संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अगर ईरान पर हमला नहीं किया जाता तो इजरायल के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने इस कार्रवाई को केवल इजरायल की सुरक्षा से जुड़ा कदम नहीं,बल्कि व्यापक रूप से सभ्यता की रक्षा के लिए जरूरी बताया। उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि सभा से बाहर चले गए। नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान, हमास और अन्य क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को उचित ठहराने की कोशिश की।
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका इजरायल का महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संघर्ष में ट्रंप से बड़ा उनका कोई साझेदार नहीं रहा। उनका तर्क था कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर पैदा हुए खतरे को नजरअंदाज करना इजरायल के लिए गंभीर परिणाम वाला हो सकता था। उन्होंने अपने भाषण में इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से रखा और कहा कि उनके देश ने अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए कार्रवाई की।
ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के संदर्भ में नेतन्याहू ने कहा कि अगर इजरायल ने कार्रवाई नहीं की होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। हालाँकि,ईरान और उसके अधिकारी इस कार्रवाई को आक्रामकता बताते रहे हैं और तेहरान ने अमेरिका तथा इजरायल पर हमलों के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान की ओर से भी इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की गई है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है।
नेतन्याहू का भाषण ऐसे समय हुआ,जब पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा व्यापक बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने महासभा के शुरुआती संबोधन में क्षेत्रीय संघर्षों को तत्काल कम करने,मानवीय सहायता पहुँचाने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री मार्गों पर आवाजाही के अधिकार बहाल करने की अपील की थी। उन्होंने गाजा में बड़े पैमाने पर हुई मौत और तबाही पर भी गंभीर चिंता जताई थी।
नेतन्याहू ने अपने भाषण में गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल पर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया। उन्होंने इसे इजरायल के खिलाफ फैलाया गया झूठ बताया। उनका कहना था कि अगर इजरायल का उद्देश्य वास्तव में फिलिस्तीनी आबादी का विनाश करना होता तो वह गाजा में पोलियो टीकाकरण और खाद्य सहायता पहुँचाने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने इजरायल की ओर से मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए अपने देश की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया।
हालाँकि,संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों और कई देशों ने गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि गाजा में हत्या और तबाही का स्तर उनके कार्यकाल में देखी गई सबसे गंभीर स्थितियों में से एक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की ओर से जारी अंतरिम उपायों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के पालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नेतन्याहू से पहले फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने महासभा को संबोधित करते हुए गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इजरायल पर फिलिस्तीनियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान चलाने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने अपने भाषण में इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगाना वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश करना है। इस मुद्दे पर इजरायल और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से जारी हैं।
नेतन्याहू ने अक्टूबर 2023 में हमास के इजरायल पर हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस हमले के बाद इजरायल टूटा नहीं बल्कि उसने जवाब दिया। उन्होंने हमास के अलावा हिज्बुल्लाह, हूती, ईरान और क्षेत्र के अन्य सशस्त्र समूहों का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल को कई दिशाओं से चुनौती का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इसे इजरायल के खिलाफ अलग-अलग मोर्चों पर चल रही लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया।
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि हमास,हिज्बुल्लाह, हूती, ईरान, इराक और सीरिया में सक्रिय सशस्त्र गुट तथा वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी लड़ाकों को इजरायल के सामने मौजूद विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इन समूहों का लक्ष्य इजरायल को कमजोर करना है,लेकिन उनका देश इन चुनौतियों के बावजूद अपनी सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम रहा है। नेतन्याहू ने इजरायली सेना के सैनिकों की भूमिका की भी सराहना की।
उनके भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में कई देशों के प्रतिनिधियों के बाहर जाने की घटना भी देखने को मिली। यह कदम इजरायल की गाजा नीति और क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई के विरोध के तौर पर देखा गया। इसके जवाब में नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों की आलोचना की। दूसरी ओर,सभा में मौजूद उनके समर्थकों ने हिब्रू भाषा में इजरायल के अस्तित्व और दृढ़ता से जुड़ा नारा लगाया।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान की भी आलोचना की। उन्होंने एर्दोगान पर हमास के नेताओं को समर्थन देने का आरोप लगाया और तुर्किये की इजरायल संबंधी नीति पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा की मानवीय स्थिति और फिलिस्तीनी राज्य के मुद्दे पर इजरायल की आलोचना की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता और दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इजरायल के प्रधानमंत्री ने कुछ पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई देशों की सरकारें इजरायल के खिलाफ बढ़ते दबाव के सामने झुक रही हैं। हाल के महीनों में कुछ देशों ने वेस्ट बैंक से आने वाले इजरायली उत्पादों पर सीमित प्रतिबंधों या अन्य उपायों की घोषणा की है। नेतन्याहू ने इन कदमों को इजरायल पर बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव के हिस्से के रूप में देखा और कहा कि कई देश इजरायल के समर्थन में खुलकर खड़े होने से बच रहे हैं।
वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर होने वाली हिंसा को लेकर भी नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजरायल का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के लिए कुछ सीमित संख्या में उपद्रवी जिम्मेदार हैं और इसे इजरायल की व्यापक नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने वेस्ट बैंक में हिंसा, विस्थापन और बस्तियों के विस्तार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि इन गतिविधियों से दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
ईरान के मुद्दे पर नेतन्याहू का रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से भी जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि समझौता नहीं होने की स्थिति में अमेरिका और कड़े कदम उठा सकता है। साथ ही उन्होंने भविष्य में कूटनीतिक समझौते की संभावना का भी संकेत दिया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की ओर से बातचीत का रास्ता खुला रखने के संकेत भी दिए गए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि उनका देश बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन ताकत के दबाव में किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार पर भी जोर दिया है, जबकि अमेरिका की प्रमुख चिंता यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू का संबोधन ऐसे समय हुआ है जब गाजा युद्ध, ईरान के साथ संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। एक तरफ इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा और आत्मरक्षा से जोड़कर देखता है, वहीं फिलिस्तीनी नेतृत्व और कई अंतरराष्ट्रीय पक्ष गाजा में मानवीय स्थिति और नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी संघर्ष समाप्त करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत दोहराई है।
