डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@Rohitjain2799)

ईरानी मिसाइल हमलों के बाद बढ़ा तनाव,ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई अहम बातचीत

वाशिंगटन,8 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। बेरूत में हुए हवाई हमलों के बाद ईरान द्वारा इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार किए जाने से क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच रविवार को एक महत्वपूर्ण फोन वार्ता हुई। हालाँकि,दोनों नेताओं के कार्यालयों की ओर से बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया,लेकिन इस संपर्क को क्षेत्रीय हालात के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इजरायल के सरकारी टेलीविजन चैनल कान टीवी की रिपोर्ट के अनुसार,दोनों नेताओं ने ईरान के हालिया मिसाइल हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम तथा व्यापक समझौते को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

फोन कॉल से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के चैनल 12 न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि वह बेंजामिन नेतन्याहू को जवाबी कार्रवाई से बचने की सलाह देंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताएँ किसी नए सैन्य संघर्ष के कारण बाधित हो जाएँ। उनके अनुसार,हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी और समझौते की संभावनाएँ मजबूत दिखाई दे रही थीं।

ट्रंप ने अमेरिकी समाचार चैनल फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि वह ईरान को संयम बरतने की सलाह देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी मिसाइलें दाग दी हैं और अब उसे आगे किसी सैन्य कार्रवाई से बचते हुए बातचीत की मेज पर लौट आना चाहिए। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मिसाइल हमलों से पहले वॉशिंगटन और तेहरान के बीच किसी समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी थी।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब पहुँच चुके थे और उन्हें उम्मीद थी कि आने वाले कुछ दिनों में इस पर हस्ताक्षर भी हो सकते थे। ट्रंप के अनुसार,सोमवार,मंगलवार या बुधवार तक किसी सकारात्मक परिणाम की संभावना थी,लेकिन ताजा घटनाक्रम ने स्थिति को जटिल बना दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के सैन्य हमले शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार साबित नहीं होंगे।

इस बीच अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार,ईरान ने रविवार को कम से कम दस बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल की ओर दागीं। बताया गया कि इन मिसाइलों को तीन अलग-अलग चरणों में छोड़ा गया। मिसाइल हमलों के बाद पूरे इजरायल में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया और कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।

इजरायली सेना का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया और किसी भी मिसाइल को अपने लक्ष्य तक पहुँचने नहीं दिया। सेना के अनुसार,बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली ने संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय कर दिया,जिससे बड़े नुकसान को टालने में सफलता मिली।

हालाँकि,इजरायल की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि वह इस हमले को बिना जवाब के नहीं छोड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय समाचार नेटवर्क सीएनएन द्वारा उद्धृत दो इजरायली सूत्रों ने कहा है कि सरकार ईरान के हमलों का “कड़ा जवाब” देने की तैयारी कर रही है। इन संकेतों ने क्षेत्र में नए सैन्य टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

इजरायली सेना ने रविवार रात एक बयान में कहा कि अब तक ईरान की ओर से चार अलग-अलग मिसाइल हमलों की लहरें इजरायल की दिशा में भेजी जा चुकी हैं। इन हमलों के कारण देश के उत्तरी हिस्सों में कई स्थानों पर सायरन बजाए गए। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने के लिए कहा।

फिलहाल राहत की बात यह है कि किसी के घायल होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल जवाबी कार्रवाई करता है,तो यह तनाव और अधिक बढ़ सकता है तथा पूरे क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है।

मध्य पूर्व पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रहा है। ऐसे में ईरान और इजरायल के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की संभावना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई है। अमेरिका सहित कई देशों की कोशिश है कि दोनों पक्ष संयम बरतें और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत इसी व्यापक रणनीतिक प्रयास का हिस्सा हो सकती है। अमेरिका लंबे समय से क्षेत्र में तनाव कम करने और किसी बड़े युद्ध को रोकने की कोशिश करता रहा है। हालाँकि,मौजूदा हालात में यह प्रयास कितना सफल होगा,यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं। ईरानी मिसाइल हमलों और इजरायल की संभावित प्रतिक्रिया के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि दोनों पक्ष संयम नहीं बरतते,तो यह संकट पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। दूसरी ओर,यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं,तो यह तनाव कम करने और संभावित संघर्ष को टालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।