नई दिल्ली,22 सितंबर (युआईटीवी)- गुजरात के एकता नगर में मंगलवार को भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु वर्ष 2024 में भारतीय सिनेमा की उपलब्धियों और उत्कृष्ट योगदान के लिए फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं और तकनीशियनों को सम्मानित करेंगी। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के इतिहास में यह पहला अवसर है,जब इसका आयोजन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचाने की दिशा में यह पहल की है।
इस वर्ष समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण दादा साहब फाल्के पुरस्कार रहेगा। कन्नड़ सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पाँच दशक से अधिक लंबे अपने फिल्मी करियर में अनंत नाग ने कन्नड़ सिनेमा के साथ-साथ भारतीय फिल्म जगत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार ने इसी महीने दादा साहब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश के आधार पर उनके नाम की घोषणा की थी। उनके लंबे और बहुआयामी फिल्मी सफर को देखते हुए यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके योगदान की विशेष पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। तब से यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में रचनात्मकता, उत्कृष्टता और अलग-अलग भाषाओं तथा क्षेत्रों के योगदान को सम्मानित करने का प्रमुख माध्यम बना हुआ है। फीचर फिल्मों के साथ-साथ नॉन-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों को भी इन पुरस्कारों के माध्यम से सम्मान दिया जाता है। देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना इन पुरस्कारों की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा है।
वर्ष 2024 में रिलीज हुई फिल्मों को लेकर घोषित पुरस्कारों में कई चर्चित और सफल फिल्मों का नाम शामिल है। ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया है। फिल्म को राष्ट्रीय महत्व से जुड़े विषय को केंद्र में रखकर कहानी प्रस्तुत करने के लिए दर्शकों और फिल्म समीक्षकों से प्रतिक्रिया मिली थी। वहीं ‘भंगार’ को सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया जाएगा। ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के पुरस्कार के लिए चुना गया है।
अभिनय के क्षेत्र में भी इस वर्ष कई बड़े नाम सम्मानित होंगे। मलयालम अभिनेता ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए इसी श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा। दोनों अभिनेताओं ने अपनी-अपनी फिल्मों में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं और उनके अभिनय को पुरस्कार के लिए चुना गया है। मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए मिलेगा।
निर्देशन के क्षेत्र में तमिल फिल्म ‘अमरन’ के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार दिया जाएगा। यह फिल्म भारतीय सेना के अधिकारी मेजर मुकुंद वरदराजन के जीवन और उनके सैन्य सफर पर आधारित है। फिल्म ने कहानी, निर्देशन और भावनात्मक प्रस्तुति के स्तर पर विशेष पहचान बनाई। वहीं अभिनेता रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का पुरस्कार मिलेगा। इस फिल्म के निर्देशन के साथ रणदीप हुड्डा ने अपने करियर में एक नए क्षेत्र में कदम रखा।
लोकप्रिय और बड़े बजट की फिल्मों को भी इस वर्ष राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। प्रभास और दीपिका पादुकोण सहित बड़े कलाकारों वाली फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ को बेहतरीन मनोरंजन देने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म के पुरस्कार के लिए चुना गया है। विज्ञान-कथा और भारतीय पौराणिक संदर्भों को आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ जोड़ने वाली इस फिल्म ने देश और विदेश में दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था।
‘कैप्टन मिलर’ को राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मिलेगा। फिल्म की कहानी और उसके विषय ने सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों को सामने रखा। इसके अलावा अलग-अलग श्रेणियों में ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘स्त्री 2’ जैसी लोकप्रिय फिल्मों को भी सम्मान मिला है। इससे इस वर्ष के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों और विषय आधारित सिनेमा दोनों की मौजूदगी दिखाई देती है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की एक खास विशेषता यह भी है कि इनमें देश की विभिन्न भाषाओं के सिनेमा को स्थान मिलता है। इस वर्ष मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली जैसी भाषाओं की फिल्मों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान दिया गया है। इससे भारतीय सिनेमा की विविधता एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर दिखाई देगी।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष के पुरस्कार समारोह में संथाली सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज होगी। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के इतिहास में पहली बार किसी संथाली फिल्म को नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा। यह उपलब्धि न केवल संथाली फिल्म जगत के लिए महत्वपूर्ण है,बल्कि देश की क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं में बनने वाले सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस बार पुरस्कार समारोह के आयोजन स्थल में बदलाव भी चर्चा का प्रमुख विषय है। अब तक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में होता रहा है, लेकिन 72वें संस्करण को गुजरात के एकता नगर में आयोजित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भविष्य में भी इस प्रतिष्ठित समारोह को अलग-अलग राज्यों और शहरों तक ले जाने की दिशा में पहल की है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को केवल एक सरकारी समारोह के रूप में सीमित रखने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को भारतीय सिनेमा के इस बड़े आयोजन से जोड़ना है।
मंत्रालय का मानना है कि पुरस्कार समारोह को अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित करने से भारतीय सिनेमा की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता को और अधिक प्रमुखता मिलेगी। भारत में फिल्म निर्माण केवल कुछ बड़े फिल्म केंद्रों तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों पर आधारित फिल्मों का निर्माण होता है। ऐसे में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को अलग-अलग स्थानों तक ले जाने से इन क्षेत्रों के फिल्मकारों और दर्शकों को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
एकता नगर में होने वाले समारोह में फिल्म जगत से जुड़े कई प्रमुख कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, तकनीशियनों और अन्य पेशेवरों के शामिल होने की उम्मीद है। वर्ष 2024 की फिल्मों को सम्मानित करने वाला यह समारोह एक तरफ भारतीय सिनेमा की रचनात्मक उपलब्धियों को सामने रखेगा, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित हो रही फिल्मी परंपराओं और भाषाई विविधता को भी रेखांकित करेगा।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए अनंत नाग का सम्मान विशेष आकर्षण रहेगा। पाँच दशक से अधिक लंबे करियर के बाद उन्हें दिया जा रहा यह सम्मान कन्नड़ सिनेमा और उनके व्यापक फिल्मी योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा। इसके साथ ही अभिनय, निर्देशन, लोकप्रिय सिनेमा, नॉन-फीचर फिल्म और डॉक्यूमेंट्री सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले पुरस्कार वर्ष 2024 के भारतीय सिनेमा की विविध उपलब्धियों को सामने लाएँगे।
इस तरह 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं रहेगा,बल्कि भारतीय सिनेमा की भाषाई, सांस्कृतिक और रचनात्मक विविधता का उत्सव भी बनेगा। गुजरात में पहली बार आयोजित हो रहा यह समारोह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के आयोजन की परंपरा में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी में होने वाले इस समारोह में भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों और रचनाकारों को सम्मान मिलेगा, जिन्होंने वर्ष 2024 में अपने काम के जरिए फिल्म जगत में उल्लेखनीय योगदान दिया।
