कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के विजेताओं का दिल्ली में भव्य स्वागत (तस्वीर क्रेडिट@OPDhankar)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के विजेताओं का दिल्ली में भव्य स्वागत,खिलाड़ियों ने कहा- यह सम्मान नई जिम्मेदारी और बड़े सपनों की शुरुआत

नई दिल्ली,4 अगस्त (युआईटीवी)- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाली भारतीय टीम का मंगलवार को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य और भावनात्मक स्वागत किया गया। स्वर्ण,रजत और कांस्य पदकों के साथ स्वदेश लौटे खिलाड़ियों के सम्मान में हवाई अड्डे का माहौल उत्सव में बदल गया। बड़ी संख्या में खेल प्रेमी,परिवार के सदस्य,विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, अधिकारी और समर्थक खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए पहले से ही वहाँ मौजूद थे। ढोल-नगाड़ों की गूँज,तिरंगे झंडों की लहराती कतारें,फूल-मालाओं की खुशबू और भारत माता के जयघोष के बीच खिलाड़ियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया गया। खिलाड़ियों ने भी मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार किया और इस सम्मान को अपने जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बताया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहे। भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अनेक पदक जीते और यह साबित कर दिया कि देश अब विश्व खेल मंच पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विशेष रूप से मुक्केबाजी और पैरा एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया,उसने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। यही कारण था कि खिलाड़ियों की घर वापसी किसी विजयोत्सव से कम नहीं दिखाई दी।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह से ही खिलाड़ियों के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई थीं। परिवारों के चेहरों पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था,जबकि युवा खेल प्रेमी अपने पसंदीदा खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही भारतीय दल हवाई अड्डे से बाहर निकला, पूरा परिसर तालियों और नारों से गूँज उठा। कई समर्थकों ने खिलाड़ियों को फूल-मालाएँ पहनाईं और उन्हें मिठाइयाँ खिलाकर जीत की बधाई दी। इस पूरे माहौल ने यह संदेश दिया कि देश अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का सम्मान करना जानता है।

इस अवसर पर बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने भारतीय मुक्केबाजी के लिए इस उपलब्धि को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 वर्षों के इतिहास में पहली बार भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके अनुसार,यह केवल पदकों की संख्या का रिकॉर्ड नहीं है,बल्कि भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत और व्यवस्थित तैयारी का प्रमाण भी है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे खिलाड़ियों की अथक मेहनत,कोचों का समर्पण,वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धति और विभिन्न संस्थाओं का निरंतर सहयोग शामिल है।

अजय सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मुक्केबाजी के क्षेत्र में जिस तरह का विकास किया है,वह अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुक्केबाज अब केवल भाग लेने नहीं जाते,बल्कि स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ रिंग में उतरते हैं। यही सोच भारतीय मुक्केबाजी को नई ऊँचाइयों तक ले जा रही है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों,प्रशिक्षकों,सहयोगी स्टाफ,भारतीय खेल प्राधिकरण और अन्य संस्थाओं को इस सफलता के लिए बधाई दी।

स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर मिले सम्मान को अपने जीवन का सबसे भावुक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को अपने स्वागत के लिए खड़ा देखा तो उनकी आँखें नम हो गईं। साक्षी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं,बल्कि पूरे देश का है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार,बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और हरियाणा सरकार ने खिलाड़ियों को हर स्तर पर आवश्यक सुविधाएँ और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया,जिसके कारण वे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकीं।

साक्षी ने कहा कि स्वर्ण पदक जीतने का सपना उन्होंने बचपन से देखा था,लेकिन देश लौटने पर जिस तरह लोगों ने उनका स्वागत किया,उसने इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया। उन्होंने अपना पदक देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि यही प्यार और विश्वास उन्हें आगे भी कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उनका लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं,बल्कि भारत को विश्व मुक्केबाजी की अग्रणी शक्तियों में शामिल करना है।

साक्षी चौधरी के परिवार के लिए भी यह अवसर बेहद भावुक रहा। उनके दादा सतपाल सिंह ने कहा कि अपनी पोती को देश के लिए स्वर्ण पदक जीतते देखना उनके जीवन का सबसे गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और यदि युवा खिलाड़ी ईमानदारी,अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत करें,तो वे भी विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।

साक्षी की भाभी प्रिया ने बताया कि जब फाइनल मुकाबले में साक्षी ने जीत हासिल की तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य लगातार उनके मुकाबले देख रहे थे और स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूरे घर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। उन्होंने कहा कि अब सभी बेसब्री से साक्षी के घर पहुँचने और उनके साथ इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने का इंतजार कर रहे हैं।

भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी टीम के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल ने जिस तरह का प्रदर्शन किया,वह आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि देश लौटने पर मिला सम्मान खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है। उनके अनुसार,जब खिलाड़ी देखते हैं कि पूरा देश उनकी मेहनत की सराहना कर रहा है,तो वे और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित होते हैं।

प्रीति पवार ने भारतीय सेना और भारत सरकार द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ,उच्च स्तर की कोचिंग,पोषण और वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है,जिससे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर शुरू होगा, जिसमें एशियन गेम्स और अन्य बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी की जाएगी। उनका कहना था कि भारतीय खिलाड़ी अब किसी भी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

स्वर्ण पदक विजेता अरुंधति चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना,आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस को दिया। उन्होंने कहा कि सेना ने उन्हें केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि अनुशासन,मानसिक मजबूती और देशभक्ति की भावना भी दी है। उन्होंने कहा कि सेना का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी के रूप में उनके भीतर देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

अरुंधति ने कहा कि पहले उनका लक्ष्य केवल भारत का प्रतिनिधित्व करना था,लेकिन अब एक सैनिक होने के नाते उनके कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य उज्बेकिस्तान में होने वाला विश्व कप है और वे पूरी लगन के साथ उसकी तैयारी करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय मुक्केबाजी आने वाले वर्षों में और अधिक सफल होगी।

पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सफलता अचानक नहीं मिलती। इसके लिए महीनों और वर्षों की तैयारी करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए वे आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण लेते हैं,जबकि अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी भारतीय खेल प्राधिकरण और बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा पटियाला में आयोजित विशेष शिविरों में कराई जाती है। उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स पर है और वे वहाँ स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ तैयारी करेंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पैरा एथलीटों का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। पुरुषों की शॉट पुट एफ-57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले सोमन राणा ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं,बल्कि पूरे देश की जीत है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना,प्रशिक्षकों और परिवार के सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो सकता था। उन्होंने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

महिलाओं की शॉट पुट एफ-57 स्पर्धा की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खिलाड़ियों को दी जा रही सुविधाओं और समर्थन का परिणाम अब अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इसी प्रकार सहयोग मिलता रहा तो भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में और अधिक सफल होंगे।

पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने कहा कि भारत खेलों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के बाद से भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है। उनके अनुसार,अब भारत केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पैरा खेलों में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत पदकों की संख्या के मामले में दुनिया की प्रमुख खेल शक्तियों को कड़ी चुनौती देगा।

पुरुषों की शॉट पुट स्पर्धा में पदक जीतने वाले शुभम जुयाल ने कहा कि देश के लिए पदक जीतना हर खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना होता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कई महत्वपूर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गर्व का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि चार वर्ष बाद कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में आयोजित होंगे और यह भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा। घरेलू मैदान पर खेलने का अनुभव अलग होता है और सभी खिलाड़ी अभी से उस चुनौती के लिए तैयारी शुरू करेंगे।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि देश में खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है। खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण,अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ,वैज्ञानिक सहयोग और बेहतर खेल प्रबंधन मिलने से उनके प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार आया है। यही कारण है कि भारत अब केवल कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि विभिन्न विधाओं में लगातार पदक जीत रहा है।

भारतीय खिलाड़ियों की इस सफलता ने देशभर के युवाओं में भी नई ऊर्जा का संचार किया है। खेलों को करियर के रूप में अपनाने वाले युवाओं के लिए इन खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। खिलाड़ियों ने भी अपने संदेश में यही कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं,बल्कि निरंतर मेहनत,अनुशासन और धैर्य से मिलती है।

दिल्ली में हुआ यह भव्य स्वागत केवल खिलाड़ियों के सम्मान का आयोजन नहीं था, बल्कि यह उस बदलते भारत की तस्वीर भी थी,जहाँ खेलों को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा जा रहा है। एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि आज देश अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को उसी उत्साह के साथ स्वीकार कर रहा है,जैसे किसी राष्ट्रीय उत्सव को मनाया जाता है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक खेल मंच पर और अधिक मजबूत दावेदारी पेश करेगा। खिलाड़ियों का आत्मविश्वास,बेहतर खेल संरचना,सरकारी सहयोग और जनता का बढ़ता समर्थन मिलकर भारतीय खेलों के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं। अब सभी की निगाहें एशियन गेम्स,विश्व चैंपियनशिप और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं,जहाँ यही खिलाड़ी एक बार फिर तिरंगे को ऊँचा लहराने और भारत को नई उपलब्धियाँ दिलाने के इरादे के साथ मैदान में उतरेंगे।