अशोक सिद्धार्थ (तस्वीर क्रेडिट@sanjayy90603029)

बसपा में सियासी घमासान के बीच अशोक सिद्धार्थ का बड़ा ऐलान,राजनीति और सामाजिक जीवन से लिया संन्यास

लखनऊ,10 सितंबर (युआईटीवी)- बहुजन समाज पार्टी में इन दिनों जारी सियासी उठापटक के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो मायावती को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पत्र जारी किया। अपने पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति सम्मान और निष्ठा जताते हुए कहा कि उनके लिए मायावती का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उन पर पार्टी के हितों के खिलाफ काम करने और आकाश आनंद को गुमराह करने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने पत्र में कहा कि पिछले 35 वर्षों से उनका जीवन बहुजन समाज पार्टी, मान्यवर कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताते हुए कहा कि उन्होंने उनके जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता को बहुत कुछ दिया। उनके मुताबिक, मायावती की वजह से ही वह विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुँच सके और उन्हें पार्टी परिवार का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि मायावती का यह ऋण वह अपने जीवन में कभी चुका नहीं सकते। उनके लिए पार्टी और उसका मिशन केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में मायावती के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराते हुए कहा कि उनके आदेश के सामने उनके रिश्ते, नाते और परिवार तक छोटे हैं।

अशोक सिद्धार्थ ने तथागत भगवान गौतम बुद्ध और कांशीराम की कसम का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी बहुजन समाज पार्टी के हितों के खिलाफ कोई काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि मायावती के खिलाफ कुछ करने के बारे में वह सपने में भी नहीं सोच सकते। उनके इस बयान को उन आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिनमें उन पर पार्टी के भीतर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और नेतृत्व के खिलाफ गतिविधियां करने के आरोप लगाए जा रहे थे।

दरअसल, पार्टी के भीतर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। उन पर आरोप लगाए जा रहे थे कि वह पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं। इन आरोपों पर सफाई देते हुए अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि आकाश आनंद को सलाह देना तो दूर,पिछले कई महीनों से उनकी उनसे मुलाकात भी बेहद सीमित रही है।

उन्होंने अपने पत्र में बताया कि पिछले कुछ महीनों में आकाश आनंद से उनकी मुलाकात केवल कुछ अवसरों पर हुई, जब चुनावी राज्यों में उनके कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों की जिम्मेदारी स्वयं मायावती ने उन्हें दी थी। ऐसे में आकाश आनंद को गुमराह करने या उन्हें किसी तरह की राजनीतिक सलाह देने के आरोपों में कोई आधार नहीं है।

अशोक सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ लोग उन्हें मिले सम्मान की वजह से उन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन आरोपों में लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है और यह उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं और उनके खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

अपने पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने अपने संन्यास के फैसले को आकाश आनंद की पार्टी में संभावित वापसी से जोड़कर नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद उनके दामाद होने से पहले मायावती के भतीजे और आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके मुताबिक, आकाश आनंद ने अपने जीवन के दो दशक मायावती की छत्रछाया में बिताए हैं। ऐसे में उनके जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता के लिए आकाश आनंद को गुमराह करना संभव ही नहीं है।

अशोक सिद्धार्थ ने लिखा कि आकाश आनंद ने लंबे समय तक मायावती के मार्गदर्शन में राजनीति और संगठन को समझा है। इसलिए उन पर यह आरोप लगाना कि उन्होंने आकाश आनंद को गुमराह किया,उचित नहीं है। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने और आकाश आनंद के बीच राजनीतिक समीकरण को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सफाई देने की कोशिश की।

अपने पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की राजनीतिक भूमिका और उनके त्याग की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मायावती स्वयं त्याग और दया की मूर्ति हैं। उनके मुताबिक, जब समाज के हित की बात आई तो मायावती ने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा सदस्य के पद तक को छोड़ने में संकोच नहीं किया। उन्होंने मायावती को केवल अपना मार्गदर्शक ही नहीं,बल्कि अपना आदर्श भी बताया।

इसके बाद उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि यदि मायावती को लगता है कि उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने से संतों,गुरुओं और महापुरुषों द्वारा बनाए गए बहुजन मिशन को नुकसान पहुँच रहा है, तो वह इसी वक्त राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन मायावती का ऋणी है और ऐसे में संन्यास लेना उनके लिए बहुत छोटी चीज है।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने पत्र के अंत में मायावती के प्रति अपनी निष्ठा को बेहद भावुक शब्दों में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अगर कभी मायावती के लिए उन्हें अपनी जान भी देनी पड़े तो वह इसे अपने लिए गर्व की बात मानेंगे। उनके इस बयान से साफ है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए खुद को अब भी मायावती और बहुजन आंदोलन के प्रति पूरी तरह समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पेश करना चाहते हैं।

अशोक सिद्धार्थ के इस ऐलान से कुछ घंटे पहले ही मायावती ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर टिप्पणी की थी। मायावती ने कहा था कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनंद और बहुजन समाज पार्टी के आंदोलन की सही तरीके से परवाह नहीं की। उन्होंने कहा था कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी और समाज के सामने त्याग तथा कुर्बानी की मिसाल पेश करनी चाहिए थी, लेकिन इसके ठीक विपरीत स्थिति सामने आई।

मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा था कि बहुजन समाज पार्टी और उसके आंदोलन के हित को ध्यान में रखने के साथ-साथ उनके परिवार और आकाश आनंद के भविष्य को देखते हुए अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी एक अवसर है। उन्होंने उनसे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का त्याग करने और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की बात कही थी।

मायावती के मुताबिक,यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से अलग हो जाते हैं,तो इससे आकाश आनंद के लिए पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करना संभव हो सकेगा। उन्होंने संकेत दिया था कि ऐसी स्थिति बनने पर पार्टी आकाश आनंद को भविष्य में जिम्मेदारियाँ वापस देने के मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। मायावती के इस बयान के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और तेज हो गई थी।

अब अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान को इसी घटनाक्रम की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में बार-बार यह स्पष्ट किया कि उनके लिए मायावती का आदेश सर्वोच्च है। साथ ही,उन्होंने यह भी बताने की कोशिश की कि उन्होंने पार्टी के हितों के खिलाफ कभी कोई कदम नहीं उठाया और न ही आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की।

अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और विधान परिषद तथा राज्यसभा में भी सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में उनका अचानक राजनीति और सामाजिक जीवन से पूरी तरह अलग होने का ऐलान पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में फिलहाल आकाश आनंद की पार्टी में भूमिका और भविष्य भी बना हुआ है। मायावती के बयान से यह संकेत मिला था कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक रूप से अलग होने की स्थिति में आकाश आनंद को पार्टी में फिर से जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है। वहीं,अशोक सिद्धार्थ ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनके संन्यास को केवल आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

बहुजन समाज पार्टी के भीतर चल रहे इस घटनाक्रम ने पार्टी की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। हालाँकि,अशोक सिद्धार्थ ने अपने पत्र के जरिए विवाद को समाप्त करने और मायावती के प्रति अपनी निष्ठा स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन से दूरी बनाने का फैसला लेते हुए गेंद अब पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के पाले में डाल दी है।

अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद बहुजन समाज पार्टी की आंतरिक स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है और आकाश आनंद को लेकर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला करता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से अलग होने का ऐलान एक बड़ा घटनाक्रम बनकर सामने आया है।