राँची,25 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जाँच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान सामने आई कथित जानकारियों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर सीआईडी-एसआईटी अब तक 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। मंगलवार को भी करीब 20 अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है। जाँच एजेंसी का फोकस अब संदिग्ध अभ्यर्थियों के साथ-साथ कथित बिचौलियों,परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों और परीक्षा आयोजन से संबंधित तकनीकी नेटवर्क की भूमिका पर भी है।
जाँच एजेंसी के अनुसार,अभय तिवारी से पूछताछ में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर सेटिंग के जरिए चयन कराने से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इन जानकारियों का मिलान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य आरोपियों से मिली जानकारी से किया जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित परीक्षा धांधली का नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें कौन-कौन लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।
अभय तिवारी पूर्व में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात था। सरकारी सेवा में आने से पहले वह प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर चुका था। जांच में उसके पुराने संपर्कों और परीक्षा आयोजन से जुड़े अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरोप है कि उसने कथित सेटिंग के जरिए खुद पाँच से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। अब जाँच एजेंसी पिछले वर्षों में आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में उसकी भूमिका और उसके संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने कथित तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन कराने के लिए होने वाले आर्थिक लेनदेन के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं। उसके बयानों के अनुसार,सिविल सेवा परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए करीब पाँच लाख रुपये,मुख्य परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए करीब 10 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए 40 से 60 लाख रुपये तक की रकम वसूले जाने का कथित नेटवर्क था। जाँच एजेंसी अब इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी है।
इसी तरह फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की परीक्षा में चयन के लिए कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की रकम लिए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी इन दावों के आधार पर संभावित आर्थिक लेनदेन,संपर्कों और अभ्यर्थियों की भूमिका की जाँच कर रही है। जाँच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित पैसों के लेनदेन और परीक्षा परिणामों के बीच संबंध स्थापित करना है।
मामले की जाँच में तकनीकी पहलू भी सामने आया है। पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर सॉफ्टवेयर और रिमोट एक्सेस के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान मदद पहुँचाए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। जाँच एजेंसी इस तकनीकी नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा प्रणाली में कथित हस्तक्षेप किस स्तर पर किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
जाँच के दौरान अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। दोनों से पूछताछ के दौरान कथित आर्थिक लेनदेन और परीक्षा धांधली से जुड़े संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जाँच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क में परिवार के सदस्यों की क्या भूमिका थी और क्या उनके जरिए किसी तरह का आर्थिक लेनदेन या संपर्क संचालित किया गया।
मामला केवल अभ्यर्थियों और बिचौलियों तक सीमित नहीं है। जाँच एजेंसी आयोगों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते समेत आयोग से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित पहलुओं की जाँच की जा रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यदि परीक्षा में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों तक कैसे पहुँच बनाई गई और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप किस स्तर पर संभव हुआ।
अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान टीडीपीएल को ठेका दिलाने के बदले तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को कथित तौर पर दो करोड़ रुपये दिए जाने का दावा भी किया है। हालाँकि,यह आरोप फिलहाल जाँच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जाँच एजेंसी कथित भुगतान से संबंधित दस्तावेजों,वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला परीक्षा धांधली से आगे बढ़कर भ्रष्टाचार और सरकारी प्रक्रिया में कथित अनियमितता का भी गंभीर मामला बन सकता है।
जाँच एजेंसी पहले ही जेपीएससी के पूर्व सदस्यों और जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूछताछ कर चुकी है। आयोगों के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया,ठेका देने की व्यवस्था और कथित आरोपियों के साथ उनके संपर्कों की जानकारी जुटाना है। जाँच में पुराने परीक्षा रिकॉर्ड और संबंधित प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है।
इस पूरे मामले को लेकर झारखंड में राजनीतिक विवाद भी लगातार जारी है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने परीक्षा धांधली की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो से कराने की माँग की है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है। छात्र संगठनों का आरोप है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में संगठित स्तर पर गड़बड़ी हुई है,तो इसकी निष्पक्ष और व्यापक जाँच जरूरी है।
जाँच का दायरा बढ़ने के साथ अब एजेंसी के सामने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से मिली जानकारी को आपस में जोड़ने की चुनौती है। 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ और मंगलवार को करीब 20 नए अभ्यर्थियों को नोटिस दिए जाने से संकेत मिलता है कि जाँच अभी शुरुआती निष्कर्ष तक सीमित नहीं है। संदिग्ध अभ्यर्थियों की परीक्षा में वास्तविक भूमिका,कथित बिचौलियों से उनके संपर्क और पैसों के लेनदेन की पुष्टि जाँच के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
फिलहाल सीआईडी-एसआईटी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों,आरोपियों के बयानों,वित्तीय लेनदेन और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियाँ जोड़ने में जुटी है। यदि पूछताछ में सामने आए आरोपों और डिजिटल या वित्तीय साक्ष्यों के बीच संबंध स्थापित होते हैं,तो जाँच का दायरा और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में और अभ्यर्थियों, बिचौलियों तथा आयोग से जुड़े लोगों से पूछताछ होने की संभावना है। इस मामले में जाँच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली कितने बड़े स्तर पर हुई और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या रही।
