नई दिल्ली,22 जून (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में मिली करारी हार के बाद इंग्लैंड क्रिकेट टीम को एक और बड़ा झटका लगा है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने धीमी ओवर गति के कारण इंग्लैंड टीम पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में इंग्लैंड के 12 महत्वपूर्ण अंक भी काट लिए गए हैं। इस कार्रवाई ने न केवल टीम की स्थिति को प्रभावित किया है,बल्कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ में उसके लिए नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं।
आईसीसी की ओर से जारी बयान के अनुसार,दूसरे टेस्ट मैच के दौरान इंग्लैंड निर्धारित समय के भीतर अपने ओवर पूरे करने में विफल रही। मैच के अंत में यह पाया गया कि मेजबान टीम तय समय के मुकाबले 12 ओवर पीछे रह गई थी। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के अनुसार,टेस्ट क्रिकेट में निर्धारित ओवर समय पर पूरे करना टीमों की जिम्मेदारी होती है और इसमें विफल रहने पर सख्त दंड का प्रावधान है।
इस मामले में मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट ने इंग्लैंड को आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 का दोषी पाया। इस नियम के तहत यदि कोई टीम निर्धारित समय के भीतर ओवर पूरे नहीं कर पाती है,तो खिलाड़ियों की मैच फीस में कटौती की जा सकती है। इंग्लैंड के मामले में 12 ओवर की कमी को गंभीर माना गया और टीम पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया।
इसके साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की खेल शर्तों के अनुच्छेद 16.11.2 के तहत हर कम फेंके गए ओवर के लिए एक अंक काटने का नियम लागू किया गया। चूँकि,इंग्लैंड 12 ओवर पीछे रही,इसलिए उसके 12 अंक काट लिए गए। यह कटौती टीम के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हुई है,क्योंकि टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में प्रत्येक अंक का महत्व काफी अधिक होता है।
दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की कप्तानी कर रहे जो रूट ने अपनी टीम की गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने आईसीसी द्वारा लगाए गए आरोपों को चुनौती नहीं दी और सजा को मान लिया। कप्तान द्वारा अपराध स्वीकार कर लेने के कारण मामले में किसी औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे अनुशासनात्मक प्रक्रिया जल्दी पूरी हो गई और आईसीसी ने अपने फैसले की घोषणा कर दी।
इस दंड का सीधा असर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका पर पड़ा है। 12 अंक कटने के बाद इंग्लैंड सातवें स्थान पर खिसक गई है। टीम के खाते में अब कुल 38 अंक रह गए हैं और उसका जीत प्रतिशत भी घटकर 26.39 हो गया है। अंक तालिका में यह गिरावट इंग्लैंड के लिए चिंता का विषय है,क्योंकि आगामी मुकाबलों में उसे न केवल जीत दर्ज करनी होगी,बल्कि ओवर गति जैसे नियमों का भी सख्ती से पालन करना होगा।
यह पहला अवसर नहीं है,जब इंग्लैंड को धीमी ओवर गति के कारण सजा मिली हो। इससे पहले पिछले वर्ष भारत के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच के बाद भी टीम के अंक काटे गए थे। उस समय इंग्लैंड को दो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंक गंवाने पड़े थे। लगातार दूसरी बार इस तरह की सजा मिलने से टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ गया है।
मैदान पर भी इंग्लैंड का प्रदर्शन दूसरे टेस्ट में उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। न्यूजीलैंड ने मैच में शानदार खेल दिखाते हुए इंग्लैंड को 253 रनों के बड़े अंतर से पराजित किया। मुकाबले में न्यूजीलैंड ने अपनी दोनों पारियों में मजबूत बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और इंग्लैंड पर लगातार दबाव बनाए रखा।
मैच की पहली पारी में न्यूजीलैंड ने 391 रन बनाकर मजबूत आधार तैयार किया। इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम केवल 291 रन ही बना सकी। पहली पारी में मिली बढ़त ने न्यूजीलैंड को मैच पर नियंत्रण स्थापित करने का मौका दिया। इसके बाद न्यूजीलैंड ने दूसरी पारी में भी उपयोगी रन जोड़कर इंग्लैंड के सामने 463 रनों का विशाल लक्ष्य रख दिया।
इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की बल्लेबाजी पूरी तरह दबाव में दिखाई दी। चौथी पारी में टीम केवल 209 रन बनाकर सिमट गई। कप्तान जो रूट ने संघर्ष करते हुए 77 रनों की पारी खेली और टीम को सँभालने की कोशिश की। वहीं हैरी ब्रूक ने भी 58 रन बनाकर कुछ उम्मीद जगाई। हालाँकि,इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा कोई अन्य खिलाड़ी बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सका।
मध्यक्रम और निचला क्रम पूरी तरह विफल रहा,जिसके कारण इंग्लैंड लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुँच सकी। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए लगातार विकेट हासिल किए और इंग्लैंड को बड़ी हार के लिए मजबूर कर दिया।
हार और अंक कटौती के इस दोहरे झटके ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर टीम को अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा,वहीं दूसरी ओर उसे आईसीसी के नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा,ताकि भविष्य में इस तरह की सजा से बचा जा सके। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लंबे और प्रतिस्पर्धी अभियान में ऐसी गलतियाँ किसी भी टीम की फाइनल में पहुँचने की उम्मीदों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं।
अब इंग्लैंड के सामने चुनौती केवल मैच जीतने की नहीं,बल्कि मैदान पर अनुशासन और समय प्रबंधन में भी सुधार करने की है। आने वाले मुकाबलों में टीम का प्रदर्शन यह तय करेगा कि वह इस झटके से उबरकर फिर से शीर्ष टीमों की दौड़ में शामिल हो पाती है या नहीं।
