अबू धाबी,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आधिकारिक यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात पहुँचे,जहाँ उन्होंने अपने समकक्ष और यूएई के उप प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के साथ-साथ बदलते वैश्विक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं।
जयशंकर बुधवार को अबू धाबी पहुँचे। हवाई अड्डे पर यूएई की मंत्री रीम अल हाशिमी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की। विदेश मंत्री ने इस मुलाकात को गर्मजोशीपूर्ण और सार्थक बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और यूएई के बीच सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत हुई। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक,व्यापारिक, ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों में संबंध मजबूत हुए हैं। ऐसे में इस यात्रा को मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और नए अवसरों की पहचान करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस आधिकारिक दौरे से पहले जयशंकर और अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने ‘रायसीना संवाद’ के मध्य पूर्व सत्र में भी हिस्सा लिया था। इस सत्र का विषय ‘द वर्ल्ड अहेड: पावर, पर्पज एंड पॉसिबिलिटी’ था। कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में हो रहे बदलावों और विभिन्न देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर अपने विचार रखे।
चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश के लिए बदलती चुनौतियों के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करना आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक संबंधों में आ रहे बदलावों के कारण देशों को नए साझेदारों के साथ सहयोग के अवसर तलाशने पड़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और यूएई जैसे देशों के बीच मजबूत संबंधों का महत्व और बढ़ जाता है।
जयशंकर ने कहा कि विश्व व्यवस्था में बदलाव केवल हाल की घटनाओं का परिणाम नहीं हैं,बल्कि लंबे समय से विकसित हो रहे रुझानों का भी इसमें योगदान है। अलग-अलग देश अपनी परिस्थितियों,जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर इन बदलावों का सामना कर रहे हैं। इसी वजह से नए साझेदारों की तलाश और सहयोग के वैकल्पिक रास्ते विकसित करना स्वाभाविक प्रक्रिया बन गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के दौर में साझेदारियों को केवल पारंपरिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। देशों को अपने संबंधों में अधिक व्यापक और रणनीतिक समझ विकसित करनी होगी,ताकि बदलती परिस्थितियों में साझा हितों की रक्षा की जा सके और सहयोग के नए क्षेत्र तैयार किए जा सकें।
विदेश मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार,वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकालने के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं को अधिक सक्षम और प्रासंगिक बनाना जरूरी है। इसके साथ ही छोटे,लेकिन मजबूत सहयोगी समूह भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारत और यूएई के संबंध इस दृष्टिकोण का उदाहरण हैं। पिछले एक दशक में दोनों देशों ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी साझेदारी का विस्तार किया है। व्यापार और निवेश से लेकर ऊर्जा, तकनीक तथा क्षेत्रीय सहयोग तक, दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार नए आयाम जुड़े हैं। भारत में यूएई का आर्थिक महत्व और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी भी इन संबंधों को विशेष बनाती है।
दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद से आपसी विश्वास मजबूत करने और साझा प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ने में मदद मिलती है। जयशंकर की मौजूदा यात्रा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। बैठक में हुई चर्चा से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष मौजूदा साझेदारी को केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
जयशंकर का यूएई दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब पश्चिम एशिया की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ईरान में जारी संघर्ष और यमन में हूती समूह तथा सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन घटनाक्रमों का असर समुद्री मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। इस क्षेत्र के साथ भारत के गहरे व्यापारिक संबंध हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वहाँ रहते तथा काम करते हैं। इसलिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के आर्थिक हितों के साथ-साथ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
इसी बीच, दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने समुद्र में हुए एक हादसे के बाद 22 भारतीय नाविकों के सुरक्षित बचाए जाने की जानकारी दी। रविवार को दूतावास ने बताया कि ‘एमटी जेम नंबर 2’ नामक कच्चे तेल के टैंकर से जुड़ी घटना के बाद रस अल खैमाह के तट के पास जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
दूतावास ने कहा कि वह इस मामले में संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नाविकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।
इस बीच,फ्लायदुबई की उड़ान एफजेड1073 से जुड़े मामले में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार अबू धाबी के एक अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। बताया गया है कि विमान में सह-पायलट के हमले की स्थिति के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विमान में सवार 174 यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान दिया। फिलहाल उनकी हालत में सुधार होने की जानकारी सामने आई है।
समुद्री हादसे में भारतीय चालक दल के सदस्यों का सुरक्षित बचाव और पायलट के उपचार से जुड़ा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब भारत और यूएई के बीच उच्चस्तरीय बातचीत जारी है। हालाँकि,इन घटनाओं और जयशंकर की आधिकारिक बैठक के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
कुल मिलाकर,जयशंकर की यह यात्रा भारत और यूएई के बीच रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने,वैश्विक बदलावों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर संवाद मजबूत करने का अवसर है। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क और सहयोग आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है।
