चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@BridgingNews_)

व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग का संबोधन,बोले- चीन और अमेरिका मिलकर बना सकते हैं बेहतर दुनिया

बीजिंग,25 सितंबर (युआईटीवी)- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 24 सितंबर को स्थानीय समयानुसार व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने अपने-अपने संबोधन दिए। शी जिनपिंग ने अपने भाषण में चीन और अमेरिका के संबंधों को लेकर संवाद, सहयोग और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया, समय और इतिहास में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे दौर में चीन तथा अमेरिका जैसे बड़े देशों के कंधों पर मानव विकास और प्रगति को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।

शी जिनपिंग ने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं और उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों की मित्रता को आगे बढ़ाना, सहयोग का विस्तार करना तथा दोनों देशों के लोगों के कल्याण को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मई में डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने चीन-अमेरिका के बीच रचनात्मक रणनीतिक स्थिर संबंध बनाने पर सहमति जताई थी। शी ने कहा कि दोनों देशों को इस समझ को व्यवहार में बदलने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए और संबंधों में सहयोग को प्रमुखता देते हुए प्रतिस्पर्धा को उचित सीमाओं में रखना चाहिए।

अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के बीच संबंधों के लिए तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संवाद बढ़ाना चाहिए, ईमानदारी के साथ सहयोग करना चाहिए और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखना चाहिए। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच मतभेद और प्रतिस्पर्धा मौजूद हो सकती है,लेकिन प्रतिस्पर्धा स्वस्थ और सीमित होनी चाहिए। इसे ऐसी दौड़ के रूप में देखा जाना चाहिए जिसमें दोनों देश एक-दूसरे से आगे बढ़ने का प्रयास करें,न कि ऐसी लड़ाई के रूप में जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार ही लक्ष्य हो।

शी ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच सहयोग दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता, लेकिन दोनों देशों के सहयोग के बिना दुनिया की कई समस्याओं का समाधान मुश्किल हो सकता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। शी के अनुसार, चीन का बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खुला है और दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने से लोगों के आवागमन और व्यापारिक संपर्क को और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।

शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच संभावित टकराव से बचने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका को संघर्ष और टकराव की स्थिति से बचना चाहिए तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए। इसके लिए संकट के समय संचार और रोकथाम की व्यवस्थाओं को बेहतर करने की जरूरत है। उन्होंने ‘थ्यूसीडाइड्स जाल’ का जिक्र करते हुए कहा कि चीन और अमेरिका इस स्थिति से पार पा सकते हैं और दोनों बड़े देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता निकाला जा सकता है।

चीनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले पाँच वर्षों में चीन एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन आने और वहां अध्ययन तथा आदान-प्रदान कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करेगा। शी ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों की उम्मीद दोनों देशों की जनता में है और इसका भविष्य युवाओं से जुड़ा है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के साथ मिलकर किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के लोगों ने उस इतिहास को नहीं भुलाया है।

अपने भाषण में शी जिनपिंग ने पांडा कूटनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने घोषणा की कि पांडा ‘फिंगफिंग’ और ‘फुशुआंग’ जल्द ही अमेरिका के अटलांटा चिड़ियाघर में पहुँचेंगे और वहाँ अमेरिकी जनता से मिलेंगे। उन्होंने पांडा को चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती का दूत बताया। दोनों पांडा को अटलांटा भेजने की घोषणा को लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के प्रयास के तौर पर पेश किया गया।

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन के अंत में चीन और अमेरिका के राष्ट्रीय लक्ष्यों को एक-दूसरे के विरोधी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने का लक्ष्य साथ-साथ आगे बढ़ सकता है। उन्होंने दोनों देशों से अपने लोगों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सहयोग और मित्रता को आगे बढ़ाने तथा बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

व्हाइट हाउस में आयोजित यह स्वागत समारोह शी जिनपिंग की अमेरिका की राजकीय यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। समारोह के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रध्वजों और सैन्य बैंड के बीच औपचारिक स्वागत हुआ। इसके बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता भी की, जिसमें चीन-अमेरिका संबंधों को रणनीतिक स्थिरता देने, सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को नियंत्रित रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।