वाशिंगटन,6 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर तक पहुँचता दिखाई दे रहा है,जहाँ डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव अब खुली चेतावनियों और संभावित सैन्य कार्रवाई तक पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त अल्टीमेटम देते हुए सोमवार तक की समयसीमा तय कर दी है,जिसके बाद हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसने होर्मुज स्ट्रेट को “तुरंत” नहीं खोला,तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने लिखा कि “मंगलवार का दिन ईरान में ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ के रूप में जाना जाएगा,” जो साफ तौर पर यह संकेत देता है कि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर—विशेष रूप से बिजलीघरों और पुलों को निशाना बना सकता है। ट्रंप के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि इससे बड़े सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है।
हालाँकि,ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों और चेतावनियों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही खुला है। ईरान का कहना है कि उसके मित्र देशों के लिए इस जलमार्ग से आवाजाही में कोई बाधा नहीं है। फिनलैंड में स्थित ईरानी दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि “होर्मुज स्ट्रेट खुला है,लेकिन यदि दुश्मनी बढ़ती है, तो वहां से गुजरना मुश्किल हो सकता है।” इस बयान में अमेरिका को सलाह भी दी गई कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक बयान देने से पहले सही जानकारी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
ईरानी दूतावास ने ट्रंप के हालिया पोस्ट के लहजे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह भाषा कूटनीतिक स्तर पर उचित नहीं है और इससे यह प्रतीत होता है कि इस तरह के संदेश शायद अनुभवहीन लोगों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। यह टिप्पणी अमेरिका की नीति और संचार शैली पर एक सीधा कटाक्ष मानी जा रही है।
इस बीच,द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अपने सख्त रुख को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि ईरान तय समयसीमा के भीतर अमेरिकी माँगों को नहीं मानता है,तो उसके महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाया जा सकता है। ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि “अगर वे मंगलवार शाम तक कुछ नहीं करते हैं,तो उनके पास कोई पावर प्लांट नहीं होगा और कोई पुल खड़ा नहीं रहेगा।” यह बयान संभावित हमलों की गंभीरता और व्यापकता को दर्शाता है।
ट्रंप के इन बयानों ने विश्लेषकों और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। उनका मानना है कि यदि अमेरिका इस तरह की कार्रवाई करता है,तो यह केवल एक सीमित सैन्य प्रतिक्रिया नहीं होगी,बल्कि एक बड़े स्तर के संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। इससे न केवल ईरान,बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है,जिसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
इसके बावजूद,ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ईरानी नेता अभी भी बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं,भले ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से सख्त रुख अपनाया हो। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि स्थिति “पूरी तरह नियंत्रण में” है, हालाँकि,उनके आक्रामक बयानों को देखते हुए इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है। दोनों देशों के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है,जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। होर्मुज स्ट्रेट इस विवाद का एक अहम केंद्र रहा है,क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है और यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है या वहाँ से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है,तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है,ताकि ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। हालाँकि,इस तरह की आक्रामक बयानबाजी से स्थिति उलटी भी पड़ सकती है और ईरान अपने रुख को और कठोर बना सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका ने जिस तरह की समयसीमा तय की है,वह स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना रही है। जब किसी विवाद में समयसीमा तय कर दी जाती है,तो दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ जाता है और गलती की संभावना भी अधिक हो जाती है। ऐसे में किसी भी गलतफहमी या गलत कदम से बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। जहाँ एक तरफ अमेरिका सख्त रुख अपनाकर दबाव बना रहा है,वहीं ईरान भी अपने रुख पर कायम है और पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में जाती है—क्या दोनों देश कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ते हैं या फिर यह विवाद किसी बड़े सैन्य टकराव में बदल जाता है।
