नागोया,25 सितंबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए एक और बड़ी सफलता सामने आई है। भारतीय निशानेबाज सुरुचि इंदर सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 का स्कोर दर्ज करते हुए एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने एशियाई खेलों में अपना दूसरा गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है।
फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। प्रतियोगिता के दबाव के बीच दोनों निशानेबाजों ने धैर्य और सटीकता का परिचय दिया। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा और पदक की स्थिति स्पष्ट होने लगी, भारतीय जोड़ी ने अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखी। निर्णायक क्षणों में लगाए गए सटीक निशानों ने भारत को शीर्ष स्थान पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
सुरुचि और कमलजीत के 484.6 के स्कोर ने न केवल उन्हें गोल्ड मेडल दिलाया, बल्कि इस स्पर्धा में नया एशियाई रिकॉर्ड भी स्थापित किया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया के सुहयोन होंग और गेउन चू को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 478.0 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया। ईरान के वाहिद गोलखंडन और हानियेह रोस्तमियान ने 415.8 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इंडोनेशिया के डार्मोयो ए. और प्रबोवो एम. 349.4 के स्कोर के साथ चौथे स्थान पर रहे।
भारतीय जोड़ी की सबसे बड़ी खासियत मुकाबले के दौरान उनका संयम रहा। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में निशानेबाजी में छोटी सी गलती भी पदक की स्थिति बदल सकती है,लेकिन सुरुचि और कमलजीत ने लगातार अपने प्रदर्शन पर नियंत्रण बनाए रखा। दोनों ने एक-दूसरे का साथ देते हुए सटीक निशाने लगाए और बढ़त हासिल करने के बाद उसे बनाए रखने में सफलता हासिल की। मिक्स्ड टीम स्पर्धा में दोनों निशानेबाजों के बीच तालमेल भी भारतीय प्रदर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड पर जब अंतिम स्कोर सामने आया तो भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। 484.6 का स्कोर एशियाई रिकॉर्ड के साथ भारत के लिए गोल्ड मेडल की पुष्टि कर चुका था। इस उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी दल के लिए एशियाई खेलों में एक और यादगार क्षण जोड़ दिया। इससे पहले भी भारतीय निशानेबाजों ने अंतर्राष्ट्रीय और महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं में लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है और नागोया में भी यह सिलसिला जारी रहा।
सुरुचि और कमलजीत की सफलता केवल फाइनल तक सीमित नहीं रही। इससे पहले क्वालिफिकेशन चरण में भी भारतीय जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया था। दोनों ने 587 का स्कोर बनाया, जिसमें 29 इनर 10 शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड हांगझोऊ 2023 में भारतीय जोड़ी सरबजोत सिंह और दिव्या सुब्बाराजू के नाम था, जिन्होंने 577 का स्कोर दर्ज किया था।
क्वालिफिकेशन में भारतीय जोड़ी के प्रदर्शन की एक और खास बात रही कि उनकी 587 की टैली ने एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी भी की। यह रिकॉर्ड 2021 में सौरभ चौधरी और मनु भाकर की जोड़ी ने बनाया था। इस तरह प्रतियोगिता के शुरुआती चरण से ही सुरुचि और कमलजीत ने अपने प्रदर्शन से संकेत दे दिया था कि वे पदक की मजबूत दावेदार हैं।
फाइनल में हालाँकि,रिकॉर्ड स्कोर को बनाए रखना आसान नहीं था। क्वालिफिकेशन में शानदार प्रदर्शन के बाद फाइनल में भी उसी स्तर की सटीकता और मानसिक मजबूती बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। भारतीय निशानेबाजों ने इस चुनौती का सामना करते हुए अपने शॉट्स पर ध्यान केंद्रित रखा। दोनों के बीच तालमेल ने उन्हें मुकाबले के महत्वपूर्ण चरणों में स्थिर प्रदर्शन करने में मदद की।
10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में पुरुष और महिला निशानेबाज एक साथ मिलकर टीम बनाते हैं। ऐसे मुकाबलों में व्यक्तिगत कौशल के साथ-साथ टीम के रूप में प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण होता है। एक निशानेबाज के प्रदर्शन के बाद दूसरे पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन सुरुचि और कमलजीत ने पूरे मुकाबले में संतुलन बनाए रखा। यही कारण रहा कि भारतीय टीम फाइनल के दौरान शीर्ष स्थान पर बनी रही।
भारत के लिए यह गोल्ड मेडल एशियाई खेलों में निशानेबाजी की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाने वाली उपलब्धि भी है। एशियाई स्तर पर भारतीय निशानेबाजों ने लंबे समय से पदक जीते हैं और इस बार भी भारतीय दल ने शुरुआत से ही प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी ने रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण जीतकर इस अभियान को और मजबूत किया है।
इस जीत के साथ भारतीय निशानेबाजी दल के खाते में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। फाइनल में 484.6 का एशियाई रिकॉर्ड स्कोर,क्वालिफिकेशन में 587 का रिकॉर्ड प्रदर्शन और गोल्ड मेडल—इन तीनों ने सुरुचि और कमलजीत के अभियान को खास बना दिया। नागोया में हासिल यह सफलता भारतीय निशानेबाजी के लिए एक यादगार अध्याय बन गई है।
