नई दिल्ली,22 अगस्त (युआईटीवी)- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी आँकड़ों के अनुसार,14 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9.905 अरब डॉलर बढ़कर 716.907 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले 7 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 14.136 अरब डॉलर की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे सप्ताह भंडार में हुई इस तेज बढ़ोतरी को देश की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरबीआई के आँकड़ों के मुताबिक,14 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इस दौरान इन परिसंपत्तियों का मूल्य 7.225 अरब डॉलर बढ़कर 581.851 अरब डॉलर हो गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें अमेरिकी डॉलर के अलावा कई प्रमुख वैश्विक मुद्राएँ भी शामिल होती हैं।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के साथ जापानी येन,यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख मुद्राएँ भी शामिल रहती हैं। इन सभी विदेशी मुद्राओं के मूल्य को अमेरिकी डॉलर के आधार पर दर्शाया जाता है। इसलिए वैश्विक मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के कुल मूल्य पर पड़ सकता है। इसके बावजूद मौजूदा सप्ताह में एफसीए में 7.225 अरब डॉलर की वृद्धि हुई,जिसने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक गोल्ड रिजर्व में भी इस सप्ताह उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आरबीआई के अनुसार,14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 2.679 अरब डॉलर बढ़कर 111.417 अरब डॉलर हो गया। सोने का बढ़ता मूल्य और केंद्रीय बैंक के पास मौजूद स्वर्ण भंडार की स्थिति विदेशी मुद्रा भंडार के कुल आँकड़े को प्रभावित करती है। मौजूदा सप्ताह में सोने के भंडार में हुई वृद्धि ने कुल रिजर्व में बढ़ोतरी को और मजबूती दी।
वहीं,विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर के मोर्चे पर मामूली गिरावट दर्ज की गई। आरबीआई के आँकड़ों के मुताबिक,समीक्षाधीन सप्ताह में एसडीआर का मूल्य 5 मिलियन डॉलर घटकर 18.740 अरब डॉलर रह गया। दूसरी ओर,अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व पोजिशन में 5 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 4.899 अरब डॉलर पर पहुँच गई।
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह देश की बाहरी वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है और मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
विदेशी मुद्रा भंडार का एक प्रमुख उपयोग घरेलू मुद्रा की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना भी है। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में किसी समय अमेरिकी डॉलर की माँग बढ़ जाती है और इसके कारण भारतीय रुपये पर दबाव आता है,तो आरबीआई जरूरत के अनुसार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की आपूर्ति करके रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने की कोशिश कर सकता है। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
हालाँकि,विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल रुपये की किसी भी गिरावट को पूरी तरह रोकने के लिए नहीं किया जाता। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य आमतौर पर बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना होता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को ऐसे समय में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त क्षमता देता है,जब वैश्विक बाजार में अचानक उथल-पुथल पैदा हो या विदेशी पूँजी के प्रवाह में बदलाव आए।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी को देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। पर्याप्त भंडार से देश की आयात जरूरतों को पूरा करने की क्षमता मजबूत होती है। भारत कच्चे तेल,इलेक्ट्रॉनिक सामान,मशीनरी और कई अन्य जरूरी वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात करता है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त स्तर अंतर्राष्ट्रीय भुगतान दायित्वों को पूरा करने में मदद करता है।
इसके अलावा,मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार निवेशकों के भरोसे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जब किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होती है,तो वैश्विक स्तर पर उसकी बाहरी भुगतान क्षमता को लेकर विश्वास मजबूत होता है। इससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं,व्यापारिक तनाव या वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के दौरान अर्थव्यवस्था को झटकों से निपटने में मदद मिल सकती है।
14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में हुई 9.905 अरब डॉलर की वृद्धि ऐसे समय में हुई है,जब इससे पिछले सप्ताह भी 14.136 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। यानी लगातार दो सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 24 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। यह तेजी देश के रिजर्व स्तर को नई ऊँचाई के करीब ले जा रही है और बाहरी क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।
हालाँकि,विदेशी मुद्रा भंडार में साप्ताहिक बदलाव कई कारणों से प्रभावित हो सकते हैं। विदेशी मुद्राओं के मूल्य में बदलाव,सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव,केंद्रीय बैंक की बाजार गतिविधियाँ और विदेशी पूँजी के प्रवाह जैसे कारक रिजर्व के आँकड़ों पर असर डालते हैं। इसलिए किसी एक सप्ताह की वृद्धि को अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक दिशा का अकेला संकेतक नहीं माना जाता। फिर भी लगातार दो सप्ताह में हुई बड़ी बढ़ोतरी भारत के लिए सकारात्मक है।
कुल मिलाकर,14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 716.907 अरब डॉलर पर पहुँचना देश की वित्तीय क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में हुई वृद्धि ने इस उछाल में अहम भूमिका निभाई। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने, अंतर्राष्ट्रीय भुगतान दायित्वों को पूरा करने और रुपये में अत्यधिक अस्थिरता की स्थिति में बाजार को स्थिर रखने के लिए बेहतर स्थिति प्रदान करता है। लगातार बढ़ता रिजर्व यह संकेत भी देता है कि फिलहाल भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा सुरक्षा उपलब्ध है।
