नई दिल्ली, 8 अप्रैल (युआईटीवी)- भारत की विदेश नीति के दायरे में एक अहम कूटनीतिक कदम उस समय देखने को मिला,जब एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में सेंट किट्स एंड नेविस के हाई कमीशन के उद्घाटन का स्वागत किया। इस मौके को दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि स्थायी राजनयिक मिशन की मौजूदगी से द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिलेगी और संवाद को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और सेंट किट्स एंड नेविस के बीच 1983 में कूटनीतिक संबंध स्थापित होने के बाद से रिश्ते हमेशा से ही सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब जब नई दिल्ली में हाई कमीशन की स्थापना हो गई है,तो यह न केवल दोनों देशों के बीच संपर्क को आसान बनाएगा,बल्कि व्यापार,निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर भी खोलेगा।
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की डिजिटल प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि देश ने सुशासन और आर्थिक दक्षता को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को सेंट किट्स एंड नेविस और कैरिकॉम के अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उनके अनुसार,डिजिटल गवर्नेंस,फिनटेक और सार्वजनिक सेवा वितरण के क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएँ अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुई हैं और कई ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ संयुक्त प्रयासों के जरिए तेजी से प्रगति की जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर संवाद और संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने से आपसी समझ बढ़ेगी और साझेदारी को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सेंट किट्स एंड नेविस के उच्चायुक्त और उनकी टीम भारत के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इन संभावनाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और सेंट किट्स एंड नेविस के संबंध केवल आर्थिक या रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं,बल्कि यह साझा मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष किया है और लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक-दूसरे के करीब लाया है। यही कारण है कि दोनों देश वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे का समर्थन करते हैं,खासकर जब वे ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाते हैं।
इस अवसर पर जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपने विचार साझा किए और सेंट किट्स एंड नेविस के विदेश मंत्री डगलस के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई और कई व्यावहारिक परियोजनाओं पर सहमति बनी।
उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही लीमा बीन्स की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से जुड़े एक प्रोजेक्ट में शामिल है,जो स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। इसके अलावा,दोनों पक्षों ने ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ यानी त्वरित प्रभाव वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर भी सहमति जताई,जिनका सीधा लाभ स्थानीय समुदायों को मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में कैरिकॉम देशों के लिए मेडिकल सप्लाई और जरूरी उपकरणों को क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्ध कराना एक अहम प्राथमिकता बन गई है। भारत इस दिशा में सहयोग करने के लिए तैयार है और अपनी दवाइयों तथा चिकित्सा विशेषज्ञता के जरिए योगदान दे सकता है।
पर्यटन को सेंट किट्स एंड नेविस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए भी निवेश और साझेदारी के अच्छे अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच इस दिशा में सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई है,जिससे पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिल सकती है।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय प्रतिभा और कौशल के वैश्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य,पर्यटन और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की भूमिका अहम हो सकती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि इन क्षेत्रों में भारतीय विशेषज्ञों की पहुँच को आसान बनाया जाए,तो दोनों देशों को इसका लाभ मिल सकता है।
जयशंकर ने इस वर्ष जनवरी में कैरिकॉम की अध्यक्षता संभालने पर सेंट किट्स एंड नेविस को बधाई भी दी और कहा कि यह क्षेत्रीय नेतृत्व की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत और कैरिकॉम देशों के बीच बढ़ते संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों पक्ष वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली में सेंट किट्स एंड नेविस का हाई कमीशन खुलना भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति के तहत एक अहम कदम है,जिसके जरिए वह कैरेबियाई देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देगा,बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भारत की उपस्थिति को भी सशक्त बनाएगा।
यह कूटनीतिक पहल भारत और सेंट किट्स एंड नेविस के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश किस तरह इन अवसरों का लाभ उठाते हैं और अपने संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं।
