इसरो ने लॉन्च किया स्वदेशी नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

इसरो ने लॉन्च किया स्वदेशी नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03,अब देश को मिलेगी और सटीक लोकेशन सुविधा, विदेशी जीपीएस पर निर्भरता होगी कम

श्रीहरिकोटा,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत ने अंतरिक्ष तकनीक और स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार रात अपने नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण किया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से इस उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया। रॉकेट ने रात 11 बजकर 51 मिनट पर उड़ान भरी। प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद रॉकेट के तीनों चरणों ने अपना निर्धारित काम सफलतापूर्वक पूरा किया और 2,232 किलोग्राम वजनी उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया। इस उपलब्धि से भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली नाविक को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही रक्षा,परिवहन, संचार, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की तकनीकी क्षमताओं का विस्तार होगा।

एनवीएस-03 भारत की दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन उपग्रह श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश की क्षेत्रीय नेविगेशन व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और सटीक बनाना है। इस उपग्रह के माध्यम से भारत के संपूर्ण भूभाग के साथ-साथ देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर तक नेविगेशन और लोकेशन सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत होगी। इससे न केवल आम नागरिकों को बेहतर स्थान संबंधी जानकारी मिलेगी, बल्कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सशस्त्र बलों को भी महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।

भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली विकसित करने के पीछे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कारण रहा है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को पाकिस्तानी घुसपैठियों की सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए उपग्रह आधारित लोकेशन संबंधी जानकारी की आवश्यकता थी। उस समय भारत ने अमेरिका से जीपीएस डेटा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था,लेकिन अमेरिका ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। इस घटना ने भारत को विदेशी तकनीक और दूसरे देशों की नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भर रहने के जोखिम का एहसास कराया।

इसके बाद भारत ने अपनी स्वतंत्र उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया। इसी उद्देश्य से नाविक यानी नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन परियोजना की शुरुआत की गई। इसका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना था,जिसके जरिए भारत अपनी सुरक्षा और नागरिक जरूरतों के लिए किसी दूसरे देश की तकनीक पर पूरी तरह निर्भर न रहे। आज एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एनवीएस-03 की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताओं में स्वदेशी रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक शामिल है। इसे भारत में ही विकसित किया गया है। उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली में सटीक समय का विशेष महत्व होता है,क्योंकि इसी के आधार पर किसी स्थान की दूरी और स्थिति का निर्धारण किया जाता है। एटॉमिक क्लॉक की मदद से समय की गणना बेहद सटीक तरीके से की जा सकती है। इससे नेविगेशन सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस उपग्रह की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मल्टी-बैंड क्षमता है। यह एल-1, एल-5 और एस बैंड पर सिग्नल प्रसारित करने में सक्षम है। खासतौर पर एल-1 बैंड को शामिल किए जाने से नाविक प्रणाली का इस्तेमाल करने वाले उपकरणों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह बैंड आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले स्मार्टफोन और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे भविष्य में नाविक समर्थित मोबाइल फोन और दूसरे उपकरणों में स्वदेशी नेविगेशन सुविधा का इस्तेमाल आसान हो सकता है।

एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण केवल अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है,बल्कि इसका असर देश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। रक्षा क्षेत्र में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना को सुरक्षित तथा सटीक नेविगेशन जानकारी उपलब्ध कराने में यह प्रणाली उपयोगी होगी। सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों के दौरान सटीक लोकेशन की जानकारी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। भारत की सीमाओं से 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सेवाओं का विस्तार होने से सामरिक क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।

आम नागरिकों के लिए भी इस प्रणाली के कई फायदे हैं। स्मार्टफोन, कार, टैक्सी और व्यावसायिक वाहनों में नेविगेशन सेवाओं को बेहतर बनाने में नाविक की भूमिका हो सकती है। परिवहन कंपनियाँ ट्रकों और अन्य वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगी। इससे माल ढुलाई,वाहन प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

समुद्री क्षेत्र में भी यह उपग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरों को सही दिशा और स्थान की जानकारी देने में स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली मददगार होगी। इसके अलावा चक्रवात,समुद्री तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय रहते चेतावनी पहुँचाने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे समुद्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आपदा प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में भी इस तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है। बाढ़, भूकंप और तूफान जैसी आपदाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों की सटीक पहचान करने और राहत एवं बचाव अभियान संचालित करने में नेविगेशन सेवाएँ उपयोगी साबित हो सकती हैं। वहीं,सटीक खेती के तहत खेतों की निगरानी, सिंचाई और कृषि उपकरणों के संचालन को बेहतर बनाने में भी इसका योगदान हो सकता है।

नेविगेशन उपग्रहों का काम केवल रास्ता बताना नहीं होता,बल्कि वे कई महत्वपूर्ण प्रणालियों को सटीक समय उपलब्ध कराने में भी मदद करते हैं। बैंकिंग,दूरसंचार और बिजली ग्रिड जैसी व्यवस्थाओं में समय का सही तालमेल बेहद जरूरी होता है। एनवीएस-03 से मिलने वाली सटीक टाइमिंग सुविधा इन प्रणालियों के संचालन और समन्वय को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।

भारत की नाविक प्रणाली और अमेरिका की जीपीएस व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। जीपीएस पूरी दुनिया में सेवाएं देने वाली वैश्विक नेविगेशन प्रणाली है,जबकि नाविक का मुख्य उद्देश्य भारत और उसके आसपास के लगभग 1,500 किलोमीटर के क्षेत्र में सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए नाविक का मकसद जीपीएस को पूरी तरह समाप्त करना नहीं,बल्कि भारत की महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए एक स्वतंत्र और भरोसेमंद विकल्प तैयार करना है।

जिन स्मार्टफोन और उपकरणों में नाविक समर्थित चिपसेट उपलब्ध हैं, वे जीपीएस और नाविक दोनों के सिग्नल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अलग-अलग उपग्रह प्रणालियों की मदद से लोकेशन संबंधी जानकारी प्राप्त करने की क्षमता बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर,एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे नाविक नेटवर्क की निरंतरता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस स्वदेशी प्रणाली का विस्तार रक्षा से लेकर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों तक कई क्षेत्रों में भारत की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।