ओस्लो,3 जून (युआईटीवी)- भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद रमेशबाबू ने नॉर्वे शतरंज 2026 में एक बार फिर अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर शतरंज जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। टूर्नामेंट के आठवें राउंड में हासिल की गई इस शानदार जीत ने न केवल प्रज्ञानंद की खिताबी उम्मीदों को मजबूत किया है,बल्कि उन्हें विश्व शतरंज के सबसे खतरनाक युवा खिलाड़ियों में भी शामिल कर दिया है।
महज 20 वर्ष की उम्र में प्रज्ञानंद ने वह उपलब्धि हासिल की है,जिसे शतरंज की दुनिया में बेहद खास माना जाता है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में दूसरी बार मैग्नस कार्लसन को पराजित किया। इससे पहले पिछले सप्ताह उन्होंने सफेद मोहरों के साथ खेलते हुए कार्लसन को हराया था। अब आठवें राउंड में काले मोहरों के साथ जीत दर्ज कर उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पिछली सफलता कोई संयोग नहीं थी,बल्कि उनकी निरंतर प्रगति और उच्च स्तर की तैयारी का परिणाम है।
इस जीत के साथ प्रज्ञानंद भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं,जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराने का कारनामा किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि कार्लसन लंबे समय तक विश्व शतरंज पर अपना दबदबा बनाए रखने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और उनके खिलाफ लगातार सफलता हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं माना जाता।
प्रज्ञानंद की इस जीत ने उन्हें उन चुनिंदा खिलाड़ियों के समूह में भी शामिल कर दिया है,जिन्होंने पाँच बार के विश्व चैंपियन कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में तीन बार पराजित किया है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारतीय युवा खिलाड़ी अब विश्व स्तर पर किसी भी प्रतिद्वंद्वी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्रज्ञानंद ने जिस तेजी से अपनी पहचान बनाई है,वह भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना जा रहा है।
नॉर्वे शतरंज के आठवें राउंड में केवल प्रज्ञानंद की जीत ही चर्चा का विषय नहीं रही। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने भी विश्व चैंपियन गुकेश डोमराजू के खिलाफ महत्वपूर्ण क्लासिकल जीत दर्ज की। सफेद मोहरों के साथ खेलते हुए फिरोजा ने बेहद तनावपूर्ण मुकाबले में धैर्य और सटीकता का परिचय दिया। समय के दबाव के बीच खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने एंडगेम को शानदार ढंग से सँभाला और अंततः जीत हासिल कर अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
गुकेश के खिलाफ मिली जीत के बाद फिरोजा टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान पर मौजूद वेस्ली सो के काफी करीब पहुँच गए हैं। इससे प्रतियोगिता और अधिक रोमांचक हो गई है क्योंकि अंतिम चरण में हर अंक बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
आठवें राउंड में वेस्ली सो और विंसेंट कीमर के बीच खेला गया क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालाँकि,इसके बाद हुए आर्मागेडन टाईब्रेक में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक अपने नाम कर लिया। इस परिणाम ने उन्हें अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर बनाए रखा और खिताब की दौड़ में उनकी स्थिति मजबूत की।
राउंड आठ के बाद की स्थिति पर नजर डालें तो वेस्ली सो 14 अंकों के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं। अलीरेजा फिरोजा 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं,जबकि प्रज्ञानंद रमेशबाबू 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अंकों का अंतर बेहद कम है,जिसके कारण टूर्नामेंट के अंतिम राउंड बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रज्ञानंद अपनी लय बरकरार रखते हैं,तो उनके पास खिताब जीतने का वास्तविक मौका मौजूद है।
महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच चुके हैं। आठवें राउंड में दो क्लासिकल मुकाबलों का फैसला हुआ,जबकि एक मैच का परिणाम आर्मागेडन टाईब्रेक के माध्यम से निकला। इस राउंड में बिबिसारा अस्सौबायेवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी बढ़त और मजबूत कर ली।
उन्होंने भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत हासिल की। काले मोहरों से खेलते हुए अस्सौबायेवा ने शुरुआती दबाव का सफलतापूर्वक सामना किया। मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ उन्होंने स्थिति पर नियंत्रण स्थापित किया और समय की कमी से जूझ रही दिव्या के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल कर पूरी बाजी अपने नाम कर ली।
दूसरी ओर झू जिनर ने मौजूदा महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन को हराकर बड़ा उलटफेर किया। पूरे मुकाबले के दौरान झू जिनर ने लगातार दबाव बनाए रखा और एंडगेम में अपनी बढ़त को जीत में बदलने में सफल रहीं। इस जीत के साथ उन्होंने अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत की और दिव्या देशमुख की बराबरी कर ली।
महिला वर्ग में एना मुजिचुक और हंपी कोनेरू के बीच खेला गया मुकाबला क्लासिकल प्रारूप में ड्रॉ रहा। इसके बाद हुए आर्मागेडन टाईब्रेक में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। अंततः हंपी कोनेरू ने काले मोहरों के साथ जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक अपने खाते में जोड़ लिया।
आठवें राउंड के बाद महिला वर्ग की अंक तालिका में बिबिसारा अस्सौबायेवा 15.5 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं। एना मुजिचुक 10.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं,जबकि दिव्या देशमुख और झू जिनर 10-10 अंकों के साथ बराबरी पर मौजूद हैं। इससे महिला वर्ग में भी अंतिम राउंड से पहले प्रतिस्पर्धा काफी दिलचस्प हो गई है।
नॉर्वे शतरंज 2026 अब अपने निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में खिताब की लड़ाई बेहद रोमांचक बनी हुई है। हालाँकि,भारतीय प्रशंसकों की नजरें विशेष रूप से प्रज्ञानंद रमेशबाबू पर टिकी हैं,जिन्होंने मैग्नस कार्लसन जैसे दिग्गज खिलाड़ी को दो बार हराकर इतिहास रच दिया है। यदि वह अंतिम चरण में भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखते हैं,तो भारतीय शतरंज को एक और बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सफलता मिल सकती है।
