वाशिंगटन,22 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर गहरी खाई दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीति को लेकर अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। डेमोक्रेट नेताओं ने इस संघर्ष को गैरकानूनी करार देते हुए अमेरिकी सैनिकों की तत्काल वापसी की माँग की है,जबकि रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए आवश्यक बताया है। इस विवाद ने न केवल अमेरिकी संसद में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है, बल्कि देश में युद्ध की दिशा और सरकार की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेट्स के नेता चक शूमर ने राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की वास्तविक संख्या जनता से छिपा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस संघर्ष को शांति की दिशा में उठाया गया कदम बताने की कोशिश कर रहा है,जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उनके अनुसार युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं,लेकिन उनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व है कि वह जनता के सामने युद्ध से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पारदर्शिता के साथ रखे,लेकिन वर्तमान प्रशासन ऐसा करने में विफल रहा है।
चक शूमर ने डेमोक्रेट सांसदों की बैठक के बाद कहा कि उनकी पार्टी इस सप्ताह सीनेट में एक बार फिर मतदान कराने की तैयारी कर रही है,ताकि अमेरिका की इस युद्ध में भागीदारी को समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस संघर्ष को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाना चाहिए। उनके अनुसार युद्ध में अब तक 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं,लेकिन इनमें से लगभग 100 सैनिकों के घायल होने की जानकारी पेंटागन ने सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से नहीं,बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप को राजनीतिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से छिपाई गई।
डेमोक्रेट नेता ने कहा कि अब तक लगभग 20 अमेरिकी सैनिक इस संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब देश के सैनिक युद्ध में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं,तब सरकार का कर्तव्य है कि वह उनके परिवारों और देश की जनता को पूरी सच्चाई बताए। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह युद्ध की वास्तविक कीमत और उसके मानवीय प्रभाव को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहा है,जिससे जनता को भ्रमित किया जा सके।
इस बीच डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने भी राष्ट्रपति ट्रंप की युद्ध नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने जानकारी दी कि युद्ध में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर बुधवार को डोवर,डेलावेयर लाए जाएँगे। इसके साथ ही इस संघर्ष में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 18 तक पहुँच जाएगी। उन्होंने इस युद्ध को “पसंद से शुरू किया गया युद्ध” बताते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही इसे गैरकानूनी घोषित कर चुकी है और अब इस संघर्ष को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
टिम केन ने कहा कि कांग्रेस को रक्षा बजट के माध्यम से इस युद्ध के लिए उपलब्ध कराई जा रही अतिरिक्त फंडिंग पर रोक लगानी चाहिए। उनके अनुसार यदि कोई युद्ध कानूनी आधार पर नहीं लड़ा जा रहा है,तो उसके लिए अमेरिकी करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च करना उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि पेंटागन को तब तक अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराया जाना चाहिए,जब तक वह कांग्रेस और जनता के सामने युद्ध से जुड़ी पूरी जानकारी पारदर्शी ढंग से प्रस्तुत नहीं करता।
डेमोक्रेट नेताओं का मानना है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार कांग्रेस की अनुमति के बिना लंबे समय तक किसी सैन्य अभियान को जारी रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के अधिकार जरूर प्राप्त हैं, लेकिन व्यापक युद्ध संचालन और उसके लिए लगातार वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कांग्रेस की स्पष्ट स्वीकृति आवश्यक होती है। इसी आधार पर डेमोक्रेट पार्टी युद्ध समाप्त करने और सैनिकों की वापसी की माँग को लगातार आगे बढ़ा रही है।
दूसरी ओर रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों का मजबूती से बचाव किया है। सीनेट में रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने कहा कि राष्ट्रपति ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की है और उनका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्धविराम का सम्मान नहीं किया और बातचीत की दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी बाधित कर रखी है,जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
जॉन थ्यून ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना है,ताकि वह दोबारा बातचीत की मेज पर लौटे और क्षेत्र में तनाव कम हो सके। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका इस समय पीछे हटता है,तो इससे ईरान को गलत संदेश जाएगा और वह अपनी आक्रामक गतिविधियों को और बढ़ा सकता है। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अमेरिका को मजबूती के साथ अपनी स्थिति बनाए रखनी चाहिए।
जब जॉन थ्यून से पूछा गया कि क्या अतिरिक्त युद्ध फंडिंग को मंजूरी देने से पहले प्रशासन को कांग्रेस के सामने अधिक विस्तृत जानकारी रखनी चाहिए,तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस को खर्च की स्वीकृति देने का पूरा अधिकार प्राप्त है और प्रशासन आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त फंडिंग की माँग केवल ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान तक सीमित नहीं है।
उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान बड़ी मात्रा में हथियारों और गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ है,जिसकी भरपाई करना भी आवश्यक है। इसी कारण प्रशासन ने अतिरिक्त बजट की मांग की है। उनके अनुसार इस राशि का उपयोग केवल सैन्य अभियान चलाने के लिए नहीं,बल्कि अमेरिका की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाए रखने के लिए भी किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिकांश रिपब्लिकन सीनेटर इस प्रस्ताव का समर्थन करेंगे, हालाँकि,कुछ सांसदों ने बजट की कुल राशि और उसके उपयोग को लेकर सवाल जरूर उठाए हैं।
सीनेट में जारी यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय सामने आया है जब युद्ध के मानवीय और आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक ओर डेमोक्रेट पार्टी सरकार से जवाबदेही,पारदर्शिता और सैनिकों की सुरक्षित वापसी की माँग कर रही है,वहीं दूसरी ओर रिपब्लिकन नेतृत्व का कहना है कि इस समय पीछे हटना अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। दोनों दलों के बीच यह मतभेद केवल युद्ध की वैधता तक सीमित नहीं है,बल्कि इस बात पर भी केंद्रित है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में राष्ट्रपति और कांग्रेस की भूमिका क्या होनी चाहिए।
आने वाले दिनों में सीनेट में प्रस्तावित मतदान इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि डेमोक्रेट्स युद्ध समाप्त करने के प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन दिलाने में सफल होते हैं,तो ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि रिपब्लिकन बहुमत के दम पर अतिरिक्त फंडिंग और प्रशासन की नीति का समर्थन जारी रखते हैं,तो ईरान के साथ अमेरिका का सैन्य अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल अमेरिकी राजनीति में ईरान युद्ध सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और इस पर होने वाली हर संसदीय कार्रवाई पर देश के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
