यरूशलम,20 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है,जहाँ इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में एक विस्तृत बफर जोन बनाने की योजना सार्वजनिक कर दी है। इजरायली सेना द्वारा जारी किए गए नए मैप में लेबनान के अंदर कई किलोमीटर तक फैला एक बड़ा इलाका दिखाया गया है,जो भूमध्यसागर के तटीय हिस्से से लेकर सीरिया सीमा के पास माउंट हरमोन क्षेत्र तक एक लंबी पट्टी के रूप में फैला हुआ है। इस कदम ने क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है,खासकर ऐसे समय में जब हाल ही में अस्थायी सीजफायर लागू किया गया था।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल कॉट्ज ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना इस प्रस्तावित बफर जोन से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि भले ही गुरुवार और शुक्रवार की आधी रात को स्थानीय समय के अनुसार अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ हो,लेकिन इजरायली सेना अपनी रणनीतिक स्थिति बनाए रखेगी। रक्षा मंत्री काट्ज ने यह भी संकेत दिया कि इस इलाके में मौजूद घरों और इमारतों को गिराया जाएगा,ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
काट्ज के बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना गाज़ा पट्टी में पहले किए गए सैन्य अभियानों से की। उन्होंने चेतावनी दी कि इजरायली सेना हिज्बुल्लाह से जुड़े किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाएगी। यह बयान इस बात का संकेत है कि इजरायल इस क्षेत्र में अपने सुरक्षा दृष्टिकोण को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
इजरायली सेना के अनुसार,वर्तमान में पाँच डिवीजन और नौसेना बल दक्षिणी लेबनान में फॉरवर्ड डिफेंस लाइन स्थापित करने में लगे हुए हैं। सेना का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती समुदायों के लिए सीधे खतरों को रोकना है। मैप में नकौरा-रास अल-बयादा तटीय क्षेत्र से जुड़े समुद्री हिस्से को भी शामिल किया गया है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह योजना केवल स्थलीय ही नहीं,बल्कि समुद्री सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर बनाई गई है।
इस प्रस्तावित बफर जोन में बिंट जेबिल,ऐता अल-शाब और खियाम जैसे महत्वपूर्ण शहरों और कस्बों के उत्तर का क्षेत्र शामिल है। कुछ स्थानों पर यह जोन लिटानी नदी तक फैला हुआ है,जिसमें कई गाँव और पहाड़ी इलाकों की रिज लाइनें भी आती हैं। यह पूरा क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि यहाँ से हिज्बुल्लाह की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।
हालाँकि,इस कदम को लेकर लेबनान और सीरिया की ओर से किसी भी प्रकार की मंजूरी नहीं दी गई है। सीरिया और लेबनान दोनों ने इस कार्रवाई पर औपचारिक सहमति नहीं जताई है,जिससे यह स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश द्वारा दूसरे देश के क्षेत्र में इस तरह की सैन्य गतिविधियाँ गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सीजफायर लागू होने के बावजूद जमीनी हालात में कोई खास सुधार नहीं देखा जा रहा है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के अनुसार,इजरायली सेना ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान और तेज कर दिए। बिंट जेबिल में सुरक्षा क्षेत्र खाली कराने के नाम पर घरों को गिराने की कार्रवाई जारी रही,जबकि पहले से ही भारी तबाही झेल चुके इस शहर में टैंकों की गश्त भी देखी गई।
इसके अलावा,अल-बयादा और अल-नकूरा जैसे इलाकों में भी मकानों को विस्फोट से उड़ाया गया और सड़कों को मिट्टी के ढेर लगाकर बंद कर दिया गया। कूनीन कस्बे पर भी गोलाबारी की खबरें सामने आई हैं,जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। हालाँकि,इन घटनाओं पर इजरायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब वॉशिंगटन द्वारा इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के अस्थायी सीजफायर की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के महज तीन दिन बाद ही इजरायल द्वारा बफर जोन का मैप जारी करना इस बात का संकेत देता है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अभी भी गहरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च की शुरुआत से इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी तनाव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। इससे पहले नवंबर 2024 में हुए सीजफायर के दौरान भी इजरायल ने दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में लगभग रोजाना हमले जारी रखे थे। ऐसे में मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि युद्धविराम केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और जमीनी स्तर पर संघर्ष जारी है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है,क्योंकि इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यदि हालात इसी तरह बने रहते हैं, तो यह संघर्ष बड़े स्तर पर फैल सकता है और इसका असर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
दक्षिणी लेबनान में इजरायल की बफर जोन योजना और उसके साथ जारी सैन्य कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में शांति अभी दूर की बात है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या यह स्थिति और गंभीर रूप ले लेती है।
