अमरावती / हैदराबाद / भुवनेश्वर,3 नवंबर (युआईटीवी)- बंगाल की खाड़ी में बना गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ सोमवार देर रात आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके से टकरा गया। तूफान के तट से टकराने के दौरान समुद्र में ऊँची लहरें उठीं और कई तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार,चक्रवात सोमवार देर रात करीब 1 बजे नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के निकट आंध्र प्रदेश के तट को पूरी तरह पार कर गया। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रही,जबकि तेज झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तूफान का असर आंध्र प्रदेश के अलावा ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में लगातार बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में उठती ऊँची लहरों के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।
चक्रवात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। संभावित नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 37 टीमें पांच राज्यों में तैनात की गई हैं। वहीं, ओडिशा सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों से लगभग 1.6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई हवाई अड्डों पर कुल 30 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
चक्रवात मुरासु का सबसे ज्यादा प्रभाव आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल रहा है। बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ओंगोल के कोथापटनम बीच और चिराला सहित कई तटीय क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। समुद्र में ऊँची लहरें उठने के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान के लैंडफॉल के दौरान हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रही। कई स्थानों पर तेज झोंकों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। इतनी तेज हवाओं के कारण पेड़ों,बिजली के खंभों और अस्थायी संरचनाओं को नुकसान पहुँचने की आशंका बनी हुई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पाँच राज्यों में तैनात राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 37 टीमों में से 13 टीमें अकेले आंध्र प्रदेश में लगाई गई हैं। इसके अलावा तमिलनाडु के अरक्कोनम से करीब 90 जवानों वाली तीन टीमें नेल्लोर, प्रकाशम और मार्कापुरम में तैनात की गई हैं। इन टीमों को किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुँचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
चक्रवात के प्रभाव से हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण आंध्र प्रदेश के तीन प्रमुख हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 19 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, चेन्नई हवाई अड्डे पर भी खराब मौसम के चलते 11 उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा है।
हवाई अड्डा प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। मौसम की स्थिति सामान्य होने के बाद ही उड़ानों का संचालन दोबारा सुचारु होने की संभावना है। यात्रियों को हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
चक्रवात मुरासु का असर ओडिशा के तटीय और दक्षिणी जिलों में भी दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए बड़े स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का अभियान चलाया। गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों के संवेदनशील तटीय और निचले इलाकों से करीब 1.6 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया गया है।
सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि चक्रवात और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में किसी भी तरह की जनहानि न हो। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को सक्रिय रखा गया है। लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में भोजन, पानी और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
पुरी और उसके आसपास के इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और मूसलाधार बारिश जारी है। रायगड़ा जिले के सभी 11 अग्निशमन केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल और राज्य अग्निशमन सेवा के 300 से अधिक बचाव दलों को विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
तमिलनाडु में भी चक्रवात का प्रभाव लगातार महसूस किया जा रहा है। राजधानी चेन्नई और आसपास के जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई है। मौसम संबंधी आँकड़ों के मुताबिक,चेन्नई के माधवरम में सबसे अधिक 11 सेंटीमीटर बारिश हुई। वहीं,एन्नोर पोर्ट और नुंगमबक्कम में 10-10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।
लगातार बारिश के कारण शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। चेन्नई नगर निगम ने दो सबवे में जमा पानी निकालने के लिए अतिरिक्त पंप और मोटरें तैनात की हैं। अधिकारियों की ओर से जलनिकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि बारिश के कारण यातायात और आम लोगों की आवाजाही ज्यादा प्रभावित न हो।
तिरुवल्लूर जिले के पझावेर्काडु क्षेत्र में समुद्र में करीब छह फीट ऊँची लहरें उठ रही हैं। समुद्र के उग्र रूप को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
मुरासु का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के असर से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं।
इन राज्यों में मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने, स्थानीय स्तर पर बाढ़ और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। विशेष रूप से तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
इस चक्रवाती तूफान का नाम मुरासु भारत की ओर से दिया गया है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ एक प्राचीन वाद्य यंत्र या युद्ध का नगाड़ा होता है। पुराने समय में नगाड़े का इस्तेमाल लोगों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने और किसी खतरे के प्रति सचेत करने के लिए किया जाता था। इसी सांस्कृतिक अर्थ के कारण इस नाम को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा बड़ा चक्रवात है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान अर्नब आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। उस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच गई थी। उस तूफान के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में छह लोगों की मौत हुई थी,जबकि कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा था।
लगातार दो चक्रवाती तूफानों के आने से बंगाल की खाड़ी से सटे राज्यों में चिंता बढ़ गई है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
चक्रवात मुरासु के तट पार करने के बाद भी कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश का सिलसिला जारी है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, जलभराव से निपटना और बिजली तथा परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखना है। राहत एवं बचाव दलों को जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है,जबकि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें प्रभावित जिलों में तैनात हैं। तमिलनाडु में भी नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग जलभराव से निपटने में जुटे हैं।
फिलहाल चक्रवात का असर कई राज्यों में बना हुआ है। मौसम विभाग की चेतावनियों और प्रशासन की तैयारियों के बीच लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें,समुद्र और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। आने वाले समय में मौसम की स्थिति और चक्रवात के आगे बढ़ने की दिशा पर सभी संबंधित एजेंसियों की नजर बनी हुई है।
