जसपाल राणा और मनु भाकर (तस्वीर क्रेडिट@rajput_of_india)

भारतीय निशानेबाजी के महानायक जसपाल राणा का निधन,खेल जगत में शोक की लहर,मनु भाकर का भावुक पोस्ट, लिखा- ‘अपूरणीय क्षति’

नई दिल्ली,13 जून (युआईटीवी)- भारतीय खेल जगत को शुक्रवार को एक ऐसा झटका लगा, जिसकी भरपाई शायद लंबे समय तक नहीं हो सकेगी। देश के पूर्व दिग्गज निशानेबाज और सफल कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। खिलाड़ी,कोच, खेल प्रशासक और प्रशंसक सभी इस खबर से स्तब्ध रह गए। भारतीय निशानेबाजी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जसपाल राणा का जाना न केवल इस खेल के लिए,बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाजी महासंघ विश्व कप प्रतियोगिता के बाद जर्मनी से भारत लौट रहे थे। यात्रा के दौरान विमान में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहाँ चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को भावुक कर दिया।

जसपाल राणा का नाम भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में देश को अनेक अंतर्राष्ट्रीय सफलताएँ दिलाईं और बाद में कोच बनकर नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार किया। अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने भारतीय खेलों को नई पहचान दिलाने का काम किया।

एक खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा की उपलब्धियाँ बेहद शानदार रहीं। उन्होंने चार राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि अपने आप में उनकी प्रतिभा और निरंतरता का प्रमाण है। राष्ट्रमंडल खेलों में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल कर दिया था।

सिर्फ राष्ट्रमंडल खेल ही नहीं,बल्कि एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। वर्ष 2006 के एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उस समय उनका प्रदर्शन भारतीय निशानेबाजी के इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में गिना गया था। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई रिकॉर्ड बनाए और भारत को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया।

हालाँकि,जसपाल राणा की सबसे बड़ी पहचान केवल एक सफल खिलाड़ी के रूप में नहीं रही। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखा और यहाँ भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने कई युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित किया,जिन्होंने आगे चलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।

उनकी कोचिंग यात्रा का सबसे चमकदार अध्याय स्टार निशानेबाज मनु भाकर के साथ जुड़ा रहा। जसपाल राणा के मार्गदर्शन में मनु भाकर ने वह उपलब्धि हासिल की,जो भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी देखरेख में मनु ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। यह उपलब्धि न केवल मनु भाकर के लिए,बल्कि उनके गुरु जसपाल राणा के लिए भी गर्व का विषय थी।

जसपाल राणा के निधन के बाद मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने अपने कोच के साथ बिताए गए कई यादगार पलों की तस्वीरें साझा करते हुए केवल दो शब्द लिखे— “अपूरणीय क्षति।” यह छोटा सा संदेश उनके और जसपाल राणा के बीच गहरे संबंध को दर्शाने के लिए काफी था। खेल जगत में गुरु और शिष्य के इस रिश्ते को हमेशा प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जाता रहा है।

भारतीय निशानेबाजी में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था। वर्ष 1994 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया,जो देश के प्रमुख खेल सम्मानों में से एक है। इसके बाद वर्ष 1997 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी खेल उपलब्धियों और देश के लिए किए गए योगदान की मान्यता थी।

कोच के रूप में उनके उत्कृष्ट कार्य को भी देश ने सम्मान दिया। वर्ष 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन प्रशिक्षकों को दिया जाता है,जिन्होंने खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। जसपाल राणा इस सम्मान के पूरी तरह हकदार थे,क्योंकि उन्होंने कई खिलाड़ियों के करियर को नई दिशा दी और भारतीय निशानेबाजी को मजबूत आधार प्रदान किया।

उनके निधन पर देश के शीर्ष नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपने खेल और कोचिंग के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार, मित्रों और शिष्यों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा ने भारतीय खेलों को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। खेल जगत की कई अन्य हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।

जसपाल राणा का जीवन संघर्ष,समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक था। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में देश को गौरवान्वित किया और कोच के रूप में अनेक चैंपियन तैयार किए। उनकी उपलब्धियाँ और उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।

उनके निधन के साथ भारतीय निशानेबाजी ने अपने सबसे बड़े स्तंभों में से एक को खो दिया है। यह केवल एक महान खिलाड़ी या सफल कोच का अंत नहीं है,बल्कि एक ऐसे युग का समापन है जिसने भारतीय निशानेबाजी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। आने वाली पीढ़ियाँ जसपाल राणा को एक प्रेरणा,मार्गदर्शक और भारतीय खेलों के सच्चे नायक के रूप में हमेशा याद रखेंगी।