दमिश्क,25 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के उस फैसले का सीरिया ने स्वागत किया है, जिसके तहत उसे आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों की सूची से औपचारिक रूप से हटा दिया गया है। सीरियाई सरकार ने इसे दशकों से चली आ रही अंतर्राष्ट्रीय अलग-थलग स्थिति को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। सीरिया के विदेश मामलों से जुड़े प्राधिकरण ने कहा कि अमेरिका का यह फैसला देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है। दमिश्क का मानना है कि इस कदम से देश की आर्थिक बहाली,पुनर्निर्माण,निवेश और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बेहतर माहौल तैयार हो सकता है।
अमेरिका ने वर्ष 1979 में सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में शामिल किया था। इसके बाद करीब पाँच दशकों तक सीरिया इस अमेरिकी सूची में बना रहा। अमेरिका का आरोप था कि तत्कालीन सीरियाई सरकार के लेबनान स्थित हिज्बुल्लाह,कुछ फिलिस्तीनी संगठनों और ईरान के साथ संबंध थे। इस सूची में शामिल होने के बाद सीरिया को अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापक आर्थिक तथा कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक चले इस अलगाव का असर सीरिया की अर्थव्यवस्था,व्यापार और विदेशी निवेश पर भी पड़ा।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,अमेरिका के सीरिया और इराक मामलों के विशेष राष्ट्रपति दूत टॉम बैरक ने सोमवार को इस फैसले की औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ने सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से हटा दिया है। इस फैसले को सीरिया के साथ अमेरिकी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सीरिया में लंबे समय से चले संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के बाद देश के पुनर्निर्माण की जरूरत लगातार बढ़ती रही है। ऐसे में अमेरिकी सूची से बाहर होना उसके लिए आर्थिक और कूटनीतिक अवसरों के नए रास्ते खोल सकता है।
सीरिया के विदेश मामलों से जुड़े प्राधिकरण ने अमेरिकी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम देश को दशकों से चली आ रही अंतर्राष्ट्रीय अलगाव की स्थिति से बाहर निकालने में मदद करेगा। प्राधिकरण के अनुसार,इससे सीरिया की आर्थिक बहाली को गति मिल सकती है और पुनर्निर्माण के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। इसके साथ ही निवेश और व्यापार के नए अवसर खुलने से देश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सीरियाई पक्ष ने इस फैसले को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं,बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बताया है। लंबे समय तक आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में रहने के कारण सीरिया के लिए कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सामान्य संबंध विकसित करना कठिन रहा। अब इस सूची से बाहर होने के बाद दमिश्क को उम्मीद है कि उसके अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार होगा और विभिन्न देशों के साथ आर्थिक तथा राजनीतिक सहयोग बढ़ेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस फैसले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति से जोड़ते हुए कहा कि ट्रेजरी विभाग सीरिया की जनता को आगे बढ़ने का अवसर देने की प्रतिबद्धता को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम सीरिया में अतिरिक्त निवेश को प्रोत्साहित करेगा और राजनीतिक तथा आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देगा। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार,सीरिया को सूची से बाहर करने का उद्देश्य वहाँ के लोगों को आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी फैसले के पीछे सीरियाई सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह निर्णय राष्ट्रपति अहमद अल शारा के नेतृत्व वाली सीरियाई सरकार की ओर से उठाए गए सकारात्मक कदमों और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से पूरी तरह दूरी बनाने की उसकी प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। रुबियो के अनुसार,पिछले एक वर्ष के दौरान सीरियाई सरकार ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
अमेरिकी प्रशासन का यह बयान संकेत देता है कि सीरिया को सूची से हटाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं है,बल्कि इसे सीरियाई सरकार के व्यवहार में आए बदलाव से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिका ने कहा है कि सीरियाई सरकार की आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों से दूरी बनाने की प्रतिबद्धता ने इस फैसले में भूमिका निभाई है। इससे दोनों देशों के बीच भविष्य में सीमित स्तर पर सहयोग और संवाद की संभावनाएँ भी बढ़ सकती हैं।
विशेष राष्ट्रपति दूत टॉम बैरक ने कहा कि आतंकवाद प्रायोजक देश का दर्जा लंबे समय से सीरियाई जनता को निवेश,कारोबार और आर्थिक अवसरों से दूर रख रहा था। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के कारण सीरियाई लोगों को अपने देश के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी निवेश,उद्यम और अवसर नहीं मिल पाए। उनके अनुसार,अब इस स्थिति में बदलाव की शुरुआत हो रही है। उन्होंने इसे एक ऐसी बाधा के हटने के रूप में बताया,जो लंबे समय से सीरिया के आर्थिक विकास के रास्ते में खड़ी थी।
सीरिया के लिए यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब देश को बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण,रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता की गंभीर जरूरत है। लंबे समय तक चले संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। ऐसे में विदेशी निवेश और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वापसी पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। अमेरिका की सूची से बाहर होने के बाद सीरिया को उम्मीद है कि विदेशी कंपनियाँ और निवेशक देश में कारोबार की संभावनाओं पर दोबारा विचार कर सकते हैं।
हालाँकि, केवल आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से हटना सीरिया की सभी आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं है। देश को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक पुनर्निर्माण,राजनीतिक स्थिरता,सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ संबंधों को सामान्य बनाना लंबी प्रक्रिया हो सकती है। इसके अलावा अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की ओर से सीरिया पर लागू अन्य प्रतिबंधों और नीतियों का भविष्य भी आर्थिक सुधार की गति को प्रभावित कर सकता है।
फिर भी दमिश्क के लिए अमेरिकी फैसला एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 1979 से आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में शामिल सीरिया के लिए इससे बाहर निकलना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्थिति में बदलाव का संकेत है। अमेरिका की इस सूची में ईरान,क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देश भी शामिल रहे हैं। ऐसे में सीरिया को सूची से हटाने का फैसला अमेरिकी मध्य-पूर्व नीति में बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीरियाई सरकार को अब उम्मीद है कि अमेरिकी फैसले के बाद अन्य देश भी दमिश्क के साथ आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को लेकर अधिक सकारात्मक रुख अपना सकते हैं। यदि निवेश और व्यापार के रास्ते खुलते हैं,तो इससे पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। साथ ही रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ने से आम सीरियाई नागरिकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर,अमेरिका का यह फैसला सीरिया के लिए लंबे अंतर्राष्ट्रीय अलगाव के दौर के बाद एक नई शुरुआत का संकेत देता है। वॉशिंगटन ने इसे सीरियाई सरकार के आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से दूरी बनाने की प्रतिबद्धता से जोड़ा है,जबकि दमिश्क इसे आर्थिक पुनर्निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को सामान्य बनाने के अवसर के तौर पर देख रहा है। आने वाले समय में यह फैसला सीरिया की अर्थव्यवस्था,विदेशी निवेश और वैश्विक कूटनीतिक स्थिति पर कितना असर डालता है,यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सीरियाई सरकार आगे किस तरह के राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सुधार लागू करती है।
