प्रीति जिंटा (तस्वीर क्रेडिट@Nationalist_IN)

सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरीं प्रीति जिंटा,सरकार से बातचीत और अनशन समाप्त कराने की अपील

मुंबई,22 जुलाई (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने शिक्षा व्यवस्था,पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चल रहे आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सामाजिक विषयों पर समय-समय पर अपनी राय रखने वाली प्रीति ने इस बार एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह सोनम वांगचुक और छात्र संगठनों के साथ जल्द से जल्द संवाद स्थापित करे, ताकि मौजूदा गतिरोध का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से भी अनुरोध किया कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करें, क्योंकि उनकी सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उनके द्वारा उठाई जा रही मांगें।

प्रीति जिंटा ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक पहल करेगी और आंदोलनकारियों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाएगी। उन्होंने लिखा कि यदि समय रहते संवाद शुरू नहीं किया गया तो सोनम वांगचुक की सेहत और अधिक खराब हो सकती है। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना सबसे बेहतर तरीका होता है और वर्तमान परिस्थितियों में यही सबसे आवश्यक कदम है।

अपने संदेश में प्रीति जिंटा ने विशेष रूप से सोनम वांगचुक से अपील करते हुए लिखा कि वे अपना अनशन समाप्त करें। उन्होंने कहा कि उनकी सेहत इस लड़ाई जितनी ही महत्वपूर्ण है। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी भी सामाजिक आंदोलन की सफलता के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का स्वस्थ रहना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और आंदोलनकारी आपसी बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालेंगे,जिससे छात्रों की चिंताओं का समाधान भी हो और किसी की जान या स्वास्थ्य पर खतरा भी न आए।

प्रीति जिंटा ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि सोनम वांगचुक और आंदोलन में शामिल छात्र भारत के भविष्य और देश के युवाओं की आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत,पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में जो भी सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं,उन्हें उनका पूरा समर्थन है। उन्होंने छात्रों और आंदोलनकारियों के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँगे।

अभिनेत्री की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है,जब देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। सोनम वांगचुक इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से अनशन पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई,तो युवाओं का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ सकता है।

सोनम वांगचुक ने अपने आंदोलन के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए,ताकि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मिल सके। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में जवाबदेही बढ़ाने,पेपर लीक की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की माँग की है। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी माँग की है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में परीक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आए विवादों की नैतिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

सोनम वांगचुक के आंदोलन को देशभर के कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। राजधानी दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने का प्रयास किया है। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा या एक घटना का मुद्दा नहीं है,बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की आवश्यकता से जुड़ा प्रश्न है। उनका मानना है कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को गंभीरता के साथ इस विषय पर कदम उठाने चाहिए।

यह आंदोलन उस समय और अधिक चर्चा में आ गया,जब दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुँचाया। रिपोर्टों के अनुसार 18 जुलाई की सुबह पुलिस ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कार्रवाई की। पुलिस का कहना था कि डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया,ताकि उनकी जान को किसी प्रकार का खतरा न हो। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।

हालाँकि,पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया। कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी और सरकार से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करने की माँग की। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनहित से जुड़े मुद्दों पर संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है और सरकार को इसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।

प्रीति जिंटा का बयान ऐसे समय सामने आया है,जब मनोरंजन जगत की कई हस्तियाँ भी सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रही हैं। प्रीति पहले भी विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करती रही हैं। इस बार उन्होंने शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय पर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर चल रही बहस के बीच प्रीति जिंटा की अपील को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने एक ओर सरकार से सकारात्मक पहल करते हुए बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है,वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक से भी अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका मानना है कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाधान तक पहुँचना होना चाहिए और इसके लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है।

फिलहाल देशभर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं। छात्रों की मांगों,शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर जारी यह बहस आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी रहने की संभावना है। वहीं प्रीति जिंटा की अपील ने इस मुद्दे को एक बार फिर व्यापक जनचर्चा के केंद्र में ला दिया है।