ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान (तस्वीर क्रेडिट@Menergyfuture)

ईरान-इजरायल तनाव फिर चरम पर,मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में बढ़ी युद्ध की आशंका

तेल अवीव/तेहरान,8 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अप्रैल में हुए युद्धविराम के लगभग दो महीने बाद ईरान और इजरायल के बीच सैन्य टकराव दोबारा शुरू हो गया है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने रविवार रात इजरायल के विभिन्न इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके तुरंत बाद इजरायल ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं को फिर से बढ़ा दिया है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हुए इजरायली हमलों के जवाब में की गई। संगठन ने कहा कि इजरायल द्वारा हाल के दिनों में किए गए हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और उसी के जवाब में यह सैन्य अभियान चलाया गया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार,मिसाइल हमलों का लक्ष्य इजरायल के महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान थे।

ईरानी पक्ष का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस को निशाना बनाया। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने बयान में कहा कि यह अभियान इजरायल द्वारा ईरान के भीतर विभिन्न स्थानों पर स्थित रडार ठिकानों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों के जवाब में चलाया गया। ईरान का कहना है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है।

मिसाइल हमलों के बाद पूरे इजरायल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। कई शहरों में हवाई हमले के सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। इजरायली रक्षा बलों ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय हो गई और अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। सेना के अनुसार,ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही रोक लिया गया,जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका।

हालाँकि,ईरानी हमलों के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इजरायली वायुसेना ने ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में स्थित कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इस अभियान के दौरान ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर शहर में स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को भी निशाना बनाया गया।

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,इस हमले में पेट्रोकेमिकल संयंत्र को काफी नुकसान पहुँचा है। फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालाँकि,उस समय तक नुकसान और संभावित हताहतों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति का आकलन किया जा रहा है और विस्तृत रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी।

माहशहर ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र माना जाता है। यहाँ स्थित पेट्रोकेमिकल और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में इस संयंत्र पर हुआ हमला केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं,बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के हमले जारी रहते हैं,तो इसका असर क्षेत्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।

इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल परिसर पर हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि वायुसेना ने वहाँ स्थित कई लक्ष्यों को निशाना बनाया है। हालाँकि,सेना ने अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की और कहा कि उचित समय पर अधिक विवरण सार्वजनिक किए जाएँगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था और उससे कितनी क्षति हुई है।

इस बीच ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दावा किया कि इजरायली हमलों के दौरान राजधानी तेहरान,तबरीज और इस्फहान सहित कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय प्रशासन ने कुछ इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी तेज कर दी गई है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड ने आरोप लगाया कि इजरायल ने अपने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग किया। संगठन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाली है। वहीं इजरायल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति की है और इसका उद्देश्य अपने नागरिकों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना है।

लगातार बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। भारतीय समयानुसार यह बैठक दोपहर 1:30 बजे आयोजित की जानी थी। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,इस बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्रियों और सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को शामिल किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों,इजरायल की अब तक की जवाबी कार्रवाई और भविष्य की सैन्य रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी तय किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ इजरायल किस प्रकार की कार्रवाई करेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद दोनों देशों के बीच अपेक्षाकृत शांत स्थिति बनी हुई थी,लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उस स्थिरता को समाप्त कर दिया है। यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है,तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है। विशेष रूप से लेबनान,सीरिया और खाड़ी क्षेत्र के देशों पर इसके व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया,तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति,व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल मध्य पूर्व में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम यह तय करेंगे कि यह संकट कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले लेता है।