नेपाल में टनल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

नेपाल में टनल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी,भारत ने भेजी 95 टन राहत सामग्री और 54 विशेषज्ञ

काठमांडू,7 सितंबर (युआईटीवी)- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इसी बीच भारत की ओर से चलाया जा रहा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ रहा है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को बताया कि चिलिमे टनल में भारत-नेपाल की संयुक्त तकनीकी टीम कठिन परिस्थितियों के बीच लगातार सर्च और रेस्क्यू अभियान चला रही है। टीम को सीमित और खराब पहुँच,कीचड़ तथा भारी मलबे जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद बचावकर्मी टनल के अंदर लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अभियान की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चिलिमे टनल में भारत और नेपाल की संयुक्त तकनीकी टीम पूरी मेहनत से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि टनल तक पहुँच बेहद सीमित और खराब है। इसके अलावा अंदर की परिस्थितियां कीचड़ और भारी मलबे के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। इन मुश्किलों के बीच बचाव दल टनल के भीतर आगे बढ़ने और राहत अभियान को गति देने की कोशिश कर रहा है।

बचाव अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए टीम ने स्याफ्रुबेसी से टनल तक रस्सी कनेक्टिविटी स्थापित करने का काम भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य अधिक संख्या में लोगों और आवश्यक संसाधनों को टनल क्षेत्र तक पहुँचाना है। इसके समानांतर टनल की ओर अस्थायी सड़क के निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है। राजदूत के अनुसार,इस मार्ग के करीब 950 मीटर हिस्से की सफाई पूरी की जा चुकी है।

चिलिमे टनल के भीतर शनिवार को बचाव दल ने भारी मलबे,पानी और कीचड़ को हटाने का काम किया। बताया गया कि मलबा और कीचड़ टनल के अंदरूनी हिस्से में छत के करीब तक पहुँच गया है। ऐसी स्थिति में बचाव अभियान को आगे बढ़ाना बेहद कठिन हो जाता है। टीम का प्रयास है कि रास्ते को पर्याप्त रूप से साफ किया जाए,ताकि भारी मशीनरी को टनल के भीतर अधिक गहराई तक ले जाया जा सके और राहत एवं बचाव कार्य को तेज किया जा सके।

राजदूत ने बताया कि मलबा हटाने के साथ-साथ स्याफ्रुबेसी से टनल के पोर्टल तक पहुँच मार्ग बनाने का काम भी समानांतर रूप से जारी है। इस पहुँच मार्ग के तैयार होने से बचाव अभियान के लिए जरूरी भारी उपकरण और अन्य संसाधनों को घटनास्थल तक पहुँचाना आसान होगा। खराब भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित पहुँच के कारण यह मार्ग बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत ने टनल रेस्क्यू अभियान के साथ नेपाल के लिए व्यापक मानवीय सहायता भी जारी रखी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने नेपाल में बाढ़ से उत्पन्न गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही राहत और बचाव अभियानों में सहायता के लिए भारत ने 54 कर्मियों को नेपाल भेजा है। इन कर्मियों में टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ,फोरेंसिक विशेषज्ञ और चिकित्सा दल के सदस्य शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में भारत की ओर से नेपाल को दी जा रही सहायता की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत नेपाली सरकार की ओर से बताई जा रही जरूरतों के आधार पर सहायता जारी रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में नेपाल को अतिरिक्त फोरेंसिक किट,बेली ब्रिज और नेपाली सरकार की ओर से माँगी गई अन्य आवश्यक सामग्री भेजने की योजना है।

रणधीर जायसवाल के मुताबिक,भारत के दो विमान एक दिन पहले 21 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुँचे थे। इसके साथ ही अब तक सात विमानों के माध्यम से करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल पहुँचाई जा चुकी है। भारत की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव,राहत और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।

राहत सामग्री के अलावा भारत ने विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी है। कुल 54 कर्मियों में 30 टनल बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पाँच सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल हैं। ये सभी टीमें नेपाल में जमीन पर तैनात हैं और नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। इससे नेपाल के सामने मौजूद अलग-अलग चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध हो रही है।

टनल बचाव विशेषज्ञ चिलिमे टनल में चल रहे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। वहीं,फोरेंसिक विशेषज्ञ आपदा के बाद पहचान और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रहे हैं। चिकित्सा दल भी राहत एवं बचाव अभियान के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैनात है।

नेपाल में हालिया बाढ़ ने बड़े स्तर पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में बाढ़ और मलबे के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है तथा राहत और बचाव एजेंसियों के सामने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ बनी हुई हैं। ऐसे समय में भारत की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री और विशेषज्ञ दल नेपाल के बचाव प्रयासों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग रहा है। मौजूदा संकट के दौरान भी भारत ने नेपाली सरकार की जरूरतों के अनुरूप तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। राहत सामग्री की आपूर्ति से लेकर विशेषज्ञ टीमों की तैनाती तक, भारत की सहायता को बहुआयामी रखा गया है।

फिलहाल चिलिमे टनल में बचाव अभियान पूरी तरह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच जारी है। भारी मलबा, पानी और कीचड़ के कारण बचाव दल की गति प्रभावित हो रही है,लेकिन टीम लगातार रास्ता साफ करने और टनल के अंदर पहुँच बढ़ाने में जुटी है। अस्थायी सड़क और रस्सी कनेक्टिविटी तैयार करने का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है। करीब 950 मीटर रास्ते की सफाई पूरी होने के बाद भारी मशीनरी को आगे ले जाने की उम्मीद बढ़ी है।

भारत की टनल रेस्क्यू टीम और नेपाल की संयुक्त तकनीकी टीम का लगातार अभियान चलाना इस बात का संकेत है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव प्रयासों को रोका नहीं गया है। आने वाले समय में मलबा हटाने,पहुँच मार्ग तैयार करने और भारी उपकरणों को अंदर ले जाने के साथ अभियान को और गति देने की कोशिश की जाएगी। वहीं,भारत ने स्पष्ट किया है कि नेपाल सरकार की जरूरतों के अनुसार राहत सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता आगे भी उपलब्ध कराई जाती रहेगी।