अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड

अदाणी कॉपर को लंदन मेटल एक्सचेंज की ‘गुड डिलीवरी’ मान्यता,वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ी साख

अहमदाबाद,7 जुलाई (युआईटीवी)- अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड ने वैश्विक धातु उद्योग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए लंदन मेटल एक्सचेंज से ‘अदाणी कॉपर’ के लिए सर्टिफिकेशन प्राप्त कर लिया है। कंपनी ने मंगलवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में बताया कि इस मंजूरी के साथ अब अदाणी कॉपर कैथोड्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘गुड डिलीवरी’ ब्रांड के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह उपलब्धि न केवल कंपनी के लिए बल्कि भारत के रिफाइंड कॉपर उद्योग के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। इससे भारतीय कॉपर उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

कंपनी के अनुसार,लंदन मेटल एक्सचेंज द्वारा मिली यह मंजूरी कच्छ कॉपर लिमिटेड की उच्च गुणवत्ता वाली विनिर्माण क्षमता और जिम्मेदार सोर्सिंग प्रणाली की पुष्टि करती है। यह प्रमाणन इस बात का संकेत है कि कंपनी ने उत्पादन,गुणवत्ता नियंत्रण,रासायनिक संरचना,आकार,वजन और जिम्मेदार खनिज स्रोतों से कच्चे माल की खरीद जैसे सभी वैश्विक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसी कारण अब अदाणी कॉपर कैथोड्स को ऐसे वारंट के साथ डिलीवर किया जा सकेगा,जिन्हें 10 जुलाई 2026 से लंदन मेटल एक्सचेंज के कॉपर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत जारी किया जाएगा।

लंदन मेटल एक्सचेंज दुनिया में औद्योगिक धातुओं की ट्रेडिंग का सबसे प्रतिष्ठित मंच माना जाता है। यहाँ सूचीबद्ध होने का अर्थ केवल व्यापारिक मान्यता प्राप्त करना नहीं है,बल्कि यह गुणवत्ता,विश्वसनीयता और पारदर्शिता की अंतर्राष्ट्रीय मुहर भी माना जाता है। ऐसे में अदाणी कॉपर को ‘कॉपर ग्रेड ए’ कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ‘गुड डिलीवरी’ ब्रांड के रूप में सूचीबद्ध किया जाना कंपनी को विश्व के प्रमुख कॉपर उत्पादकों की श्रेणी में खड़ा करता है। इससे अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय कॉपर उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजारों के द्वार खुलेंगे।

अदाणी एंटरप्राइजेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (नेचुरल रिसोर्सेज) और कच्छ कॉपर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. विनय प्रकाश ने इस उपलब्धि को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कॉपर वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़ है और भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों,सौर ऊर्जा संयंत्रों,पवन ऊर्जा परियोजनाओं,बैटरी निर्माण,बिजली के ट्रांसमिशन नेटवर्क और आधुनिक औद्योगिक ढाँचे में कॉपर की माँग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में लंदन मेटल एक्सचेंज से ब्रांड मान्यता मिलना यह दर्शाता है कि अदाणी अब दुनिया के प्रमुख कॉपर उत्पादकों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मान्यता से भारत की भूमिका वैश्विक कॉपर सप्लाई चेन में और मजबूत होगी। जिम्मेदार और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की दिशा में यह उपलब्धि देश के लिए भी अहम है। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय धातु उद्योग में भारत की बढ़ती भागीदारी को नई पहचान मिलेगी तथा रिफाइंड कॉपर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंदन मेटल एक्सचेंज की सूची में शामिल होने से किसी भी धातु उत्पादक कंपनी को कई व्यावसायिक लाभ प्राप्त होते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि कंपनी के उत्पादों को एक्सचेंज द्वारा अनुमोदित वेयरहाउस में वारंट के आधार पर रखा जा सकता है। इससे इन उत्पादों की वैश्विक स्तर पर खरीद-बिक्री अधिक सरल हो जाती है और वित्तीय संस्थानों के लिए भी ऐसे उत्पादों को गिरवी रखकर ऋण उपलब्ध कराना आसान हो जाता है। चूँकि,लंदन मेटल एक्सचेंज में सूचीबद्ध धातुओं को अत्यधिक लिक्विड एसेट माना जाता है,इसलिए निवेशकों और व्यापारियों के बीच उनकी मांग अधिक रहती है।

कंपनी ने बताया कि इस सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया बेहद कठोर होती है। इसमें उत्पाद की गुणवत्ता का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। रासायनिक संरचना,शुद्धता,आकार,वजन और उत्पादन प्रक्रिया की जाँच के अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कच्चे माल की खरीद जिम्मेदार और नैतिक मानकों के अनुरूप हुई है। पर्यावरण संरक्षण,पारदर्शिता और वैश्विक अनुपालन से जुड़े नियमों का पालन भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इन सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी ब्रांड को ‘गुड डिलीवरी’ का दर्जा मिलता है।

लंदन मेटल एक्सचेंज के लिए भी अदाणी कॉपर का शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे एक्सचेंज के डिलीवरी नेटवर्क का विस्तार होगा और उसे दुनिया के एक बड़े नए उत्पादन केंद्र से उच्च गुणवत्ता वाले कॉपर कैथोड की आपूर्ति मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक कॉपर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और आपूर्ति स्रोतों में भौगोलिक विविधता भी आएगी। यह वैश्विक उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है क्योंकि बढ़ती माँग के बीच विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले कॉपर की उपलब्धता सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता बन गया है।

कंपनी ने अपने बयान में यह भी बताया कि कच्छ कॉपर परियोजना में लगभग 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 0.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल हो गया है। इस संयंत्र को अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत प्रक्रिया स्वचालन और सस्टेनेबिलिटी आधारित डिजाइन सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया गया है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम करने का प्रयास किया गया है।

भारत लंबे समय से रिफाइंड कॉपर की बढ़ती घरेलू माँग को पूरा करने के लिए आयात पर भी निर्भर रहा है। ऐसे में कच्छ कॉपर जैसे बड़े संयंत्र देश में घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी,विदेशी मुद्रा की बचत होगी और घरेलू उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाला कॉपर समय पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। बिजली,बुनियादी ढाँचा,इलेक्ट्रॉनिक्स,दूरसंचार,रक्षा और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कॉपर की बढ़ती माँग को देखते हुए यह परियोजना भारत की औद्योगिक प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा परिवर्तन और हरित तकनीकों के विस्तार के कारण कॉपर की वैश्विक माँग लगातार बढ़ने वाली है। ऐसे समय में यदि भारत उच्च गुणवत्ता वाले रिफाइंड कॉपर का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बनता है,तो इससे देश की औद्योगिक क्षमता के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी। लंदन मेटल एक्सचेंज की ओर से मिली यह मान्यता इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है,जो भारतीय धातु उद्योग के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।