तेहरान/लंदन, 22 अप्रैल (युआईटीवी)- ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर कथित फायरिंग और हस्तक्षेप की घटना ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है,जब पहले से ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर कई देश सतर्क हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि उसकी सेना ने यह कार्रवाई समुद्री कानून के तहत की है। एजेंसी के मुताबिक,जिस जहाज पर कार्रवाई की गई,उसने बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी की थी,जिसके बाद मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
दूसरी ओर,यूनाइटेड किंगडम की समुद्री व्यापार निगरानी संस्था ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उसे ओमान के उत्तर-पूर्व में लगभग 15 नॉटिकल मील दूरी पर एक कंटेनर जहाज से जुड़ी घटना की सूचना मिली थी। संस्था के अनुसार,जहाज के कप्तान ने जानकारी दी कि एक सशस्त्र गनबोट जहाज के करीब आई और उस पर फायरिंग की गई। इस हमले में जहाज के ब्रिज, यानी नियंत्रण कक्ष को नुकसान पहुँचा,हालाँकि,राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि या आग लगने की खबर नहीं है और सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं।
घटना को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी सावधानी बरतते हुए कहा है कि अभी इसकी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके बावजूद यह स्पष्ट है कि ओमान के आसपास का समुद्री क्षेत्र,खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य,वैश्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है,जिसका मुख्य कारण ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। विशेष रूप से अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों के चलते स्थिति और जटिल हो गई है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
हाल ही में भारतीय झंडे वाले जहाजों को भी इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ा था,जिसमें गनबोट्स के जरिए हस्तक्षेप की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी चिंता जाहिर की थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार,विदेश सचिव ने संबंधित देश के राजनयिक से मुलाकात कर भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी फिक्र व्यक्त की थी और इस तरह की घटनाओं को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहतीं,बल्कि इनका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ता है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा में किसी भी तरह की कमी या तनाव से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की घटनाओं पर करीबी नजर रखी जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किन उपायों की आवश्यकता है। खासकर ऐसे समय में,जब भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है,समुद्री सुरक्षा को लेकर समन्वित प्रयासों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।
ओमान के तट के पास हुई यह घटना न केवल एक सुरक्षा चुनौती के रूप में सामने आई है, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना कितना जरूरी है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है,लेकिन फिलहाल यह घटना वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है।
