दक्षिण कोरिया में मतपत्रों की कमी का मामला गरमाया (तस्वीर क्रेडिट@forthefreedom25)

दक्षिण कोरिया में मतपत्रों की कमी का मामला गरमाया, 27 दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच संसदीय समिति ने किया मतगणना केंद्र का निरीक्षण

सोल,2 जुलाई (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया में हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों के दौरान सामने आई मतपत्रों की कमी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवालों और दोबारा चुनाव कराने की माँग के बीच संसद की विशेष जाँच समिति ने गुरुवार को उस मतगणना केंद्र का निरीक्षण किया,जहाँ चुनाव के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ,जब प्रदर्शनकारी पिछले 27 दिनों से दक्षिणी सोल स्थित ओलंपिक पार्क हैंडबॉल जिम्नेजियम के बाहर धरने पर बैठे हैं और मतपेटियों को परिसर से बाहर ले जाने का लगातार विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच नहीं हो जाती,तब तक मतपेटियों को किसी भी स्थिति में वहाँ से नहीं हटाया जाना चाहिए।

यह विवाद तीन जून को हुए स्थानीय चुनावों के बाद शुरू हुआ,जब देश के कई मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी की शिकायतें सामने आईं। कई स्थानों पर मतदान कुछ समय के लिए बाधित हो गया था,जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे। इसके बाद चुनाव दोबारा कराने की माँग को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। पाँच जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब लगातार जारी है और प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

गुरुवार को संसदीय विशेष समिति के सदस्य ओलंपिक पार्क हैंडबॉल जिम्नेजियम पहुँचे, जहाँ चुनाव के दौरान मतगणना केंद्र बनाया गया था। समिति के सदस्यों के पहुँचने से पहले ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्य प्रवेश द्वार पर एकत्र हो गए थे और उन्होंने परिसर की घेराबंदी कर रखी थी। उनका कहना था कि मतपेटियों को केवल विशेष जाँच वकील की टीम या अदालत के स्पष्ट आदेश के आधार पर ही बाहर ले जाया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने समिति के निरीक्षण का भी विरोध किया और परिसर में प्रवेश रोकने का प्रयास किया।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। समिति के सदस्यों को सुरक्षित तरीके से परिसर तक पहुँचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को प्रवेश द्वार से हटाया। इसके बाद समिति ने लगभग 40 मिनट तक मतगणना केंद्र का निरीक्षण किया और वहाँ मौजूद अधिकारियों से चुनाव प्रक्रिया तथा मतपत्रों के प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान समिति ने चुनाव के दिन अपनाई गई व्यवस्थाओं और मतगणना प्रक्रिया की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान स्टेडियम के बाहर तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। सुबह के समय कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। कुछ लोग समिति के प्रवेश का विरोध कर रहे थे,जबकि अन्य प्रदर्शनकारी परिसर की घेराबंदी जारी रखने पर अड़े रहे। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मौके पर करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

इस दौरान एक प्रदर्शनकारी के अचानक बेहोश होने की भी सूचना मिली। घटना के बाद तत्काल आपातकालीन चिकित्सा दल को मौके पर बुलाया गया और संबंधित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। हालाँकि,उसके बेहोश होने के कारणों की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने के बाद आगे की जांच की बात कही।

समिति ने मतगणना केंद्र के निरीक्षण से पहले सोंगपा जिला चुनाव आयोग का भी दौरा किया। वहाँ चुनाव अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को मतदान के दिन अपनाई गई व्यवस्थाओं,मतपत्रों के वितरण,उनके प्रबंधन और मतदान प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी। अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि चुनाव के दौरान किस प्रकार मतपत्रों की आपूर्ति की गई और किन परिस्थितियों में कुछ मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई।

संसदीय विशेष समिति का गठन स्थानीय चुनावों के दौरान सामने आई अनियमितताओं की जाँच के लिए किया गया है। समिति यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मतपत्रों की कमी किन कारणों से हुई,क्या इसमें किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही हुई या फिर चुनावी प्रक्रिया में किसी स्तर पर गंभीर त्रुटियाँ हुईं। समिति के सदस्य चुनाव आयोग के अधिकारियों,स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों से लगातार जानकारी जुटा रहे हैं ताकि पूरी घटना की निष्पक्ष जाँच की जा सके।

समिति के अधिकारियों ने पहले ही घोषणा की थी कि वह इस सप्ताह अपना पहला स्थल निरीक्षण करेगी। इसी क्रम में गुरुवार सुबह हुई बैठक में सोंगपा जिला चुनाव आयोग और ओलंपिक पार्क हैंडबॉल जिम्नेजियम के निरीक्षण की योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई। अधिकारियों के अनुसार यह निरीक्षण मतदान और मतगणना प्रक्रिया की गहन जाँच का हिस्सा है और इसके आधार पर आगे की जाँच को दिशा दी जाएगी।

समिति ने यह भी बताया कि दूसरा स्थल निरीक्षण पहले अगले बुधवार को प्रस्तावित था, लेकिन अब उसे एक दिन पहले मंगलवार को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। हालाँकि,दूसरे निरीक्षण का स्थान अभी तय नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अगले निरीक्षण का स्थान निर्धारित किया जाएगा।

स्थानीय चुनावों के बाद से दक्षिण कोरिया में चुनावी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई नागरिक संगठनों ने मतपत्रों की कमी को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है और पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदान के दौरान हुई गड़बड़ियों ने चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं,इसलिए मामले की पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतपत्रों की कमी कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही सीमित थी और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले सभी तथ्यों की जाँच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि मतदान के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत सामने आती है,तो उसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। यही कारण है कि दक्षिण कोरिया की संसद ने इस पूरे मामले की जाँच के लिए विशेष समिति का गठन किया है।

फिलहाल प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को जारी रखने के पक्ष में हैं और उनका कहना है कि जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती तथा पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती,तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर संसदीय विशेष समिति लगातार साक्ष्य जुटाने और विभिन्न स्थानों का निरीक्षण करने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में समिति की जाँच और उसके निष्कर्ष यह तय करेंगे कि मतपत्रों की कमी का वास्तविक कारण क्या था और चुनावी प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई थी या नहीं।