वॉशिंगटन,6 जून (युआईटीवी)- संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रमुख सहयोगी देशों ब्रिटेन,डेनमार्क और कुवैत के लिए लगभग 3 अरब डॉलर मूल्य के संभावित रक्षा सौदों को मंजूरी देकर वैश्विक रक्षा सहयोग को नई गति दी है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी घोषणा के अनुसार इन सौदों में लंबी दूरी की अत्याधुनिक मिसाइलें, विमान सुरक्षा प्रणालियाँ,ड्रोन रोधी तकनीक और अन्य उन्नत सैन्य उपकरण शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है,जब दुनिया के कई क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही हैं और विभिन्न देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
इन तीनों देशों के लिए स्वीकृत रक्षा पैकेजों में सबसे बड़ा हिस्सा कुवैत के लिए निर्धारित किया गया है। कुवैत को लगभग 1.98 अरब डॉलर की लागत से मानवरहित हवाई प्रणालियों के खिलाफ उपयोग होने वाले अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और उससे संबंधित उपकरण खरीदने की अनुमति दी गई है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह सौदा कुवैत की सुरक्षा क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा और उसे वर्तमान तथा भविष्य के खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में मदद करेगा।
अमेरिका के अनुसार कुवैत को मिलने वाली यह प्रणाली विशेष रूप से ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार की गई है। हाल के वर्षों में दुनिया भर में ड्रोन तकनीक का सैन्य उपयोग तेजी से बढ़ा है और कई संघर्षों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए ड्रोन रोधी प्रणालियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई हैं।
कुवैत के लिए स्वीकृत पैकेज में कई उन्नत उपकरण शामिल हैं। इनमें रोडरनर-म्यूनिशन और एनविल-काइनेटिक प्लेटफॉर्म,लॉन्च बॉक्स,कमांड और कंट्रोल सिस्टम, सेंट्री टावर, समुद्री सेंट्री टावर,विद्युत चुंबकीय युद्ध प्रणाली,सामरिक संचालन केंद्र,जनरेटर,प्रशिक्षण सुविधाएं,सॉफ्टवेयर विकास और व्यापक लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं। यह पूरा पैकेज केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें संचालन,रखरखाव और प्रशिक्षण संबंधी सुविधाएँ भी शामिल की गई हैं,ताकि कुवैत इन प्रणालियों का अधिकतम उपयोग कर सके।
इस रक्षा सौदे का प्रमुख ठेकेदार कैलिफोर्निया स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी अंदुरिल होगी। हाल के वर्षों में अंदुरिल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाई है। कंपनी की तकनीक आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।
कुवैत के अलावा अमेरिका ने डेनमार्क के लिए भी एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। इस पैकेज की अनुमानित लागत 842 मिलियन डॉलर बताई गई है। इसके तहत डेनमार्क को 200 एजीएम-158 संयुक्त वायु-से-भूमि स्टैंडऑफ विस्तारित दूरी वाली मिसाइलें और उनसे संबंधित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इस सौदे से डेनमार्क की सैन्य क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। विशेष रूप से यह रॉयल डेनिश वायु सेना को लंबी दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता प्रदान करेगा। इसके साथ ही डेनमार्क के एफ-35 लड़ाकू विमानों की मारक शक्ति और परिचालन क्षमता भी मजबूत होगी।
वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में यूरोपीय देशों द्वारा अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलों की उपलब्धता डेनमार्क की सामरिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
डेनमार्क के लिए प्रस्तावित इस सौदे का प्रमुख ठेकेदार फ्लोरिडा स्थित लॉकहीड मार्टिन कंपनी होगी। लॉकहीड मार्टिन दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा कंपनियों में शामिल है और एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य परियोजनाओं से जुड़ी हुई है।
तीसरा रक्षा पैकेज यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन के लिए स्वीकृत किया गया है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 160 मिलियन डॉलर है। इस सौदे के तहत ब्रिटेन को बड़े विमानों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इन्फ्रारेड काउंटरमेजर प्रणाली और संबंधित उपकरण प्राप्त होंगे।
इस पैकेज में 36 गार्जियन लेजर टरेट असेंबली,18 बड़े विमान इन्फ्रारेड काउंटरमेजर सिस्टम प्रोसेसर प्रतिस्थापन इकाइयाँ,मिसाइल चेतावनी सेंसर,सहायक उपकरण, सॉफ्टवेयर,स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं। इन प्रणालियों का उद्देश्य बड़े सैन्य और रणनीतिक विमानों को मिसाइल हमलों से बचाना है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि यह बिक्री ब्रिटेन की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगी। इससे रॉयल एयर फोर्स की परिचालन तत्परता बढ़ेगी और उसके प्रमुख हवाई प्लेटफॉर्म आधुनिक खतरों से बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकेंगे।
ब्रिटेन को होने वाली इस बिक्री का प्रमुख ठेकेदार वर्जीनिया स्थित बोइंग कंपनी होगी। बोइंग लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए रक्षा उपकरणों और विमान प्रणालियों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इन तीनों सौदों के संबंध में यह भी स्पष्ट किया है कि इनसे संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी सैन्य संतुलन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। विभाग के अनुसार ये बिक्री केवल सहयोगी देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही हैं और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को समर्थन मिलेगा।
इसके साथ ही विभाग ने यह भी कहा कि इन सौदों का अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। अमेरिका अपने रक्षा संसाधनों और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रभावित किए बिना इन उपकरणों की आपूर्ति करने में सक्षम है।
ये अधिसूचनाएँ अमेरिकी विदेश सैन्य बिक्री प्रक्रिया के तहत राजनीतिक-सैन्य मामलों के ब्यूरो द्वारा जारी की गई हैं। हालाँकि,विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को अधिसूचना भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण अवश्य है,लेकिन अंतिम समझौते से पहले कुछ प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी रहती हैं।
फिर भी,इस मंजूरी को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। कुवैत,डेनमार्क और ब्रिटेन को प्रदान की जाने वाली ये उन्नत सैन्य प्रणालियाँ आने वाले वर्षों में उनकी सुरक्षा रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। साथ ही यह भी दर्शाती हैं कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर अपने रणनीतिक साझेदारों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की नीति पर लगातार आगे बढ़ रहा है।
बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों,ड्रोन युद्ध,लंबी दूरी की मिसाइलों और आधुनिक हवाई खतरों के दौर में ऐसे रक्षा सौदे केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहते,बल्कि वे देशों की दीर्घकालिक सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि अमेरिका की इस घोषणा को अंतर्राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
