वाशिंगटन,8 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ब्याज दरों को लेकर अपनी स्पष्ट राय सामने रखी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और ऐसे समय में ब्याज दरों को बढ़ाने के बजाय कम किया जाना चाहिए,ताकि आर्थिक विकास की रफ्तार और तेज हो सके। ट्रंप ने हाल ही में नियुक्त किए गए फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वार्श पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह एक सक्षम और समझदार आर्थिक विशेषज्ञ हैं तथा उन्हें मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। हालाँकि,इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी व्यक्तिगत राय कम ब्याज दरों के पक्ष में है।
एक विशेष साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था,रोजगार के आँकड़ों,ब्याज दरों और भविष्य की आर्थिक दिशा को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी रोजगार रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और विकास की गति बरकरार है। उनके अनुसार,रोजगार के बेहतर आँकड़े इस बात का संकेत हैं कि सरकार की आर्थिक नीतियाँ सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और आर्थिक मोर्चे पर देश की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। उन्होंने रोजगार के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट बेहद उत्साहजनक है और यह दर्शाती है कि कारोबारी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं,निवेश का माहौल मजबूत है तथा श्रम बाजार में स्थिरता बनी हुई है।
हालाँकि,जब उनसे पूछा गया कि मजबूत रोजगार आँकड़ों के कारण क्या फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं,तो उन्होंने इस विचार से असहमति जताई। ट्रंप का मानना है कि किसी भी देश को केवल इसलिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था विकास कर रही है,रोजगार बढ़ रहे हैं और उत्पादन मजबूत हो रहा है,तो ऐसे समय में ब्याज दरें बढ़ाना विकास की गति को धीमा करने जैसा होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि ब्याज दरें बढ़ाने का कोई ठोस कारण दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार,अमेरिका ने अपने इतिहास में कई बार यह साबित किया है कि कम ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक गतिविधियों के सहारे बड़े स्तर पर विकास हासिल किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक सफलता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए,न कि उसे नियंत्रित करने के लिए अनावश्यक बाधाएँ खड़ी की जानी चाहिए।
ट्रंप ने वित्तीय बाजारों के मौजूदा व्यवहार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले जब रोजगार या आर्थिक गतिविधियों से जुड़े अच्छे आँकड़े आते थे,तो शेयर बाजार में तेजी देखने को मिलती थी,लेकिन वर्तमान समय में स्थिति बदल गई है। अब मजबूत आर्थिक आँकड़ों को देखकर निवेशक यह अनुमान लगाने लगते हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है,जिसके कारण बाजारों में दबाव बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि यह एक विडंबनापूर्ण स्थिति है कि अच्छी आर्थिक खबरें भी कभी-कभी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत बन जाती हैं। ट्रंप के अनुसार,इसका मुख्य कारण यह धारणा है कि मजबूत अर्थव्यवस्था का मतलब भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह सोच आर्थिक विकास के लिए अनुकूल नहीं है और इससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कम ब्याज दरें आर्थिक विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार,जब उधार लेने की लागत कम होती है तो व्यवसायों को विस्तार करने,नए निवेश करने और रोजगार सृजित करने में आसानी होती है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को भी घर,वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए सस्ते ऋण उपलब्ध हो पाते हैं,जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
ट्रंप ने कहा कि यदि ब्याज दरों को कम रखा जाए,तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे शक्तिशाली आर्थिक मशीन बन सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियाँ अमेरिका को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती हैं। उनके अनुसार,देश के पास संसाधनों,तकनीक और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है,इसलिए सही आर्थिक माहौल मिलने पर विकास की संभावनाएँ और अधिक बढ़ सकती हैं।
महँगाई को लेकर उठने वाली चिंताओं पर भी ट्रंप ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने उस धारणा को खारिज किया कि तेज आर्थिक विकास अनिवार्य रूप से महँगाई को बढ़ावा देता है। ट्रंप का कहना है कि विकास स्वयं में कोई समस्या नहीं है,बल्कि यह किसी भी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विस्तार,रोजगार वृद्धि और उत्पादन में बढ़ोतरी को महँगाई के साथ सीधे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार,मजबूत विकास से सरकार की आय बढ़ती है,उद्योगों को विस्तार मिलता है और लोगों की आय में सुधार होता है। ऐसे में विकास को सीमित करने के बजाय उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ऐसी आर्थिक नीतियाँ लागू करना है,जो उत्पादन,निवेश और रोजगार को बढ़ावा दें।
साक्षात्कार के दौरान जब उनसे पूछा गया कि यदि फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करता है,तो क्या वह इससे निराश होंगे,तो उन्होंने सावधानीपूर्वक जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि वह केविन वार्श का सम्मान करते हैं और उन्हें एक योग्य नेता मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह नए फेडरल रिजर्व चेयरमैन पर सार्वजनिक रूप से दबाव नहीं बनाना चाहते।
इसके बावजूद उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी व्यक्तिगत राय कम ब्याज दरों के पक्ष में है। ट्रंप ने कहा कि जब कोई देश अच्छा प्रदर्शन कर रहा हो,तब उसे उच्च ब्याज दरों के माध्यम से दंडित नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि ऐसे समय में विकास को और गति देने के लिए अनुकूल आर्थिक वातावरण तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कम ब्याज दरों का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे सरकार के लिए कर्ज का प्रबंधन आसान हो जाता है। कम उधारी लागत का अर्थ है कि सरकार अपने वित्तीय संसाधनों का उपयोग अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से कर सकती है। ट्रंप का मानना है कि इससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को और मजबूत बनाना चाहते हैं। उनके अनुसार,यदि आर्थिक विकास मजबूत रहेगा और उधारी की लागत नियंत्रित रहेगी तो देश रक्षा,बुनियादी ढाँचे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में अधिक निवेश कर सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सही आर्थिक नीतियों के साथ अमेरिका एक अत्यंत शक्तिशाली और सुचारु रूप से संचालित अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में केविन वार्श की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फेडरल रिजर्व के पूर्व गवर्नर रह चुके वार्श लंबे समय से रिपब्लिकन खेमे की प्रमुख आर्थिक आवाजों में शामिल रहे हैं। अब फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के रूप में उन्हें ऐसे समय में नीतिगत फैसले लेने होंगे,जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है।
एक ओर रोजगार बाजार मजबूत बना हुआ है और आर्थिक गतिविधियाँ सकारात्मक संकेत दे रही हैं,वहीं दूसरी ओर महँगाई के संभावित जोखिम,वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताएँ भी मौजूद हैं। ऐसे में फेडरल रिजर्व को विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व के फैसलों पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी रहेगी। ब्याज दरों से जुड़े निर्णय न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था,बल्कि पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केविन वार्श के नेतृत्व में केंद्रीय बैंक किस दिशा में आगे बढ़ता है,यह निवेशकों,उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदेश स्पष्ट है। वह मजबूत आर्थिक विकास को अपनी प्राथमिकता मानते हैं,कम ब्याज दरों के पक्षधर हैं और उनका विश्वास है कि अमेरिका को अपनी आर्थिक सफलता को आगे बढ़ाने के लिए विकासोन्मुख नीतियों पर जोर देना चाहिए। वहीं फेडरल रिजर्व के सामने चुनौती यह होगी कि वह रोजगार,महँगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा संतुलित निर्णय ले,जो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सके।
