डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम

गुरमीत राम रहीम को फिर मिली पैरोल,16वीं बार जेल से बाहर आने पर उठे नए सवाल

रोहतक,26 मई (युआईटीवी)- डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार द्वारा 30 दिनों की पैरोल मंजूर किए जाने के बाद मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा हुआ। गुरमीत राम रहीम के जेल से बाहर आते ही एक बार फिर उसकी बार-बार मिलने वाली पैरोल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं,जबकि प्रशासन का कहना है कि पैरोल पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत दी गई है।

जानकारी के अनुसार गुरमीत राम रहीम मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 34 मिनट पर सुनारिया जेल से बाहर निकला। इस दौरान जेल परिसर के बाहर सामान्य स्थिति देखने को मिली और सुरक्षा व्यवस्था भी पहले की तुलना में काफी सीमित दिखाई दी। हालाँकि,प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है,ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम अगस्त 2017 से जेल में बंद है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो की विशेष अदालत ने उसे दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराते हुए 10-10 साल यानी कुल 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा वह पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या और डेरा सच्चा सौदा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामलों में भी सजा काट रहा है। इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था और अदालत के फैसले के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा भी देखने को मिली थी।

यह 16वीं बार है,जब गुरमीत राम रहीम पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है। इससे पहले भी वह 15 बार विभिन्न अवधियों के लिए जेल से बाहर आ चुका है। इसी वर्ष जनवरी महीने में उसे 40 दिनों की पैरोल मिली थी,जिसके बाद वह 15 फरवरी को वापस सुनारिया जेल लौटा था। पिछले कुछ वर्षों में लगातार उसे पैरोल और फरलो मिलने के कारण यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।

विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि हरियाणा और पंजाब की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा के प्रभाव को देखते हुए गुरमीत राम रहीम को बार-बार राहत दी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या उत्तर भारत के कई राज्यों में काफी बड़ी है और चुनावी राजनीति में उसका असर देखा जाता रहा है। यही कारण है कि हर बार जब राम रहीम को पैरोल मिलती है,तो विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठाने लगता है।

हालाँकि,प्रशासन और सरकार की ओर से हमेशा यही कहा गया है कि पैरोल पूरी तरह जेल नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि पैरोल देने का निर्णय नियमों के तहत कैदी के आचरण और अन्य कानूनी मानकों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। प्रशासन का दावा है कि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।

जानकारी के मुताबिक,गुरमीत राम रहीम अपनी पैरोल अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश के बागपत जिले स्थित डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में रह सकता है। पहले भी अधिकांश पैरोल अवधि में वह वहीं ठहरता रहा है। इस दौरान उसके सार्वजनिक कार्यक्रमों और गतिविधियों पर कुछ शर्तें लागू रहती हैं। प्रशासन की ओर से उस पर नजर भी रखी जाती है,ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।

डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में स्थित है और इसके अनुयायी हरियाणा,पंजाब,राजस्थान,उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में बड़ी संख्या में मौजूद हैं। संगठन लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है,लेकिन गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सामने आए आपराधिक मामलों के बाद इसकी छवि पर गंभीर असर पड़ा।

2017 में जब गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया गया था,तब पंचकूला समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। उसके समर्थकों ने आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया था,जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। उस समय प्रशासन को हालात नियंत्रित करने के लिए सेना तक बुलानी पड़ी थी। यही वजह है कि हर बार उसकी रिहाई या पैरोल के दौरान प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरतता है।

गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सबसे चर्चित मामला दो साध्वियों के यौन शोषण का था। यह मामला उस समय सामने आया,जब एक गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य अधिकारियों को भेजा गया था,जिसमें डेरा प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। बाद में जाँच के दौरान आरोप सही पाए गए और अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी अदालत ने उसे दोषी माना। रामचंद्र छत्रपति ने अपने समाचार पत्र में डेरा से जुड़े विवादों और आरोपों को प्रकाशित किया था। इसके बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने इस मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाई।

डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्या मामले में भी गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया गया। आरोप था कि रणजीत सिंह को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्हें डेरा से जुड़े कई संवेदनशील मामलों की जानकारी थी। इन सभी मामलों ने डेरा सच्चा सौदा और उसके प्रमुख को राष्ट्रीय स्तर पर विवादों के केंद्र में ला दिया था।

अब एक बार फिर उसकी पैरोल को लेकर बहस तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को बार-बार राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। वहीं कुछ लोग यह भी कहते हैं कि यदि कानून के तहत पैरोल का प्रावधान है,तो उसका लाभ किसी भी कैदी को मिल सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी यह मुद्दा हरियाणा और पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है। डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव खासतौर पर ग्रामीण और कुछ सीमावर्ती इलाकों में काफी मजबूत माना जाता है,जहाँ उसके अनुयायी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

फिलहाल गुरमीत राम रहीम के जेल से बाहर आने के बाद प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा एजेंसियाँ यह सुनिश्चित करने में लगी हैं कि किसी प्रकार की भीड़भाड़ या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो। वहीं उसकी पैरोल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी लगातार जारी है,जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।