वॉशिंगटन,23 मार्च (युआईटीवी)- वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ते तनाव के बीच नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने के “बहुत करीब” पहुँच चुका है,जो यूरोप के लिए सीधा खतरा बन सकती है। रुट्टे ने अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस खतरे को नियंत्रित नहीं किया गया,तो इसके वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
रुट्टे का यह बयान ऐसे समय आया है,जब नाटो हिंद महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर कथित मिसाइल हमले की रिपोर्टों का आकलन कर रहा है। हालाँकि,नाटो ने अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं की है,लेकिन इस संभावना ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
एक टेलीविजन कार्यक्रम में बातचीत के दौरान रुट्टे ने कहा कि नाटो इस दावे की जाँच कर रहा है कि ईरान ने डियागो गार्शिया को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि यदि यह जानकारी सही साबित होती है,तो यह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों की आवश्यकता और प्रासंगिकता को और मजबूत करती है।
रुट्टे ने विशेष रूप से ईरान की मिसाइल क्षमता पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि यह देश प्रमुख यूरोपीय शहरों को निशाना बनाने की क्षमता के बेहद करीब पहुँच चुका है। उनके अनुसार,यह केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है,बल्कि इसका प्रभाव पूरे यूरोप और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान की मिसाइल तकनीक को परमाणु क्षमता के साथ जोड़ दिया गया,तो यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें दोनों हो गईं,तो यह इज़राइल, यूरोप और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन जाएगा। इस संदर्भ में उन्होंने समय पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि देरी करना महँगा साबित हो सकता है।
रुट्टे ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए उत्तर कोरिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने उत्तर कोरिया के मामले में शुरुआती चरण में कड़े कदम उठाए होते,तो आज स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक बातचीत करते रहने से वह समय निकल सकता है,जब किसी देश की सैन्य क्षमताओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
इस बीच,डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में नाटो सहयोगियों की आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे अभियानों,खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों का योगदान पर्याप्त नहीं है। इस जलडमरूमध्य का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
रुट्टे ने ट्रंप की इस नाराजगी को स्वीकार किया,लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अब सहयोगी देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 22 देशों ने इस क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पहल की है। इन देशों में नाटो सदस्य देशों के अलावा जापान,दक्षिण कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी क्षेत्र के कई देश शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन देशों के बीच यह तय किया जा रहा है कि किस प्रकार की सैन्य और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है,कब और कहाँ इसे तैनात किया जाना चाहिए,ताकि जलडमरूमध्य में निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। रुट्टे ने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य तैनाती की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है और इस पर रणनीतिक स्तर पर चर्चा जारी है।
नाटो प्रमुख ने यह भी कहा कि इस तरह के संकट के समय गठबंधन की एकता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने भरोसा जताया कि नाटो सदस्य देश इस चुनौती का सामना एकजुट होकर करेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अतीत में भी जब-जब वैश्विक सुरक्षा को खतरा हुआ है,नाटो ने सामूहिक रूप से प्रभावी प्रतिक्रिया दी है।
इस संदर्भ में उन्होंने यूक्रेन के मुद्दे का भी उल्लेख किया और कहा कि नाटो देशों ने वहाँ सहयोग और रक्षा खर्च बढ़ाने के फैसलों के जरिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने अमेरिकी कूटनीति का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका विभिन्न हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास कर रहा है।
रुट्टे ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कई बार जटिल परिस्थितियाँ पैदा होती हैं,जहाँ विभिन्न देशों के हित आपस में टकराते हैं। ऐसे में संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होता है। उन्होंने अमेरिकी प्रयासों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि रुट्टे का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मध्य पूर्व और यूरोप दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। ईरान की सैन्य क्षमताओं,खासकर उसकी मिसाइल तकनीक,को लेकर लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है। अब जब नाटो प्रमुख ने इस मुद्दे पर खुलकर चिंता जताई है,तो यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इस विषय पर और अधिक सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे की चेतावनी ने वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है। ईरान की बढ़ती सैन्य क्षमताएँ,अमेरिका की सक्रिय भूमिका और नाटो देशों के बीच समन्वय—ये सभी कारक मिलकर एक जटिल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस चुनौती का सामना किस रणनीति के साथ करता है और क्या यह प्रयास वैश्विक स्थिरता को बनाए रखने में सफल हो पाते हैं।
