ही, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य की दिशा में भी इस समझौते को महत्वपूर्ण आधार के तौर पर देखा जा रहा है।