अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

अमेरिकी चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, वोटर धोखाधड़ी की जानकारी देने वाले को मिलेगा 10 लाख डॉलर का इनाम

वाशिंगटन,27 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मतदाता धोखाधड़ी के मामलों को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। ट्रंप ने कहा है कि जो व्यक्ति मतदाता धोखाधड़ी से जुड़ी ऐसी जानकारी देगा, जिसके आधार पर किसी आरोपी की गिरफ्तारी होती है और उसे सजा मिलती है, उसे 10 लाख डॉलर यानी करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद अमेरिकी चुनाव व्यवस्था, मतदाता पहचान और गैर-अमेरिकी नागरिकों के मतदान को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

ट्रंप ने सोमवार को एयरफोर्स वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस इनाम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह एक मिलियन डॉलर का बोनस या पुरस्कार देने जा रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देता है और उस सूचना के आधार पर किसी की गिरफ्तारी तथा सजा होती है,तो संबंधित व्यक्ति को इनाम दिया जाएगा। हालाँकि, राष्ट्रपति ने इस दौरान यह स्पष्ट नहीं किया कि पुरस्कार पाने के लिए किस प्रकार के सबूत जरूरी होंगे और जानकारी की पुष्टि किस प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से देश की चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावों में धोखाधड़ी की आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ताजा घोषणा को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। मध्यावधि चुनावों से कुछ दिन पहले मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देने वालों को आर्थिक पुरस्कार देने का ऐलान करके ट्रंप ने इस मुद्दे को अपने चुनाव प्रचार के केंद्र में ला दिया है।

हालाँकि,इस योजना को लेकर कई अहम सवाल अभी अनुत्तरित हैं। व्हाइट हाउस की ओर से अब तक यह नहीं बताया गया है कि इनाम की राशि किस सरकारी विभाग या एजेंसी के माध्यम से दी जाएगी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुरस्कार के लिए धन कहाँ से आएगा, सूचना की जाँच कैसे होगी और किसी मामले में गिरफ्तारी तथा सजा के बीच संबंध को किस तरह निर्धारित किया जाएगा। जब तक इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती,तब तक इस प्रस्ताव के व्यावहारिक स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप की घोषणा ऐसे समय में हुई है,जब चुनाव से पहले मतदाता पात्रता और चुनावी सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रपति के समर्थक इस तरह की पहल को कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने लाने का तरीका मान सकते हैं, जबकि आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि इससे बिना पर्याप्त प्रमाण के लोगों पर संदेह करने की प्रवृत्ति तो नहीं बढ़ेगी।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से गैर-अमेरिकी नागरिकों के मतदान को लेकर भी सवाल किया गया। एक पत्रकार ने उन्हें याद दिलाया कि वह पहले कह चुके हैं कि यदि कोई गैर-अमेरिकी नागरिक मतदान करता है,तो उसे देश से निष्कासित किया जा सकता है। पत्रकार ने पूछा कि क्या इस तरह का संदेश चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करेगा और क्या इसे राष्ट्रपति की सभी चुनावी रैलियों में दोहराया जाना चाहिए।

इस पर ट्रंप ने सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि ऐसा किया जा रहा है और इस प्रक्रिया की शुरुआत भी हो चुकी है। हालाँकि,उनकी इस टिप्पणी के साथ यह स्पष्ट नहीं हुआ कि किस विशेष प्रक्रिया का जिक्र किया जा रहा था और उसे लागू करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।

अमेरिका में संघीय चुनावों में गैर-नागरिकों का मतदान करना पहले से ही कानून के तहत अपराध है। ऐसे मामलों में परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार जुर्माना, कारावास और आव्रजन संबंधी कार्रवाई जैसी सजा हो सकती है,लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि उसने कानून का उल्लंघन किया है। केवल नागरिकता या आव्रजन स्थिति को लेकर संदेह होने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।

ट्रंप की इस घोषणा पर अमेरिका में रहने वाले प्रवासी समुदायों की भी नजर रहेगी। वहाँ बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं,जिनमें अमेरिकी नागरिक,स्थायी निवासी और अस्थायी वीजा पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। चुनाव संबंधी नियम इन सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू नहीं होते।

ग्रीन कार्ड रखने वाले स्थायी निवासी और अस्थायी कार्य वीजा पर अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिक सामान्यतः संघीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते। संघीय चुनावों में मतदान का अधिकार अमेरिकी नागरिकों को प्राप्त होता है,बशर्ते वे संबंधित पात्रता और पंजीकरण संबंधी नियमों को पूरा करते हों। वहीं,प्राकृतिक रूप से अमेरिकी नागरिकता हासिल कर चुके भारतीय मूल के लोग अन्य पात्र अमेरिकी नागरिकों की तरह मतदान कर सकते हैं।

प्रवासी समुदायों से जुड़े कुछ संगठनों ने पहले यह चिंता जताई है कि मतदाता सूचियों की सख्त जाँच के दौरान कहीं वैध अमेरिकी नागरिकों को गलती से संदिग्ध न मान लिया जाए। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह चिंता अहम है,जिनके नाम,पते या व्यक्तिगत रिकॉर्ड में किसी तरह की असंगति हो सकती है। ऐसी स्थिति में जाँच की पारदर्शिता और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालाँकि,ट्रंप की ताजा घोषणा से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भारतीय मूल के लोगों को अलग से निशाना बनाया जाएगा। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित इनाम योजना को किस तरह लागू किया जाता है और संबंधित एजेंसियाँ शिकायतों की जाँच के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाती हैं।

मध्यावधि चुनाव नजदीक आने के साथ ट्रंप और उनकी पार्टी ने प्रचार गतिविधियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार,मंगलवार को टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी और लुबॉक में उनकी चुनावी रैलियां निर्धारित हैं। वहीं,उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मिशिगन के हॉवेल में प्रचार करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी मतदाताओं तक अपनी प्राथमिकताएँ पहुँचाने और चुनाव से पहले समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ट्रंप ने सोमवार को बातचीत के दौरान दूसरे देशों में हुए चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ब्राजील में मतगणना की प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहाँ वोटों की गिनती उन्हें ठीक नहीं लगी। इसके अलावा उन्होंने इजरायल के चुनावों में दो उम्मीदवारों का समर्थन करने के अपने फैसले का भी बचाव किया। उनकी इन टिप्पणियों से स्पष्ट है कि चुनावों की विश्वसनीयता और राजनीतिक नेतृत्व का चयन उनके सार्वजनिक बयानों में लगातार प्रमुख विषय बना हुआ है।

दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले मतदाताओं में डर पैदा करने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका तर्क है कि चुनावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए,जिससे पात्र नागरिक मतदान करने से हिचकिचाएँ। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर क्या विस्तृत प्रतिक्रिया आती है और इनाम योजना के लिए कौन-से दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मुकाबला होगा। इन चुनावों के परिणाम राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल के दौरान विधायी कामकाज और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस में किसी पार्टी की स्थिति तय करती है कि विधेयकों को पारित कराने,बजट संबंधी फैसले लेने और प्रशासन की नीतियों पर निगरानी रखने में उसे कितनी राजनीतिक ताकत मिलेगी।

इन चुनावों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े कई उम्मीदवार भी मैदान में हैं। ऐसे में प्रवासी समुदायों के लिए मतदान के नियम,नागरिकता से जुड़े सवाल और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा महत्वपूर्ण मुद्दे बने रह सकते हैं।

फिलहाल,ट्रंप की ओर से 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा ने चुनावी सुरक्षा पर बहस को नया आयाम दिया है,लेकिन इस प्रस्ताव की प्रभावशीलता और इसके संभावित परिणामों का आकलन तभी किया जा सकेगा,जब इसके संचालन,वित्तपोषण, कानूनी आधार और जाँच प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आएगी। चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह भी जरूरी होगा कि शिकायतों की जाँच प्रमाणों के आधार पर हो और किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।