नई दिल्ली,7 सितंबर (युआईटीवी)- त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल मारुति सुजुकी ने ग्राहकों को झटका दिया है। कंपनी ने अपनी चुनिंदा कारों की कीमतों में 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें सितंबर महीने से लागू हो गई हैं। कंपनी ने कीमतों में इस वृद्धि के पीछे लगातार बढ़ रहे महँगाई के दबाव और उत्पादन लागत में हो रही बढ़ोतरी को मुख्य वजह बताया है। हालाँकि,कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके कौन-कौन से मॉडल और वैरिएंट इस मूल्य वृद्धि के दायरे में आए हैं।
मारुति सुजुकी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान कंपनी ने लागत कम करने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों के जरिए बढ़ती लागत के असर को कम करने की कोशिश की गई,लेकिन महँगाई का दबाव लगातार बना हुआ है। कंपनी के अनुसार,लागत से जुड़ी परिस्थितियाँ भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुँचाना जरूरी हो गया है।
कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा कि महँगाई का बोझ बढ़ने और लागत के लिए मुश्किल परिस्थितियाँ बने रहने के कारण उसे बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हालाँकि,मारुति सुजुकी ने यह भी कहा है कि वह ग्राहकों पर कीमत बढ़ने के प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। कंपनी की ओर से कीमतों में बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा 20,000 रुपये बताई गई है।
मारुति सुजुकी की ओर से जारी जानकारी में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी किन मॉडलों पर लागू की गई है। कंपनी ने अलग-अलग कारों और उनके वैरिएंट की नई कीमतों की जानकारी भी साझा नहीं की है। ऐसे में ग्राहकों को संबंधित मॉडल की कीमत के बारे में कंपनी की ओर से विस्तृत जानकारी जारी होने का इंतजार करना होगा।
यह पहली बार नहीं है जब मारुति सुजुकी ने हाल के महीनों में अपनी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इससे पहले अगस्त में भी कंपनी ने अपने एरेना और नेक्सा के तहत आने वाले मॉडलों की कीमतों में वृद्धि की थी। उस समय मॉडल और वैरिएंट के आधार पर कीमतों में 2,500 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। अगस्त की मूल्य वृद्धि के बाद अब सितंबर में एक बार फिर चुनिंदा वाहनों की कीमतें बढ़ाई गई हैं।
मारुति सुजुकी की कारों की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय हुई है,जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। आमतौर पर इस अवधि में वाहन कंपनियाँ ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की योजनाएँ,छूट और विशेष ऑफर पेश करती हैं। त्योहारी सीजन को भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बिक्री के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्राहक नई कार खरीदने की योजना बनाते हैं। ऐसे में कीमतों में वृद्धि का ग्राहकों की खरीदारी की योजनाओं पर कितना असर पड़ेगा,यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
दूसरी ओर,मारुति सुजुकी अकेली वाहन निर्माता कंपनी नहीं है जिसने हाल के दिनों में कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भी 1 सितंबर से अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 25,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। कंपनी के पोर्टफोलियो में पेट्रोल और डीजल इंजन वाले वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक कारें भी शामिल हैं। टाटा मोटर्स की ओर से कीमत बढ़ाने का फैसला भी बढ़ती लागत और बाजार की परिस्थितियों के बीच लिया गया है।
इसके अलावा हुंडई मोटर इंडिया ने भी अपने वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इस तरह देश की प्रमुख कार कंपनियों की ओर से एक के बाद एक कीमत बढ़ाए जाने से यात्री वाहन बाजार में लागत का दबाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वाहन कंपनियाँ उत्पादन लागत में वृद्धि और ग्राहकों की माँग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
ऑटोमोबाइल उद्योग में कारों की कीमत तय करने में कई तरह की लागत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कच्चे माल की कीमत,उत्पादन खर्च,परिवहन लागत और अन्य इनपुट लागत में बदलाव का सीधा असर वाहन निर्माताओं के मार्जिन पर पड़ता है। जब लागत लंबे समय तक बढ़ी रहती है,तो कंपनियों के लिए उसका पूरा बोझ खुद उठाना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में कंपनियाँ कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुँचाती हैं।
मारुति सुजुकी ने भी कीमत बढ़ाने के फैसले के पीछे इसी तरह की परिस्थितियों का हवाला दिया है। कंपनी का कहना है कि लागत कम करने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद महँगाई और लागत से जुड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ बनी हुई हैं। इसलिए कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालने का फैसला किया है। हालाँकि,कंपनी ने यह संकेत दिया है कि वह ग्राहकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सीमित रखने की कोशिश करेगी।
कार खरीदारों के लिए यह मूल्य वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वाहन खरीदने के दौरान एक्स-शोरूम कीमत के अलावा पंजीकरण,बीमा और अन्य खर्च भी जुड़े होते हैं। कार की मूल कीमत में वृद्धि होने पर कुल खरीद लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में कार खरीदने की तैयारी कर रहे ग्राहकों को अपने बजट की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।
फिलहाल मारुति सुजुकी ने यह नहीं बताया है कि कीमतों में 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी किन चुनिंदा मॉडलों पर लागू होगी। कंपनी की विस्तृत मूल्य सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग कारों और वैरिएंट की कीमतों में कितना बदलाव किया गया है। इसके बावजूद,सितंबर से लागू हुई यह बढ़ोतरी भारतीय यात्री वाहन बाजार में बढ़ती लागत के दबाव को दर्शाती है।
त्योहारी सीजन में वाहन कंपनियों के बीच ग्राहकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा भी तेज होने की उम्मीद है। एक ओर कंपनियाँ बढ़ती लागत के कारण कीमतों में संशोधन कर रही हैं, तो दूसरी ओर उन्हें बिक्री बढ़ाने के लिए आकर्षक वित्तीय योजनाओं और ऑफरों का सहारा लेना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में कार बाजार में कीमत,छूट और माँग के बीच दिलचस्प संतुलन देखने को मिल सकता है। मारुति सुजुकी समेत प्रमुख वाहन कंपनियों के लिए चुनौती यह होगी कि बढ़ती उत्पादन लागत का असर कम करते हुए त्योहारी सीजन की मजबूत ग्राहक माँग को बनाए रखा जाए।
