राजपाल यादव के 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पर सुप्रीम कोर्ट में उठा सवाल (तस्वीर क्रेडिट@NewsTimeNation)

राजपाल यादव के 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पर सुप्रीम कोर्ट में उठा सवाल,रकम जमा करने में देरी पर अदालत नाराज

नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गुरुवार को एक असामान्य स्थिति पैदा हो गई। अभिनेता की ओर से 1 करोड़ 15 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाने के बावजूद उसे अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने की प्रक्रिया को लेकर परेशानी सामने आई। राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि रकम जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के किस विभाग में जाना होगा। इस पर न्यायाधीशों ने नाराजगी जताई और जल्द से जल्द रकम जमा करने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान जब अभिनेता के वकील ने डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए सही विभाग की जानकारी नहीं होने की बात कही,तो न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वकील को यह जानकारी नहीं है कि अदालत में रकम किस विभाग में जमा करानी है, तो यह एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के लिए चिंता का विषय है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने वकील को तत्काल जाकर रकम जमा कराने के लिए कहा।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी. मोहना ने भी राजपाल यादव के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने याद दिलाया कि अभिनेता को पिछली शाम सात बजे तक का समय दिया गया था,लेकिन इसके बाद भी रकम जमा करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने कहा कि इस तरह की स्थिति से न्यायालय के सामने संबंधित पक्ष की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। पीठ की सख्त टिप्पणियों से स्पष्ट हुआ कि अदालत पहले दिए गए निर्देशों का समय पर पालन किए जाने को गंभीरता से ले रही है।

दरअसल,सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में राहत की संभावना के तहत कुल दो करोड़ रुपये जमा करने का अवसर दिया था। सात अक्टूबर को हुई सुनवाई में अभिनेता की ओर से अदालत को बताया गया था कि 1 करोड़ 15 लाख रुपये की व्यवस्था कर ली गई है। शेष 85 लाख रुपये उनकी पुश्तैनी जमीन खरीदने वाले व्यक्ति की ओर से दिए जाने थे। जमीन का संभावित खरीदार भी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद था। रकम की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बाकी राशि जमा कराने के लिए समय दिया था।

हालाँकि,गुरुवार की सुनवाई में डिमांड ड्राफ्ट जमा करने की प्रक्रिया को लेकर उठी समस्या ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया। अदालत की चिंता केवल रकम तैयार होने तक सीमित नहीं थी,बल्कि यह भी था कि पहले से दिए गए निर्देशों का पालन तय समय में किया जाए। अब अभिनेता की ओर से तैयार की गई राशि जमा होने और शेष रकम की व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

राजपाल यादव से जुड़ा यह विवाद उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज और उसके भुगतान से संबंधित है। वर्ष 2010 में फिल्म बनाने के लिए राजपाल यादव और उनकी पत्नी से जुड़ी कंपनी को मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब पांच करोड़ रुपये मिले थे। फिल्म के निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप था कि भुगतान के लिए दिए गए चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर बाउंस हो गए। इसके बाद अभिनेता के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।

चेक बाउंस से जुड़े इन मामलों में कानूनी कार्यवाही लंबे समय से चल रही है। विवाद की जड़ फिल्म निर्माण के लिए प्राप्त रकम और उसे वापस करने की जिम्मेदारी से जुड़ी है। शिकायतकर्ता की ओर से भुगतान में चूक का आरोप लगाया गया,जबकि अभिनेता को अब अदालत में रकम जमा करने से संबंधित निर्देशों का पालन करना है। सुप्रीम कोर्ट में हालिया सुनवाई इसी भुगतान व्यवस्था और अभिनेता की याचिका के संदर्भ में हुई।

इस मामले में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश महत्वपूर्ण है,क्योंकि अभिनेता की ओर से अदालत को बताया गया था कि बड़ी राशि का इंतजाम कर लिया गया है और बाकी रकम जमीन की बिक्री से मिलने की उम्मीद है,लेकिन अदालत में रकम जमा कराने की प्रक्रिया में आई अड़चन ने न्यायाधीशों को सख्त टिप्पणी करने के लिए प्रेरित किया। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि समयसीमा और निर्देशों का पालन जरूरी है तथा केवल रकम जुटाने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा।

राजपाल यादव हिंदी फिल्म जगत में हास्य भूमिकाओं के लिए लोकप्रिय रहे हैं,लेकिन इस कानूनी विवाद ने उनके सामने लंबे समय से आर्थिक और न्यायिक चुनौतियाँ खड़ी कर रखी हैं। अब इस मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित रकम किस तरह और कब तक जमा कराई जाती है तथा सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका पर क्या रुख अपनाता है। गुरुवार की सुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि अदालत इस मामले में भुगतान संबंधी निर्देशों को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।