नई दिल्ली,7 जुलाई (युआईटीवी)- मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने भारत सरकार को आश्वासन दिया है कि वह देश में अपने प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को तब तक लॉन्च नहीं करेगा,जब तक इस विषय पर सरकार के साथ चल रही बातचीत पूरी नहीं हो जाती। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है,जब केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण संबंधी चिंताएँ जताई हैं। सूत्रों के अनुसार,सरकार और कंपनी के बीच इस मुद्दे पर लगातार संवाद जारी है और दोनों पक्ष ऐसे समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं,जिससे उपयोगकर्ताओं की सुविधा और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक,केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप को पहले जारी किए गए औपचारिक नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय भी दिया है। कंपनी को पहले शुक्रवार तक अपना जवाब देना था,लेकिन अब उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सरकार की चिंताओं का विस्तृत उत्तर देने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। माना जा रहा है कि इस दौरान कंपनी अपने प्रस्तावित फीचर से जुड़े तकनीकी और सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी भी सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
व्हाट्सएप जिस यूजरनेम फीचर पर काम कर रहा है,उसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए केवल एक यूनिक यूजरनेम के माध्यम से बातचीत करने की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस फीचर के लागू होने के बाद किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर जानना आवश्यक नहीं होगा। इसके बजाय, यदि किसी उपयोगकर्ता ने यूजरनेम बनाया है तो उसी के माध्यम से उससे संपर्क किया जा सकेगा। यह व्यवस्था कई अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद है और इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की निजता को बेहतर बनाना माना जा रहा है।
हालाँकि,भारत सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से साइबर अपराधों के नए खतरे भी सामने आ सकते हैं। सरकार की प्रमुख चिंता यह है कि यदि मोबाइल नंबर के बजाय केवल यूजरनेम के आधार पर संपर्क स्थापित किया जाएगा,तो साइबर अपराधी फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं। इससे ऑनलाइन ठगी,फिशिंग,पहचान की नकल कर लोगों को गुमराह करना और अन्य डिजिटल अपराधों की आशंका बढ़ सकती है। इसी कारण सरकार ने व्हाट्सएप से कहा है कि जब तक इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा नहीं हो जाती और पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं किए जाते,तब तक इस फीचर को भारत में लागू न किया जाए।
इसी मुद्दे पर पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप को औपचारिक नोटिस जारी किया था। नोटिस में कंपनी से प्रस्तावित फीचर की कार्यप्रणाली,सुरक्षा तंत्र और संभावित जोखिमों के बारे में विस्तृत जानकारी माँगी गई थी। सरकार चाहती है कि फीचर लॉन्च होने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका दुरुपयोग किसी भी स्थिति में आम नागरिकों के खिलाफ न हो सके।
इस सिलसिले में शुक्रवार को मेटा के एक प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान यूजरनेम फीचर से जुड़े विभिन्न तकनीकी,कानूनी और सुरक्षा पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार,कंपनी ने सरकार को यह भरोसा दिलाया कि वह भारत सरकार द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं का गंभीरता से समाधान करेगी और आवश्यक होने पर फीचर में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी शामिल किए जा सकते हैं।
व्हाट्सएप ने इस सप्ताह की शुरुआत में भी अपने प्रस्तावित फीचर को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दिया था। कंपनी का कहना है कि यूजरनेम फीचर को विकसित करते समय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत कई ऐसे सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं,जिनका उद्देश्य फर्जी पहचान,धोखाधड़ी,स्पैम संदेश और अनचाहे संपर्क जैसी समस्याओं को रोकना है। कंपनी का दावा है कि फीचर को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजरनेम बनाना किसी भी उपयोगकर्ता के लिए अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर आधारित मौजूदा सिस्टम ही उपयोग करना चाहता है,तो वह पहले की तरह व्हाट्सएप का इस्तेमाल जारी रख सकेगा। यानी यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा और उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार इसका चयन कर सकेंगे।
सरकार की ओर से उठाए गए सवालों के बाद व्हाट्सएप ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण साझा किए। कंपनी ने बताया कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पहले से मौजूद यूजरनेम,सार्वजनिक हस्तियों,प्रसिद्ध व्यक्तियों,सरकारी संस्थानों तथा मेटा वेरिफाइड खातों के यूजरनेम पहले से सुरक्षित रखे जाएँगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य व्यक्ति किसी प्रसिद्ध नाम का गलत इस्तेमाल करके लोगों को भ्रमित न कर सके। इस व्यवस्था के तहत संबंधित यूजरनेम केवल उनके वास्तविक मालिकों को ही उपलब्ध होंगे।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल नंबर छिपाकर बातचीत करने की सुविधा उपयोगकर्ताओं की निजता को मजबूत कर सकती है,विशेषकर उन लोगों के लिए जो व्यावसायिक या सार्वजनिक कारणों से बड़ी संख्या में नए लोगों से संपर्क करते हैं। दूसरी ओर,विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि यदि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी तो इस सुविधा का दुरुपयोग भी संभव है। इसलिए किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले मजबूत सत्यापन प्रणाली,शिकायत निवारण व्यवस्था और फर्जी खातों की पहचान करने वाले तंत्र का प्रभावी होना आवश्यक है।
भारत दुनिया में व्हाट्सएप का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और देश में करोड़ों लोग इस मैसेजिंग सेवा का उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले सरकार और कंपनी दोनों ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा,गोपनीयता और डिजिटल विश्वास प्रभावित न हो। यही कारण है कि दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत जारी है।
फिलहाल व्हाट्सएप ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में यूजरनेम फीचर तब तक लॉन्च नहीं किया जाएगा,जब तक केंद्र सरकार के साथ सभी आवश्यक चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं। आने वाले दिनों में कंपनी सरकार को अपने विस्तृत जवाब और सुरक्षा उपायों की जानकारी देगी,जिसके बाद इस फीचर के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में भारतीय उपयोगकर्ताओं को फिलहाल इस नए फीचर के लिए कुछ समय और इंतजार करना होगा,जबकि सरकार और कंपनी मिलकर ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं,जो तकनीकी नवाचार के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की भी पूरी तरह रक्षा कर सके।
