भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को गति देने की तैयारी,नई दिल्ली में अहम बैठकों का दौर शुरू होगा

नई दिल्ली,22 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए इस सप्ताह नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन होने जा रहा है। इन बैठकों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले महीने अमेरिका द्वारा लागू की गई अस्थायी टैरिफ व्यवस्था की समयसीमा समाप्त होने वाली है और उससे पहले दोनों देश किसी ठोस सहमति तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को जानकारी दी कि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर नई दिल्ली पहुँचकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की विस्तृत बातचीत करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के पहले चरण को आगे बढ़ाना और शेष बचे मुद्दों पर सहमति बनाना है।

सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि वह नई दिल्ली में जैमीसन ग्रीर का स्वागत करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए पीयूष गोयल के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं। राजदूत के इस बयान ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच वार्ता निर्णायक चरण में पहुँच चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत केवल एक सीमित व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है,बल्कि भविष्य में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार ढांचे की नींव रख सकती है। भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। रक्षा,ऊर्जा,प्रौद्योगिकी,आपूर्ति श्रृंखला,सेमीकंडक्टर,महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग ने दोनों देशों को व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है।

बीते रविवार को पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार वार्ता के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है। गोयल ने यह भी विश्वास जताया था कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है।

इस वार्ता की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि अमेरिका द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में अपने सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। यह शुल्क अमेरिका की सामान्य ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ दरों के अतिरिक्त लगाया गया था। अब दोनों देशों की कोशिश है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले व्यापार संबंधों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों का समाधान निकाल लिया जाए।

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की तकनीकी और मंत्रिस्तरीय वार्ताएँ पहले ही हो चुकी हैं। इसी महीने 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच विस्तृत चर्चा हुई थी। उन बैठकों में कृषि, विनिर्माण,बाजार पहुँच,शुल्क संरचना,निवेश,डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया था।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि आगामी बातचीत का मुख्य उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उनके अनुसार,दोनों पक्ष ऐसे समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं,जो व्यापारिक संबंधों को और अधिक संतुलित तथा लाभकारी बना सकें।

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं। अमेरिका आज भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स,ऊर्जा,रक्षा उत्पादन,इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग ने द्विपक्षीय व्यापार को नई गति दी है।

हालाँकि,कुछ मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं। अमेरिका लंबे समय से भारतीय बाजार में अधिक पहुँच की माँग करता रहा है,जबकि भारत अपने घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की रक्षा पर जोर देता है। कृषि उत्पादों,डेयरी,चिकित्सा उपकरणों,ई-कॉमर्स नियमों और कुछ औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने बातचीत जारी रखी है और समाधान खोजने की इच्छा दिखाई है।

जैमीसन ग्रीर पहले भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि भारत के साथ व्यापारिक वार्ता कई बार जटिल होती है,विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ भारत संरक्षणवादी नीतियाँ अपनाता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देशों के पास एक साझा रूपरेखा मौजूद है,जिसके आधार पर आगे बढ़ते हुए सहमति बनाई जा सकती है।

राजनीतिक स्तर पर भी भारत और अमेरिका के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर दोनों देशों के संबंधों को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताया है। दोनों नेताओं का मानना है कि मजबूत आर्थिक सहयोग इस साझेदारी की सफलता का आधार बनेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौते का पहला चरण समय पर पूरा हो जाता है,तो इससे न केवल दोनों देशों के व्यापार में वृद्धि होगी,बल्कि निवेश,रोजगार और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है और अमेरिकी कंपनियों को भी एक बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक बेहतर पहुँच मिल सकती है।

नई दिल्ली में होने वाली आगामी बैठकों पर अब दोनों देशों के उद्योग जगत,निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजरें टिकी हुई हैं। यह वार्ता केवल व्यापारिक आँकड़ों तक सीमित नहीं है,बल्कि भारत और अमेरिका के व्यापक रणनीतिक संबंधों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष व्यावहारिक समाधान निकालते हुए एक ऐसे समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे,जो आने वाले वर्षों में आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करेगा।